भुट्टे का नयाअवतारम



















आजकल मेट्रोजहां में भुट्टा कोयले की आग और लोहे की जाली पर तपने के बाद दस रुपये में नहीं बिकता। गांव में तो दो रुपये का बिकता है। मेट्रोमॉल में भुट्टा उबल कर कार्न नाम से बिकता है। चाय की कप में बटर और मसाले के साथ मिलता है। बीस रुपये में। ग़ाज़ियाबाद के वैशाली में मेट्रो भुट्टे का फुटपाथी संस्करण लांच हो गया है। ठेले पर उबला हुआ भुट्टा मिलने लगा है। अब ये भी समझ गए हैं कि कोई जलभुनने के बाद भुट्टे को पसंद नहीं करता। जला भुना तो वह है ही। इसलिए उबले हुए का ज़माना है।

9 comments:

sanjay patel said...

चूल्हे या सिगड़ी पर सिके भुट्टे की बात ही कुछ और थी रवीश भाई. उस सिकाई में जैसे आत्मीयता की आँच भी मन में उतर जाती थी.मॉल कल्चर और उसमें भी डिस्पोज़िबल में उबली चीज़ को खाना जैसे नई तहज़ीब को पचाना है. दु:ख इस बात का भी होता है कि गाँव से आकर इन ओरिजनल चीज़ों का कारोबार करने वाले और ठिया लगाने वाले भी ज़माने की रौ में बहने लगे हैं ठीक भी तो है न ...वरना उनके घर के चूल्हे का क्या होगा.

ravish kumar said...

संजय जी

चलती का नाम ज़िंदगी नहीं अब तो बदलती का नाम ज़िंदगी है। सत्येंद्र सत्तू ब्रांड है। गजोधर उसका प्रचारक। दिल्ली की गलियों में बर्फ के साथ सत्तू का घोल मिल रहा है। बिसलरी के पानी में भी मिलता होगा।

पवन *चंदन* said...

बाग से आम की सूखी लकडि़यां चुन कर लाना और नहर किनारे उन्‍हें जलाना
फिर छांट छांट कर मकई के खेत से भुट्टे लाना
फिर भूनना और खाना खिलाना
बस ---
हवा हो गये वो दिन
गांव छोड़ पछता रहे हैं
भुट्टे नहीं कॉर्न खा रहे हैं

sindhu said...

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संदीप सिंह said...

ravish ji,ye sab gori chamdi ka kamak hai ,jo bhune bhute se apna hath kale nahi karna chahte.lad gaye wo din jab kalu miya fake mara karte the .

anil said...

दोस्तों अगर रवीश जी से बोर हो गयें हो तो मेरे नए ब्लॉग foktiya.blogspot.com पर भी कुछ टिप्पणी चिपका दीजीएगा .... अपने फोकट समय निकालकर....
अनिल फोकटिया....

राजीव जैन Rajeev Jain said...

sahi kaha aapne ab sike huee bhutte se jayda uble hue bhutte bik rahe hain.

PACKEGING KA JAMANA HAI ?

Monika said...

ravish g

namashkaar

bahut dino bad apki sadak par aayi to bhutto ki khushboo ne dhyaan kheencha.

mere paas ek jankaari hai, jo mai aap sab se share karna chahti hoon. ye jo MASALE WALA BHUTTA hai, ye aaj se nahi balki saalon se khaaya-khilaya jaa raha hai.mai to ise tab se janti hoon, jab 8-10 saal ki ya usse bhi choti thi. ye alag baat hai ki us bhutte ka swad ncr me nahi, balki haryana ke bhiwani me mila karta tha. ye mere liye khushi ki baat hai ki vo bhutta ab yahaan bhi milne laga hai.kyoni mere mayki jaane ka ek bada sabab vo masaledaar bhutta bhi hua karta tha.

ek aur baat, ye jo maal me 30-40 rs me 100-150 gm corn milta hai, uska taste aur is masaledaar bhutte ka taste aur prepration bhi alag hota hai.masaledaar ko aap sirf dano ke roop me hi nahi balki SITTE ke roop me bhi kha sakte hai.kabhi fursat ke lamhe milen to ek baar bhiwant jaa kar zaroor khaiyega. vahan ise MAKKA kahte hain.us jaisi makka apko kahin nahi milegii.

ravish said...

मोनिका
मुझे इस मसालेदार भुट्टे की जानकारी नहीं थी। हां मैंने इसका स्वाद भी नहीं चखा। अगली बार दिखेगा तो ज़रूर