शोक सभा पार्ट-२

उड़न तश्तरी जी ने पूछा है कि कितने विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे। दसवीं में पचीस लाख सत्तर हज़ार के करीब। इसमें से पंद्रह लाख फेल हो गए हैं। इंटर का रिज़ल्ट भी निकला है। इसमें भी पांच लाख विद्यार्थी फेल हुए हैं। इस वक्त उत्तर प्रदेश में कोई बीस लाख विद्यार्थी फेल हो कर घूम रहे हैं। अगर कोई इनकी राजनीति कर ले तो इस मुद्दे के ज़रिये पूरे प्रदेश में एक करोड़ लोगों तक पहुंच जाएगा। हर फेल करने वाले के घर में पांच सदस्य होंगे। गुणा करें तो संख्या एक करोड़ पहुंच जाती है। यानी एक करोड़ लोग इस वक्त शोक में डूबे हैं। इनके लिए न तो कोई हेल्पलाइन है न किसी एनजीओ का बयान।

ख़ैर इंटर के रिज़ल्ट के बाद मैंने अमर उजाला के लिए लेख लिखा था। सिर्फ तृतीय श्रेणी में पास होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत बढ़ा है। तृतीय श्रेणी में ग्यारह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रथम और द्वितीय श्रेणी में कमी आई है। लड़कों का पास प्रतिशथ तीस फीसदी कम हो गया है। पिछले साल की तुलना में सिर्फ चौवन फीसदी छात्र पास हुए हैं। लड़कियों का पास प्रतिशत पिछले साल और इस साल भी अस्सी फीसदी के करीब रहा है। यानी चोरी पर सिर्फ लड़के निर्भर है। इस बार चोरी नहीं हुई तो सिर्फ लड़कों का पास प्रतिशत क्यों कम हुआ? लड़कियों का क्यों नहीं? क्या मास्टर लोग सिर्फ लड़कियों को पढ़ाते हैं? या लड़के पढ़ते नहीं है। क्या मां बाप आवारा बेटों को पास कराने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है। लड़कियों को पीटते होंगे कि खाना भी बनाओ और पास भी करो। यही वजह है कि मजबूरी की मारी हमारी लड़कियां मेहनत के रास्ते से सफल होने लगी हैं। उन्हें मेहनत ही तो करना है। खाना बनाने के बाद थोड़ी और मेहनत कर ली। नकल का समाजशास्त्र लिंग आधार पर तय हो रहा है। शोक सभा के पहले लेख में आगरा के एक पत्रकार ने कहा है कि एटा ज़िले में सिर्फ २२ फीसदी छात्र पास हुए हैं। यह मुलायम सिंह वाला इलाका है। पिछली बार सरकार की थी तो अस्सी फीसदी पास हो गए थे। आज ये सारे मुलायम सिंह को कितना याद कर रहे होंगे।

ज़ाहिर है सवाल सिर्फ शिक्षा व्यवस्था का ही नहीं,मास्टरों की लापरवाही का ही नहीं बल्कि समाज का भी है। जो बेटों को पास कराने के लिए नकल पर पैसे खर्च कर रहा है।निराश होने की ज़रूरत नहीं है। यूपी की बेटियां अपने प्रदेश का ख्याल रख लेंगी।मैं मायावती की तारीफ नहीं कर रहा बल्कि अस्सी फीसदी पास प्रतिशत वाली बेटियों की कर रहा हूं। इन ईमानदार बेटियों की कामयाबी पर आइये हम सब खड़े होकर सलामी दें। और दुनिया को बतायें कि देखा हमरे यूपी की बेटियां चोरी से पास नहीं होती है। इस बार नकल नहीं हुई तब भी वो पास हुई हैं। पिछली बार भी अस्सी फीसदी। इस बार भी अस्सी फीसदी।
उम्मीद की किरण दिख गई यहां।

तो एलान यह किया जाता है कि यूपी की सामाजिक और शिक्षा प्रणाली की मौत पर होने वाली शोक सभा में सिर्फ बेटे बुलायें जाएंगे। उनके बाप और मां को भी बुलाया जाए। फिर मास्टर भी आएगा। बेटियों को कहीं और भेज दिया जाए, कामयाबी की नई नई कहानी लिखने। उत्तर प्रदेश का यह चेहरा किसी ने देखा है

21 comments:

अरुण said...

रवीश जी बहुत अच्छा लिखा है आपने , लगे हाथो आपने मुलायम राज मे नकल कराने के लिये जो छूट दी गई थी,उसका भी लेखा जोखा देते तो लोगो को राजनीती के इस स्तर का भी पता चल जाता ना मेरा भी सलाम उन बेटियो को जो खाना बनाकर अपने ना पढने वाले भाई के नाज नखरे उठाने के बाद भी पढाई के लिये वक्त निकाल कर समाज को दर्पण दिखा रही है

Dr. sarita soni said...

BAHUT AACHA "AALEKH" BAHUT DINO BAAD KUCH ISA PADHA JO DIL AUR MIND DONO KO PASAND AAYA.

AAPKE KUCH POST PADH KE LAGA AAP ISA KYU LIKH RAHE HAI PER SHAYAD WO MERE MIND KE DAYARE SE BAHAR THA KYUKI AAJ IS "AALEKH" KO APDH KE LAGA "AAP SACH ME AACHA LIKHTE HAI"
SABHI LADKIYO KO BAHUT SARI SHUBHKAMNAYE.

JC said...

Jai Vaishnodevi mata, adi adi, ki – athva ‘chandrma’ ke satva ki jo yogiyon ke anusar mun roopi Mansarovar mein vidhyaman hein, her ek prani mein, jo Ganga mata ke roop mein pritvi roopi Shiva ki vrikshadi jataon se nikali Bhagirathhi prayas se Raja Sagar (samudra) ke 60,000 putron ki atma suddhi (moksha) hetu!

प्रेमलता पांडे said...

बेटों में हीनतावश क्रोध भर सकता है और उतर सकता है - समाज पर, परिवार पर और माँ-बहन और बेटियों पर; समय रहते समाधान ज़रुरी है।

पास-फेल से ज़्यादा समझ और कौशल बढ़ाने की सोचनी होगी।

Sanjay Sharma said...

यह परीक्षाफल परीक्षा प्रणाली मे सुधार का घोतक है , शिक्षा प्रणाली मे सुधार का नही .परीक्षा केन्द्र के बदले शिक्षा केन्द्र पर अफसरी की जरूरत है .

tushar said...

ravish ji,

Sanmaj nahi aa raha hai ki voto ki rajniti ke chalte hum yuvao ki neev ko hi khatam kar de rahe hai. Yeh vicharniya hai ki itne kum result ke baad bhi jo prathibai nikal rahi hai vo desh ko nai disha ki oor le ja rahi hai Afsos isi baat ka hai ki yadi ye sabhi fail chatra yadi imandari se padkar paas ho to na jane is desh ko kaha le jayenge. Ravish ji mai apke vichar aaj ki dusri jwalant samasya GURJAR ANDOLAN ke vishay mei janana chata hui. Jisne voto ki chudra rajniti ke chalte Deah ke kai hisso ko aag mai jokh diya hai.


Tushar Rastogi
Kanpur
rastogit@zapakmail.com
tush.ras@gmail.com

JC said...

“Door se dekha to laga ande ubal rahe hein/ Pas se dekha to ganje uchhal rahe the.” :-)

Yeh mazak mazak mein ishara karta hai ki jo uper se dikhta hai, aur jo androoni satya hota hai unke beech bahut anter hota hai – kal ke sath bardhati khai saman.

Uprokta karan se gyani log khud apne mun mein jhankne ki salah de gaye. Kintu kal athva kaliyuga ke prabhav se hum use unsuna kar dete hain aur pani ke saman apne vicharon ko neeche hi behne dete hain (kyunki wo asan hota hai), aur phir kuch kal baad poochte hain, “Yar, itni mehnat ke bad bhi parvat shikhar humse door kyun hota ja raha hai?” :-)

Lage raho ‘satyagraha’ mein :-) Ek na ek din to sagar mein milna hi hai nadiyon ko :-)

Udan Tashtari said...

निश्चित तौर पर संपूर्ण शिक्षा प्रणाली (जिसमें परीक्षा प्रणाली तो स्वमेव शामिल है) में आमूलचूल परिवर्तन की दरकार है. बहुत उम्दा आलेख.

anil said...

रवीश जी आप बहुत अच्छा लिखते हैं लेकिन न जाने क्यों फिर भी लगता है कि लिखते वक्त आपमें खुदाई अहसास पैदा हो जाता है ....और उन पर जो टिप्पड़ियाँ आती हैं.... वो एनडीटीवी के एक बड़े रिपोर्टर की तारीफ में एक दूसरे से होड़ लेती दिखती हैं ....कुछ ज्यादा हो गया हो तो अपना छोटा भाई समझ कर क्षमा कर दीजियेगा....

JC said...

Anilji, Koi bhi daurd, yani ‘race’, jab arambh hoti hai to her khilardi ka lakshya hota hai pratham sthan pana – aur sone ka hiran jaise sone ka medal prapta karna, na mila to chandi ya kanse ka bhi chalega:-)

Koi bhi kuch aur soch hi nahin sakta. Hamari kathayein isko Arjun ka pakshi ki kewal ankh hi dekhne dwara drshata hai…Yeh jiwan bhi aisi hi ek daurd hai asthayi jeevon ki – pariksha mein her koi pratham sthan pana chahta hai…

Kabhi socha ki kyun?

Kyunki gyani kah gaye ki shrishti aur kal ka rachaiyata, Mahakal, nad-bindu hai, jo anadi aur anant hai aur usi se anant brahmand utpanna hua hai aur usi mein milna sabki majboori hai. Kintu kewal wo hi pratham sthan pata hai jo ‘Lakshman’ ho, yani wo satya janta ho aur uske mun mein sada ek hi lakshya ho – param satya ko pana!

कुमार शैलेन्द्र said...

उत्तर प्रदेश के परीक्षा परिणाम से पिछली सरकार के आकंठ भ्रष्टाचार में निमग्न होने की पोल खुलती है। इस वर्ष का परीक्षाफल विद्यार्थियों को एक सबक है। उम्मीद है आगामी वर्षों में विद्यार्थी अध्ययन के प्रति जागरुक होंगे। जहां तक दोषी होने का सवाल है तो सरकारें इसके लिए पूर्णतया जिम्मेदार हैं क्योंकि देश में भ्रष्टाचार को थोपने का काम राजनीतिक दल और सरकारें करती आ रही हैं जिससे शिक्षा का क्षेत्र अछूता नहीं है। शैक्षिक भ्रष्टाचार के लिए शिक्षकगण भी कम जिम्मेदार नहीं हैं जिनके द्वारा बच्चों के भविष्य का निर्माण होना है। कुछ अभिभावकगण भी इस खेल में शामिल हैं क्योंकि उन्हें नहीं पता है कि वे सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य के साथ ही नहीं खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि अपने राष्ट्र को कमजोर करने में भी संलग्न हैं। जाहिर है विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। इसलिए उनका दोष सबसे कम है। निश्चित रुप से वर्तमान सरकार इसके लिए धन्यवाद की पात्र है। जब तक शैक्षिक भ्रष्टाचार का उन्मूलन नहीं होगा तब तक किसी भी क्षेत्र के भ्रष्टाचार को मिटाना एक टेढ़ी खीर है। वर्तमान में इस विषय पर एक गहन विमर्श की आवश्यकता है, धन्यवाद।

rajesh said...

Ravish bhai,

aaj apka blog dekha..aur kyaa haal hai? Main kolkata mein PRBHAT KHBAR mein hun..baqee sab maje mein..Abhishek se aksar baat hoti hai..rajesh sisodia, 9883120744,

सुशील राघव said...

Ravish ji
aapka agra wala patrkar aapko namskar karta hai. pankaj ji ke sath aapki jodi achchhi jam rahi thi. jahan tak meri yaddast(momery) mujhe batati hai to yah aapki pahli as anchor prastuti hai. pahli hi prastuti me aapne rang jama diya.
aapne mere vicharon ko aapne aalekh me jagah di iske liye aapka dhanyawaad.
raghav.sushil@gmail.com

JC said...

Satya yeh hai ki ki aj her swadeshi “buddhi jivi” badlav ki avashyakta jatlata hai, kintu nirakar ‘sarkar’ ka moonh dekhta hai use khojne ke liye. Her koi yeh chahta hai ki langot doosra koi moorkha pehne, lathi leke ghume aur ant mein AK ki goli khaye ya langot pehene kisan ke saman perd se latak jaye – per mera sab mal ‘foreign made’ ho: panchon ungliyan ghee mein aur sir kardhai mein:-) Yeh kal ka prabhav nahin hai to aur kya hai? Kaliyuga mein Satyuga ke swapna:-)

Abhijit Shrivastava said...

भ्रष्टाचार तो सिर चढ़कर बोल रहा है बात चाहे उत्तर प्रदेश, बिहार की हो या हो दिल्ली की.
रवीश जी आपके ब्लाग्स पर आज मैं पहली बार आया हूं और यह जान कर प्रसन्नता हुई कि आप अपने ब्लॉग्स के माध्यम से अत्यंत ही महत्वपूर्ण विषयों पर टीका टिप्पणी कर समाज को जागृत करने में एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
वैसे मैं आपके हिन्दुस्तान दैनिक में प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक कॉलम की खास तारीफ करना चाहता हूं जिसका मैं नियमित पाठक बन गया हूं. अंत में यही कहना चाहूंगा कि आपका प्रयास नवीन और ज्ञानवर्धक है.

pawan lalchand said...

ravishji apse milne ki ichchha hai. kya nikat bhavishya mein poori ho sakti ? kyonki mujhe isse ek disha mil sakti hai..bhavishya ke liye..pawan_kabir@yahoo.ci.in

Shashi Bellamkonda said...

Ravish ji aaj maine NDTV ka program dekha aur aap ke blog pada. Bahuth accha hai aapke blog, kash main bhi hindi me likh saktha. Main washington DC mein rahta hoon.

Shashi Bellamkonda

Meghna said...

Ye mudda sirf UP ka nahi hai, Madhya Pradesh mein bhi yahi haal hai aur shayad baki aur bahot se rajyon ka bhi hoga. Iska asar na sirf sikhsha pranali par hai balki naukriyon par bhi hai. Ye jhalakta hai jab main kisi ka interview leti hoon kisi job ke liye, sari padhai ka asar samajh aa jata hai. Humnein apne bade college, mehnge schoolon ko to mazboot kar diya lekin buniyaad mein jo chote school aur gaon mein jo school hain unhe ab tak theek dhang se nahi chala paye hain. Humare Shikha Mantri ko jatiwad ki rajniti karne se fursat mile to kuch karenge shayad.

ravish said...

शशि जी
बहुत बहुत शुक्रिया। आप हिंदी में लिख सकते हैं। बहुत मुश्किल नहीं है। मेरे अलावा आप विस्फोट, मोहल्ला, अनामदास का पोथा, अज़दक इन सब ब्लाग पर भी जा सकते हैं। जहां आपकी पसंद की चीज़ें पढ़ने को

संजीव चौधरी said...

इस वक्त उत्तर प्रदेश में कोई बीस लाख विद्यार्थी फेल हो कर घूम रहे हैं। अगर कोई इनको पास करने का ठेका ले ले तो वो करोड़पति बन सकता है | रवीश जी आपको शायद पता ही होगा कि एक छात्र को पास कराने के पांच से सात हज़ार रूपये लगते है | तो सोचिये ये कितना बडा व्यवसाय है | और ये यंही नही रुकता अब जो बारहवीं मैं पास नही हुआ तो अब पांच-सात हज़ार दे कर पास का सर्तिफिकाते बनवायेगा और पुलिस मैं बरती होएगा, इस देश की सेवा करेगा | देश से गुंडाराज का खत्म करेगा ! खूब सारा पैसा कमाएगा और किया | इसीलिए उसका बिना पढे पास होना जरुरी है |

Rohit Tripathi said...

kisne kaha ki nakal vihin pariksha hui, jamkar nakal hui hai uttar prades mein hi, lekin phir bhi mayawati ko badhai duga ki kai jagah par woh nakal rokne mein kamyaab ho gayi hai. lekin yeh lamba safar hai, ladkiyon ke barein mein yahi kahuga ki "Imaandaar to woh bilkul nahi, kahi na kahi se jugaad kiya hoga nakal ka