ऐश की शादी में मीडिया बाराती


किसने कहा कि अमिताभ ने अपने इकलौते बेटे की पहली शादी में कम लोगों को बुलाया है ? ग़लत । अमिताभ ने भले ही हज़ारों कार्ड नहीं छपवायें होंगे मगर कई लोग हैं जो समझते हैं कि नहीं बुलाया तो क्या हुआ इतना पुराना संबंध है , उसी की खातिर चलना चाहिए । आखिर मीडिया का अमित जी से कोई आज का संबंध तो है नहीं । कितने इंटरव्यू , उनके संवादों का जाप, उनकी हर अदा पर दिलो जान की बौछार । ऐसा प्रगाढ़ संबंध और अगर न बुलायें तो क्या इसी दम पर सब भुला दिया जाए । नहीं । बिल्कुल नहीं । इसीलिए उनकी शादी में मीडिया वाले जा रहे हैं । वो पता लगा रहे हैं कि ऐश की साड़ी कहां बन रही है, फूल वाला कौन है ? हलवाई, दर्ज़ी, इत्रवाला कहां से आ रहा है ? सब की खोज हो रही है । क्या पता कोई रिपोर्टर हलवाई की टीम में शामिल होकर अमित जी के घर में गाजर कद्दूकस करने लगे और अपने मोबाइल से शादी की तैयारी का एमएमएस भेज दे । तब हो गया न खेल ।

इसलिए मेरी एक योजना है । हर चैनल कई रिपोर्टरों की टीम तैयार करें । किसी को हलवाई का प्रशिक्षण तो किसी को बैंड बाजे का दें तो किसी को शामियाना सजाने का । बस हर तरफ रिपोर्टर ही रिपोर्टर । फिर देखें कैसे अमिताभ जी इस शादी को गुप्त रख पाते हैं । वैसे भी इस देश में सदियों से भूखमरी, आंधी , पानी की समस्या है । दो चार हफ्ते ब्रेक लेकर ऐश अभिषेक की शादी की खबर देख ही लेंगे तो क्या हो जाएगा । दुखी न हों । योजना बनाएं । शादी में चलने की तैयारी कीजिए । उनके यहां एक ड्राइवर है जिसका भाई बलिया से आया है । उसकी जगह कोई रिपोर्टर नौकरी पर आ जाए और अभिषेक की गाड़ी चलाने लगे । सीधा लाइव फोनो दे दे । देखता हूं कौन सा चैनल नहीं दिखाता है । ये काम कोई फ्री लांस रिपोर्टर भी कर सकता है । बाद में वो अपना फुटेज सबको बेच देगा ।

रही बात मीडिया और लम्पटीकरण के थ्योरी की तो छोड़ो यार । कोई सुन रहा है क्या । बहस ही करते रहेंगे और पता चलेगा कि अभिषेक का जूता भी खरीद कर आ गया । उसका शाट्स मिस कर गए । हमारे पटना में न्यू मार्केट में ज़्यादातर होनेवाली दुल्हनें खरीदारी के लिए जाया करती हैं । लहंगा । बिंदी । लिपस्टिक के लिए । मेकअप बाक्स । आलता । नए कपड़े । चप्पल । साथ में खरीदारी के लिए पड़ोस की लड़कियां, रिश्ते की बहनें और भाभियां । इतने लोग इसलिए भी जाते हैं क्योंकि पहली बार मां बाप भी लड़कियों को खूब पैसा देते हैं । जाओ बेटी खरीद लेना । यह दस साल पहले की बात है । अब भी होता ही होगा । कहना यह चाहता हूं कि ऐश के पास तो इन सब सामानों की कोई कमी नहीं होगी । मगर खरीदारी तो हो ही रही होगी । हमें दुल्हन के सामानों के होल सेल वालों से पता करना चाहिए कि तुम्हारा माल किस खुदरा व्यापारी से ऐश के घर में जा रहा है । वहां पर कैमरा लगाया जा सकता है ।

अरे भाई मैं भी खरीदारी में अटक गया । बाराती की बात करने वाला था । अमित जी ने जितने बाराती को नहीं बुलायें हैं उतने हमारे पेशे के लोग जाएंगे । उससे अधिक । हर मोड़ पर एक रिपोर्टर लाइव करेगा । अमर सिंह से भी इंटरव्यू किया जा सकता है कि वो इस शादी के लिए कहां से कपड़े सिलवा रहे हैं । तोहफा क्या देंगे । पिछली बार जो कार दी थी उसी से काम चला लेंगे या नया कुछ देंगे । इस दिन अमर अंकल उपवास पर रहेंगे ताकि शाम को जमकर खा सकें । या फिर खाने के पहले अपनी कार की डिक्की से वो सब निकाल कर दोस्तों के साथ पी लेंगे । फिर नाचने के बाद खायेंगे । अमिताभ जी ने इलाहाबाद से किसी को बुलाया है या नहीं ? इसकी भी खोज होनी चाहिए । वहां से अगर किसी को नहीं बुलाया है तो खबर बन सकती है कि अमिताभ भूल गए अपनी जड़ों को । जिस इलाहाबाद ने उन्हें पिता से लेकर ख्याति तक दी उसे भूल गए । अगर बुलाया है तो जिनको बुलाया है उनका इंटरव्यू चालू । उनके साथ एक रिपोर्टर ट्रेन में सवार हो जाएगा । पुराने रिश्तेदार तो कुछ तोहफे टोकरी, दौरा में लेकर जाएंगे । नारियल, सिंदूरदान, पितर पूजा की सामग्री, आदि आदि । इनका विस्तार से एक वॉक अबाउट हो सकता है । ऐसे तमाम आइडियाज़ है । सबके लिए हैं ।

तो हो गए न हम अभिषेक ऐश की शादी के बाराती । अरे हां आखिरी सलाह । कहीं पुलिस वाला किसी प्रेस की गाड़ी को प्रतीक्षा बंगले से दो किमी पहले न रोक दे आप अपनी गाड़ी पर प्रेस का लेबल हटा दें । उसकी जगह पीले रंग के कागज पर अभिषेक वेड्स ऐश लिख दें । क्या मजाल जो कोई रोक दे । बाराती पर कोई हाथ लगा सकता है क्या ? चलो भई शुरू करो । छोड़ों हिंदुस्तान की समस्याओं को । इनके रहते किसी के घर परिवार में शादी नहीं होती क्या ?

12 comments:

shailendra said...

भाइया रवीश जी, बात तो आपने पते की लिख दी है या यूं कहें कि पते से कुछ ज्यादा ही लिख दी है..क्योंकि बात पते की...तो प्रियदर्शन जी लिखते हैं। रही बात अभिषेक की शादी और उसका बाराती होने की, तो कई रिपोर्टर स्टोरी आइडिया के रूप में आपके लेख को अपने बॉस से रख रहें होंगे और बिना ड्राइवर की कार का छलावा देनेवाला बॉस उनके आइडिया को सुनकर मन ही मन खिचड़ी पका रहा होगा। वॉह क्या स्टोरी आइडिया है। सेलरी बढ़ने की संस्तुति हो चुकी है, लेकिन स्पेशल इंक्रीमेंट की बात भी वो रिपोर्टर के लिए सोचने लगा होगा, क्योंकि अभिषेक और ऐश की शादी की एक भी फुटेज मौके पर मिल गयी, तो उस बॉस और चैनल की तो निकल पड़ी। हमने भी अपने साथी कई रिपोर्टरों को आपकी खबर पढ़ने के लिए कहा है, हो सकता है वो इसे पढ़कर प्रेरणा ले सकें और प्रतीक्षा में घुसकर फुटेज बनाने में कामयाब हो जाएं, क्योंकि स्टोरी बनाने के लिए तो सब जायज है, उसके लिए चाहे की भी करना पड़े। बारातियों की बूट पॉलिस भी रिपोर्टर कर सकते हैं। उन्हें तो सिर्फ फुटेज चाहिए और उनके बॉस को टीआरपी और टीआरपी अभिषेक और ऐश की शादी की फुटेज से अच्छी कौन दे सकता है।

Rama said...

क्या शानदार लिखा है भाई. इसे दर्द कहें या भड़ास पर जो भी हो है तो हकीकत, कुछ ऐसा ही यहां भी हो रहा है ... बॉस ने कहा है शादी को लेकर यंग जनरेशन से बात करने को तो भैया अपन तो जा रहे है बात करने

अनामदास said...

प्रिय रवीश जी
बहुत धन्यवाद. आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए. हम हमेशा पढ़ते हैं आपको और प्रशंसक हैं आपके काम के, ब्लॉग पर और टीवी पर भी.
एक बार मिले हैं हम, भीड़-भाड़ में मिले थे,अगली बार तसल्ली से मिलेंगे तो बातें होंगी.
अनामदास

Shiv Kumar Mishra said...

Pichhle dino dekha.Ek channel ki 'samvaaddaata' ko.Chehre par khushi.Kis baat ki?...Unhein kahin se Abhishesk aur Aishwarya ki shaadi ke saath bheja gaya choclate mil gaya tha khaane ko....Unhone poore Bharat ko bataaya ki choclate meetha tha...

Bhaiya, 'News channel' waalon ki wajah se ye shaadi pichhle kai maheenon se rashtriya bahas ka vishay bani hui hai..Is 'Maanglik' kaarykram mein TV ke patrakaaron ko dekhne aur sunane mein bada mazaa aayega...Khaaskar ye dekhne ke liye ki Diwaali ke mauke par kurta-paayjaama pahan kar dikhne waala patrakaar, baraati bankar kaisa lagta hai...Unke mehnat karke banaee gai prashn soochi to aur rochak rahegi...

Waise Abhishekh aur Aishwarya ki shaadi se hamare cricketers bade khush hain...Unhein raahat ki shaansh di Amitabh Bachchan ji ne...Nahin to abhi tak gaaliyon ka vishesh karykram chlta rahta...

Ye 'Foot-age' ka hi zamaana hai...Imthaan dono ka hai.. Baraati bane huye patrkaar, aur patrakaar bane huye baraati ka....

Rajesh Roshan said...

Mansik diwaliya pan hai yeh. Kya karenge bechare kuch to karna hai. Ye kewal isliye karte hain ki kuch to karna hai. 24 hrs ka news channel jo khol rakha hai. LOL :). Main to unlogo ko patrkaar kahte hue dukhi ho jata hu ki mujhe bhi log ushi nasl ka manne lagte hain. :( Koi baat nahi sabki apni niyati hai.

ajay said...

Ravish Ji idea to sabhi sateek hai.. lekin apne channel ki stretagy leak out karna thik baat nahi..aap sabhi ko itne saare funde bata denge to break karne ke ke liye kya rehe jayega...

Raag said...

हा हा हा हा। कह चुका हूँ पहले, फिर कह रहा हूँ "खिसिया लो थोड़ा और।"

ravish said...

राग भाई
खिसिया कर क्या करेंगे । अगर किसी ने कवर करने भेज दिया तो करना भी पड़ेगा । लेकिन इस शादी में कुछ ब्रेक करो यार । जैसे अमिताभ की समधियाने वाली धोती कहां खरीदी जा रही है । कहां इसे पीले रंग में रंगा जा रहा है । कुछ तो ब्रेक करो । नाई कौन होगा । ठाकुर जी होंगे या हबीब भाई हेयर कटर । कुछ करो यार ।

somen said...

ravishiji,
bus ek baat samajh me nahi aa rahi. kis par hanse...khud par, aap par,aapki lekh par,aapke channel par ya hamare channel par? kehne ko sab yehi raag alapte hain par aapki aukat to itni hai ki aap yahan ek nayee disha de sakte hain. kuch karte kyun nahi ? ya phir bachchansaab ka phone aane ke baad hi ye tay karenge ki aap barati nahi hai. jaisa aamir khan sahab ke phone aane par tay kiya tha ki unki shaadi me aap baraati nahi banege. aap bhi agar sirf chiitha hi likhte rahenge to hum kis aur dekhe.

ravish said...

सोमेन जी
ये बहुत बचकाने तर्क है कि मेरी औकात इतनी है या नहीं । मैं सब जगह नहीं हूं । लिखने का मतलब सिर्फ रोना नहीं होता है । अब हर लिखने वाले को इसी कसौटी पर कस देंगे कि आप कुछ क्यों नहीं करते, लिखते क्यों हैं तो ये ठीक नहीं है । फिर मैं भी तो यह कह सकता हूं कि आप पहल क्यों नहीं करते । आपको कैसे पता कि मेरी औकात है भी या नहीं । अजीब बात है । लिखना भी प्रतिरोध है । या नहीं है । मुझे अधिकार है कि अपने आस पास की चीज़ों पर किसी भी रूप में प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकूं । रही बात हंसने की तो इसीलिए लिखा गया है । सब पर हंसो । किसी एक पर क्यों हंसोगे ।

somen said...

Ravishji,
itna kyun gussa kar rahe hain. mafi chahunga agar kisi tarike se kuch zyada kah gaya.
tark shayad bachkana hi ho. hanmari samjh to bus utni hi hai. rahi baat aapki aukat ki..ab hum kya kahe.poori duniya janti hai. isiliye to zyada dukh hota hai. log kehte kuch hain aur karte kuch (aapki aur ishara nahi hai.)khair,us kasuti par har kisi ko nahi naap raha hoon aur na hi napa ja sakta hai.ye pratirodh ka tarika zarur hai par dukh sirf is baat ka hai ki kahani yahin kyun khatam ho jati hai. aur jahir si baat hai ki main bhi doshi hoon. main isse inkaar kab kiya hai. khair baal ki khaal ukhadkar kya karenge. aap likte rahiye, hum padhte rahenge. baratiyoon ki kami kahan hai.

alok said...

रवीशजी
आपकी खरी और भरी बातों का हमेशा कायल रहा हूं।
एक टीवी चैनल सोच रहा था कि ऐश-अभिषेक के काल्पनिक हनीमून का नाट्य रुपातंरण कर दिया जाये। नाग, भूत, सेलिब्रिटीज को देखकर मैंने एक मीडिया कोर्स डिजाइन किया है। आप बतौर गेस्ट फैकल्टी आयेंगे, तो बढ़िया रहेगा, कोर्स यूं है-




इधर मामला टेंशनात्मक हो गया है।
हर बच्चा टीवी पत्रकार बनना चाहता है। पर यह उन्हे यह समझाना मुश्किल है कि अब टीवी पर पत्रकार का स्कोप उतना नहीं है, जितना नाग-नागिन, भूत-प्रेतों का है। अगर आप राखी सावंत या राजू श्रीवास्तव नही हैं, तो टीवी न्यूज में कैरियर मुश्किल है, यह बात कई समझाने की कोशिश करता हूं। बच्चे नहीं समझते। पब्लिक की डिमांड पर इस खाकसार ने एक नया मीडिया कोर्स डिजाइन किया है। इच्छुक प्रवेश के लिए 1 लाख रुपये का ड्राफ्ट भिजवायें।
कोर्स में पांच पेपर होंगे।
पेपर नंबर एक भूत-चुडैल मैनेजमेंट
यह पेपर इधर बहुत ही जरुरी हो गया है। इधर तमाम चैनल नौकरी देने से कहते हैं कि शमशान से कोई भूत पकड़ ला सकते हैं, तो आपकी नौकरी पक्की।
इस पेपर को पढ़ने के बाद कैंडीडेट इतनी काबलियत हासिल कर लेंगे कि वह कह सकें –अजी शमशान से क्या लाना, मैं तो खुद भी भूत हूं।
इस पेपर को पढ़ाने के लिए शमशान के अघोरी बतौर गेस्ट लेक्चरर आयेंगे।
जिन कैंडीडेटों की फैमिली हिस्ट्री दिल की बीमारी की रही है, वे कृपया इस कोर्स में एडमीशन न लें।
यह पेपर प्रयोगात्मक रुप से पढ़ाया जायेगा, इसकी क्लास पुराने किलों, हवेलियों, श्मशान, कब्रिस्तान में ही होंगी। पेरेंट्स कृपया ध्यान दें, जो अपने बालक और बालिकाओं को रात के दो बजे शमशान में न भेज पायें, वे कृपया अपने बच्चों को इस कोर्स में न भेजें.
पेपर विवरण
भूतों के प्रकार, भूतों की परिभाषा, नये और पुराने भूतों के बीच अंतर
गांव के भूतों, शहरों और महानगरों के भूतों के टेस्ट में अंतर
कब्रिस्तान और शमशान के भूतों के धार्मिक और सांप्रदायिक अंतरों का विश्लेषण
भारतीय भूत और ग्लोबल भूत
भूतों के अफेयर, चुड़ैलों की स्टाइलें।
पेज थ्री चुड़ैलें
नोट-इस पेपर को पढ़ने वाले हर छात्र को सत्र के अंत मे एक भूत पकड़कर दिखाना होगा, औऱ उस भूत से तरह-तरह के काम कराने की महाऱथ हासिल करनी होगी।
-सजेस्टेड रीडिंग्स-
-भूत स्टाइल्स एंड प्रोफाइल्स-लेखक अघोरी टनटनानंद
-क्यूट चुड़ैलें-लाइव्स एंड हिस्ट्री-लेखक भूताशिकानंद
निम्नलिखित हिट टीवी कार्यक्रमों की विशेष केस स्टडी भी कोर्स का हिस्सा होंगी-
कातिल कब्रिस्तान, चौकन्नी चुड़ैल, मौत का धुआं, मुरदे की वारदात, मुरदा शहर, जिंदा कब्रिस्तान, श्मशान में पेज थ्री पार्टी, एनआरआई भूतों के लव अफेयर, ब्यूटीफुल चुड़ैलों के शातिर खेल।

पेपर नंबर दो-नाग मैनेजमेंट
चैनलों पर भूतों के बाद सबसे ज्यादा टीआरपी अब नागों की आ रही है। इस पेपर के जरिये बच्चों के बताया जायेगा कि इच्छाधारी नाग और गैर-इच्छाधारी नाग क्या होते हैं। इस पेपर को पढ़ने के बाद कैंडीडेट खुद भी इच्छाधारी नाग हो सकता है।
इस पेपर के प्रोफेसर विख्यात सपेरे ही होंगे।
छात्र और छात्राओं को सपेरों की ड्रेस पहनकर गांव-जंगलों में नागों की तलाश में जाना पड़ेगा।
जो पेरेंट्स अपने बालक और बालिकाओं को सपेरों की ड्रेस में नागों की तलाश में असम के जंगलों में भेजने में समर्थ नहीं हैं, वे कृपया अपने बच्चों को इस कोर्स में नहीं भेजे। पत्रकारिता बहुत मुश्किल काम है, यह बात ऐसे ही नहीं कही जाती।

पेपर विवरण-
नाग और नागिनों के प्रकार
अब तक नागिनों पर सारी फिल्में-विशेषत नगीना, नागिन( सारी), मैं तेरी दुश्मन तू दुश्मन तेरा, कोबरा, ब्लैक कोबरा, नागिन का डंक
नागों की टीवी में भूमिका
नागों के रंग-ढंग
नाग और टीआरपी
देशी और विदेशी नागिनें
नागों का मेकअप,
नागों को कैमराफ्रेंडली कैसे बनायें
नागों से इंटरव्यू में सावधानियां
इच्छाधारी नागों की समस्याएं
नागों से बातचीत(अगर आप खुद भी नाग हैं)
नागों से बातचीत(अगर आप नाग नहीं हैं)
सजेस्टेड रीडिंग्स-
नाग हिस्ट्री एंड फ्यूचर-स्वामी नागानंद
टीवी फ्रेंडली नाग-न्यू ट्रेंड्स एंड एनालिसिल-सपेरा नृत्यानंद
सत्र के अंत में हर छात्र और छात्रा को एक धांसू नाग या नागिन पकड़कर दिखाना होगा। उन छात्रों और छात्राओं को विशेष नंबर दिये जायेंगे, खुद ही इच्छाधारी बन पाने में समर्थ होंगे।

पेपर नंबर तीन- लतीफा प्रेजेंटेशन
नाग, भूत के बाद सबसे ज्यादा टीआरपी लतीफों की होती है।
हम कोशिश करेंगे कि प्रोफेसर राजू श्रीवास्तव, प्रोफेसर एहसान कुरैशी खुद इस पेपर को पढ़ाने के लिए हाजिर हों।
इस पेपर को पढ़ने के लिए छात्र-छात्राओं को ऐसी ड्रेस पहनकर आनी पड़ेगी, जिसे देखकर पब्लिक हंसे। जो पेरेंट्स ड्रेस सेंसिटिव हैं, वे अपने बच्चों को इस कोर्स के लिए ना भेजें।
पेपर विवरण
लतीफों का इतिहास,
अश्लील चुटुकलों का टीआरपी में योगदान
घटिया चुटकुलों की वैबसाइट
चुटकुलों को सुनाने की स्टाइलें
चुटकुला चिंतन कैसे करें
एसएमएस चुटकुला लेखन
सजेस्टेड रीडिंग्स-
घटिया चुटकुलों का धांसू प्रजेंटेशन-प्रोफेसर राजू श्रीवास्तव
उलटे-पुलटे चुटकुले-प्रोफेसर जसपाल भट्टी
स्टाइल में हंसाओं-प्रोफेसर राखी सावंत
सत्र के अंत में हर छात्र-छात्रा को पांच नये चुटकुलों को पेश करना होगा। सबसे ज्यादा घटिया चुटकुले बनाने वालों को विशेष अंक दिये जायेंगे।

पेपर नंबर चार-लव-क्राइम-डाका-ठगी स्टडीज
इस पेपर में वो आइटम पढ़ायें जायेंगे, जिनकी विकट डिमांड हैं।
पेपर का उद्देश्य यह है कि इस पेपर को पढ़ने के बाद बच्चे और बच्चियां वैसे हिट टीवी कार्यक्रम बनाने सीख जायें, जैसे अभी टीवी पर आ रहे हैं-यथा रात की वारदात, कोहरे के चेहरे, एक चाकू पांच सौ डाकू, कातिल बाथरुम, सन्नाटे की सनसनी आदि –आदि।
इस पेपर को पढ़ाने के लिए हमने सरकार से अनुरोध किया है कि वह जेल से कुछ ऐसे अपराधियों को रिहा करे, जो लव त्रिकोण, मर्डर, वगैहर के मामले में बंद हैं। प्रेम त्रिकोण की डिमांड सबसे ज्यादा है।
पेपर विवरण
प्रेम त्रिकोण-इतिहास और वर्तमान
ऐतिहासिक प्रेम त्रिकोण के मामले
प्रेम त्रिकोण के सारे कोण
यश चोपड़ा की सारी पुरानी फिल्मों की स्टडी जैसे कभी-कभी, दाग वगैरह
झूठ का प्रेम में योगदान
प्रेम औऱ ठगी का संबंध
ठग बनने की प्रक्रिया में प्रेम संबंधों का योगदान
चार्ल्स शोभराज के जीवन पर विशेष अध्ययन
हर्षद मेहता के जीवन की केस स्टडी
नटवरलाल की केस स्टडी

सजेस्टेज रीडिंग्स-सदी का महानायक चार्ल्स शोभराज-प्रोफेसर प्रेम ठगानंद
प्रेम के गेम्स- प्रोफेसर जोशो
सत्र के अंत में छात्रों और छात्राओं से उम्मीद की जायेगी कि वे कम से कम पांच चक्कर चला चुके होंगे। एक ही प्रेम में यकीन करने वाले परंपरागत संकीर्णमना पेरेंट्स अपने बच्चों को इस कोर्स में न भेजें। पत्रकारिता अत्यंत ही दुष्कर कार्य है, यह बात ऐसे ही नहीं कही जाती है।

पेपर नंबर पांच-सेलिब्रिटी स्टाइल्स
इसमें भी वह सब पढ़ाया जायेगा, जिसकी विकट डिमांड है।
यह पेपर पढ़ाने के लिए सेलिब्रिटीज और सेलिब्रिटाज आयेंगे।
पेपर विवरण-
सेलिब्रिटाज और सेलिब्रिटीज का नाश्ता
सेलिब्रिटाज और सेलब्रिटीज का खाना
सेलिब्रिटाज और सेलिब्रिटीज का डिनर
सेलिब्रिटाज और सेलिब्रिटीज का मुस्कुराना
सेलिब्रिटाज और सेलिब्रिटीज के लव अफेयर
सेलिब्रिटाज और सेलिब्रटीज और क्राइम

नोट-इस कोर्स को करने के लिए छात्र और छात्राओं को सिर्फ और सिर्फ इन विषयों पर फोकस करना चाहिए। जो छात्र या छात्रा राजनीति, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र ऐसी किसी अगड़म-बगड़म चीजों को पढ़ता हुआ पाया जायेगा, उसे कान पकड़कर बाहर निकाल दिया जायेगा।
संपर्क करें-आलोक पुराणिक
स्कूल आफ न्यू मीडिया, ठग गली, चालूपुरम्, दिल्ली -11001420

आलोक पुराणिक एफ-1 बी-39 रामप्रस्थ गाजियाबाद-201011
मोबाइल-9810018799