लघु प्रेम कथा (लप्रेक)

(1)
मेट्रो ने मालवीय नगर को माडल टाउन से जोड़ दिया है। घंटे भर में दनदनाती हुई ट्रेन ने दोनों की दूरी काफी कम कर दी है। वक्त तो बच गया मगर कहने को कुछ बचा ही नहीं। वे तमाम योजनाएं जो दोनों ने बनाईं थी अब आउटसोर्स होने लगी हैं। साथ साथ कुछ सोचने और करने का फ़न कम होता जा रहा था। यार तुम बस से आया करो न। क्यों?  मेट्रो में क्या प्रोब्लम है? कम से कम फोन कर पूछने का मौका तो मिलेगा कि कहां हो, कब आओगे। इश्क में हम बेरोज़गार हो गए हैं। चलना न फिरना। कब तक मेट्रो से उतर कर हम मॉल के खंभों से चुपचाप चिपके रहेंगे। इस मेट्रो को कह दो कि जाये यहां से।

17 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

दूरियाँ भी कम की, संभावनायें भी।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:) यह भी मुसीबत है ....

nptHeer said...

Short love stories dikhi lekin 'parkingnaama' + 'cine mann' kahaan park hota hai?:-/ --'chānd tum ek karmachari ho-ab to hathelion main bhi dikhte ho' :)

Abdul Sadab said...

wahh sir lajwaab #alak !!

अनूप शुक्ल said...

:)

Profcomm said...

Nice! Speed does take away some good things in life. I have never enjoyed writing an e-mail as much as I did writing an "inland letter" or a letter spanning several pages. Coming to the story, a metro is perhaps a vehicle, a metaphor, for a different type of romance. -- Anish Dave

Akhilesh Jain said...

क्या कहें सिवाय इसके कि ख़त लिखने में जो मजा था वो एसएमएस में नहीं!

Neetu Sharma said...

Aisa safar jisme sath hamare pyar ka ho to .........man karta h ki ye safar aur lamba ho jaye.......agar aise me manjil jaldi aa jaye to bada bura lagta hai...:(

ram milan said...

कहने को बहुत कुछ है सुनने की ख्वाइश है ,
फ़िलहाल बस इतना चाहता हु के कोई सिखाने को तैयार नहीं ,बस इक गुरु चाहता हु ऋषि सम्भूक जैसा न की गुरु द्रोणाचार्य जैसा ,
बहुत तलाशने के बाद भी कोई एस नजर नहीं आता जो खुद को झूठा साबित करके किसी और को सच्चा बनाये !
बहुत अजीब है मेरी बाते बहुत अजीब हु ,मैं उससे जद अजीब है मेरी जिज्ञासा ऐसा मैं नहीं ज्ञानी लोग कहते है जो समझ नहीं पाते और समझाने की कोसिस करते है ! और हो भी क्यों न जिस इन्सान ने खुद के वजूद पर ही सवालिया निशान लगा दिया हो जो सिर्फ एक पहेली बन कर रह गया हो जिसे हर वो इंसान एक सवालिया अंदाज़ में नजर आता है जो खुद को सर्वज्ञता समझता है ,जो मेरी समझ की कसौटी से कोसो दूर नजर आता है उन सबके लिए ही मैं एक महा मुर्ख हु क्योंकि महाज्ञानियों को मुर्ख कहने वाला महा मुर्ख ही होता है ,पर क्या करू कुछ अजीब है इस दुनिया की सच्चाई जहा सिर्फ उलझन ही भरी हुई है !
फ़िलहाल मैं आप से कुछ सीखना चाहता हु दुनिया को आप की नजर से देखना चाहता हु !देखना है जो इंसान इतना बेबाक और सटीक बोलता है वो लगों की नजर में खटकता क्यों है !
क्या आप मेरे गुरु बनेगे रविश भाई ?
मेरे पास देने को अंगूठा नहीं क्योंकि मैं कोई महँ धनुर्धर नहीं हु ,और न ही आप ने किसी को सर्वश्रेस्ट बनाने का वचन दिया होगा!
आप का छोटा भाई माने तो ,
नहीं तो महामूर्ख तो हु ही !
मुझे आप के उत्तर का इंतजार रहेगा !
R.M.Batham
cell no 8423077641
mail id yognandni2010@gmail.com
facebook id :- https://www.facebook.com/yognandni2010

Deepak Anjaan said...

Ravish Ji please see my blog deepak7861.blogspot.in
i would pleased to have yr comments on it.

madho das said...

अवकाश पे है आप???

Brij ka baashinda said...

waah

manohar gautam said...

watch free all indian tv channels and watch online bollywood movies
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George said...

साधन बढ़ जाने से रिश्ते नहीं मिट रहे हैं,,रिश्तों को नए आयाम मिल रहे हैं..कुछ नए किस्म के रिश्ते पनप रहे हैं..

GAURAV CHAUDHARY said...

kal kuch gali ke 14-15 sal ke bachcho ko kehte suna ki chalo pyar karne chalte hai.
mujhe laga layenge apne apne dilo se bhawnao ko nikal kar...

Par thodi der main hi nikal laye wo papa ke purse se debit card nikal kar.....
suna hai ashiqui ke karche bad gaye.

Ek bola haa bhaiya pad liya hai akhbar main Archies, P.V.R aur Mc-donalds par govt. tax bad gaya hai...........
Akhir ye movie,gift aur khane par itna kharcha karte kyu ho,

Sab ek sath bole kam se kam gift aur movie dikhai to dete hai, feelings kaha dikhai deti hai....aapko dikhai deti hai kya? maine kaha nahi.

Ek badi masoomiyat se bola, girl frnd ko ghar par dieting bhi to karni hoti hai, isliye mere sath hi 7-8 burger kha leti hai......

Jane do na, aaj 14 february hai bahut sara pyar karna hai aaj....

Bachcho ne jate jate ek bhram to door kar diya...main to aaj tak bollywood dialogue ko hi jivan ka satya man kar jee raha tha ki "pyar kiya nahi jata ho jata hai"...........lekin aaj ke yuvao ne to pyar karne ki kasam khai huyi hai

Fir chinta huyi mordern india ke apne jaise garibo ki, wo to is pyar se vanchit hi reh jayenge akhir ashiqui ke kharche jo bad gaye hain......

Mera bas chalta to ashiqui karne walo ke liye sarkari LOAN aur GIFTS par E.M.I ki mang karta.
Aur rashtriya strike place (JANTAR-MANTAR) par dharne par baith jata.........apna samarthan prakat karne ke liye like kare.

Kuch kar nahi sakta isliye yaha par apna virodh prakat kar raha hoon............

GAURAV CHAUDHARY said...

रविश सिर,
आपके शुध भाषा मे कहे हुए गहरे विचारो का प्रशंसक हूँ|
आपके प्राइम टाइम के ज़रिए अच्छी पत्रकारिता को देखने के साथ-साथ अपनी भाषाओ पर गर्व करने का अवसर मिल जाता है|
अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद|

anjali said...

read your blog after a very long time...simply enjoyed it..!!!