जलसेवक तोताराम


दिल्ली विश्वविद्यालय के ठीक सामने के रिंग रोड पर माल रोड है। उसके पीछे लखनऊ रोड है तिमारपुर है। वहीं मेरी नज़र तोताराम पर प़ड़ी। तोताराम सब्ज़ी बेचने का काम करते हैं। एटा ज़िले के कासगंज के रहने वाले हैं। दिल्ली में ही बचपन बीता। एक दिन सब्ज़ी बेचते बेचते मन किया कि लोगों को पानी पिलायेंगे। तब से अपने ग्यारह घड़ों को दिन भर भरते रहते हैं और निशुल्क पानी पिलाते रहते हैं। जलसेवक तोताराम अपने घड़ों की साफ सफाई रखते हैं। पानी गंदा न हो,इसका पूरा ख्याल करते हैं। मैंने पूछा क्यों करते हैं? जवाब दो टुक। मन किया।

23 comments:

honesty project democracy said...

शिला दीक्षित जी को इस सेवक राम के पास जाकर जनता की सच्ची सेवा का हुनर सीखना चाहिए /

नीरज तिवारी said...

कम ही विरलय ऐसे होते हैं जो जनसेवा को समझ सकते हैं। साथ ही, ऐसी खबरों को पकड़ सकने वाले बहुत ही कम पत्रकार। सच कहूं तो तोताराम वास्‍तव में गागर में सागर लिए हुए लोगों की प्‍यास बुझा रहे हैं।

Aadarsh Rathore said...

सलाम है इनके जज़्बे को

Kaushal Kishore , Kharbhaia , Patna : कौशल किशोर ; खरभैया , तोप , पटना said...

रविशजी
लोगबाग बेवजह दिल्ली को बदनाम करते हैं. दिल्ली में दिलवालों और जज्बाती इंसानों की कमी नहीं है.

कुमार राधारमण said...

जिसके पास जरूरत से ज्यादा होता है,वही किसी को कुछ दे सकता है-देने का भाव भी मन में लाए बगैर। यह प्रकरण बताता है कि कोई तरकारी बेच कर भी इतना संतुष्ट हो सकता है कि कुछ निस्वार्थ भाव से कर सके। "जामे कुटुम समाय" की वह सोच मोक्ष प्राप्ति का सहज द्वार है।

Sanjeet Tripathi said...

salam totaram jee ko.

गुस्ताख़ मंजीत said...

रवीश जी, ऐसे तोतारामों से धरती बची है। वरना लोग तो ऐसे-ऐसै भर गये हैं कि कब को रसातल को चली गई होती

JC said...

रविशजी, जब आठवीं क्लास तक इतिहास बे-मन पढ़ा तो तारीखें तो याद नहीं रहती थीं,,, मेरा जवाब हर बादशाह के बारे में कुछ इस तरह का होता था, "उन्होंने सडकें, सराय, प्याऊ, आदि बनवाये"...

और वैसे भी हम बचपन में घड़े और सुराही आदि का ही गुणकारी पानी पीया करते थे,,, और धूप में किसी प्याऊ का पानी पी, आत्मा की शांति पा, तोताराम सरीखे परोपकारी व्यक्ति को धन्यवाद् देते थे ,,,और कूलर, फ्रिज आदि को आजादी के बाद 'आम आदमी' के घर में, या हर कोने में उपलब्ध दुकान में, आये तो अभी कुछ ही समय हुआ है...

Abhishek Kumar Srivastava said...

रविश जी नमस्कार !
बहुत अच्छी पोस्ट है ! दिल को छू गयी !
काश हमारे देश में सब एक बार अपने अंतर्मन की सुनकर अमल करने लगते तो !

जानकर ख़ुशी होती है की आज भी ऐसे ढेरों लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के लोगो के लिए कुछ करना चाहते हैं !
सेवकराम जी को मेरी शुभकामनायें है !
रविश जी आपको धन्यवाद् की आपने इसे खोज कर ब्लॉग पर लगाया !

नीरज जाट जी said...

कुछ लोगों को सेवा करने का मन करता है। उन्हे सेवा से ही खुशी मिलती है।
रवीश जी, एक विनती है:
आपने लिखा है कि तोताराम एटा जिले के कासगंज के रहने वाले हैं। विनती ये है कि अब कासगंज एटा जिले में नहीं है, बल्कि खुद एक जिला बन गया है। इसे ठीक कर लीजिये। धन्यवाद।

मसिजीवी said...

हम कुछ साल पहले इस जगह के एकदम पड़ोस में रहते थे...इन तोताराम के प्‍याऊ का उपयोग भी खूब होता है...दरअसल इस सड़क का सबसे ज्‍यादा उपयोग यमुनापार की कच्‍ची बस्तियों के वे साइकल वाले करते हैं जो सुबह दिल्‍ली की फैक्‍टरियों मजदूरी करने निकलते हैं तथा अलग अलग समय वापस आते हैं... वे अक्‍सर अपनी साइकल रोकर जीभर पानी नीते हैं और आगे बढ़ते हैं।

prabhat gopal said...

shandar post...totaram ko salam...

कुलदीप मिश्र said...

तोताराम जी को प्रणाम!
भविष्य में कभी अगर नॉर्थ कैम्पस पर 'रवीश की रिपोर्ट' दिखाएं, तो एकाध बाईट तोताराम जी की भी सुनना चाहेंगे! विनती को याद रखिएगा रवीश जी!

sahespuriya said...

{b} SALAM TOTA RAM {i}

kamlakar Mishra Smriti Sansthan said...

ram sewak jee ke jajbe ko salam.ek taraf pani becha ja raha hai to dusari taraf pani........

aneeta said...

sabse pahle totaram ji ko salam hai..,sahi mai dehli dil walo ki hai.kahte hai pani anmol hai aur totaram ne sahi mayne mai pani ke mol ko samjhaya hai.pani pila kar kisi ki seva ki ja rahi hai to isse badi seva kya ho sakti hai.

PrakashSinghRathod said...

isase lagata hai hamara koi astitwa nahi hai,bakai me ham log swarthi aur matlabi hai .


koshish karunga badalane ko

aakashsinhablog said...

sir mai aapka fan hoon .. kabhi aapka program mis nahi karta .. ye report waaakai kaabije taarif hai , hame jahaa par bhi rahe apne star se dusroon ke liye hamesa kuch karni chaahiye ..

बेचैन आत्मा said...

यह बहुत पुन्य का काम है. बचपन में हमने भी बनारस की गलियों में वैसाख के महीनों में लोगों को निःशुल्क पानी पिलाते देखा है...कहीं-कहीं अब भी ऐसे दृश्य देखने को मिल ही जाते हैं.
..सच्चे जनसेवक तो तोताराम जैसे लोग ही हैं.

seetu said...

जिस शहर की लोगो की आंखो का पानी मर गया है..वहॉ इस तपिश में कोई पानी ये गला भी तर कर सकता है जानकर अच्छा लगा

seetu said...

जिस शहर की लोगो की आंखो का पानी मर गया है..वहॉ इस तपिश में कोई पानी ये गला भी तर कर सकता है जानकर अच्छा लगा

Vijay said...

Good Work of Totaram
thanku your post
Master vijay singh
vist.mastervijaysingh.blogspot.com

Satyaprkash said...

ravish ji,vaise mai aapka bada prashanshak khud ko manta hu..kai najriya blog ke jariye padha accha laga...totaram apki najro se nhi bacha badi bat hai......satyaprakash