कहने का मन करता है...
वो काम ही तो है जिससे उम्र तमाम हुईवो काम ही तो है जिससे हम बदनाम हुए
वो काम ही तो है जिससे मिली पगारनौकरी का दर्द तो होता है तब सिर्फकरते रहो काम तमाम दिन ब दिनवीक दर वीक महीना भर महीनाऔर ना मिले पगार या कम मिले यार
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उमाशंकर सिंह... वैली ऑफ ट्रूथ
नासिरुद्दीन... ढाइ आखर
सत्येंद्र रंजन... इंक़लाब
नीलेश मिश्र... Writer at Large
राहुल पंडिता... Sanity Sucks
रवीश कुमार
1 comments:
वो काम ही तो है जिससे मिली पगार
नौकरी का दर्द तो होता है तब सिर्फ
करते रहो काम तमाम दिन ब दिन
वीक दर वीक महीना भर महीना
और ना मिले पगार या कम मिले यार
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