सड़क निर्माण सीएम

आज कल नेताओं को बिजली सड़क पानी पर को जनादेश मिल जाता है तो उन्हें लगता है कि उनका काम यहीं तक है। हज़ार किमी सड़क बनवा दो, बिजली के खंभे लगवा दो और पानी के टैंकर भिजवा दो। अगर इतना ही काम है तो मुख्यमंत्री और पूरी सरकार का चुनाव क्यों। क्यों नहीं पांच साल पर जनता सिर्फ पीडब्ल्यू डी मंत्री, बिजली मंत्री और जल मंत्री का चुनाव करे। मुख्यमंत्री का पद ख़त्म कर दिया जाए।

जब से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने हैं बिहार नहीं गया हूं। सुनता रहता हूं कि सड़क का शिलान्यास हो रहा है तो कहीं निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मैं भी खुश होता रहा कि बिहार बदल रहा है। क्या बिहार सिर्फ सड़क के बनने से ही बदलेगा? क्या नीतीश कुमार का सड़कें बनवाना काफी है? पांच साल बाद वो यह कह कर वोट मांगेगे कि हमने दस हज़ार किमी सड़कों को निर्माण करवाया है, वोट दीजिए।

गुजरात में भी अच्छी सड़के हैं। दिल्ली में भी अच्छी सड़के हैं। तो क्या राजनीति का यही चरम है कि कोई सड़क बनवा कर अपनी मंज़िल पा लेगा। नीतीश कुमार के बिहार में सड़क, बिजली और पानी के अलावा क्या बदल रहा है? क्या मुख्यमंत्री पार्षद की तरह गली नाली बनवाने में व्यस्त हैं? या फिर नई राजनीतिक संस्कृति भी बना रहे हैं? कैसे बनायेंगे। राम नाम वाली पार्टी का साथ है। खुद की पार्टी में कमीशन कट खाने वाले नेता खत्म नहीं कर पाए। क्या नीतीश दावे के साथ कह पायेंगे कि उनके राज्य में तबादलों में पैसे का लेन देन खत्म हो गया। उनके मंत्रियों ने पैसे नहीं बनाये।

अगर इस पर अंकुश लग गया होता तो अनंत सिंह की हिम्मत नहीं होती कि वो एनडीटीवी के पत्रकार प्रकाश सिंह और कैमरामैन हबीब की पिटाई करता। यह एक अपराधी और बददिमाग़ किस्म का नेता लगता है। जो अपने घर के जिम में शारीरिक ताकत बढ़ाता रहता है। दिमाग से नहीं सोचता। नीतीश कुमार ने अभी तक अपनी पार्टी के बाहुबलियों का क्या किया? क्या जनता के पास गए कि इस बार से बाहुबलियों को भी हरा दीजिएगा? जैसे लालू को हराया?

सवाल वही दस साल पुराना है। यहां की सामाजिक राजनीतिक संस्कृति कब बदलेगी। कब लोग ट्रांसफर पोस्टिंग की कामना लिए मंत्रियों के चक्कर नहीं लगाएंगे? कब लोग अपनी बेटी की शादी के लिए पटना के हनुमान मंदिर में मन्नत नहीं मांगेगे। एक जड़ समाज बनता जा रहा है बिहार का। जहां हर तरह के गैरकानूनी काम का सामाजिक समर्थन नज़र आता है। वर्ना अनंत सिंह जैसे नेताओं को अपनी पार्टी का बताने में नीतीश को शर्म आती और अनंत सिंह और उनके साथी शर्म से बताते नहीं कि हम भी विधायक है। मगर ऐसा नहीं है। ये सीना ठोक कर चलते हैं। बताते हैं कि बिहार इसी लायक है। बिहार के लड़के हीरो बन जायेंगे, आईआईटी चले जायेंगे मगर उन्हें नेता इसी लायक मिलेंगे। जो बंदूक लेकर चलता हो, गाली देता हो। इसीलिए लगता है कि बिहार नहीं बदला है। जैसे बिहार के लड़के सिलिकन वैली में इंजीनियर बन कर बिहार के बदलने का झांसा देते लगते हैं उसी तरह नीतीश कुमार गली नाली बनवाकर बिहार को बना देने का झांसा दे रहे हैं। प्रकाश सिंह, हबीब अली, अजय कुमार और सभी मीडियाकर्मियों पर हुए हमले की निंदा की जानी चाहिए। ये वही बिहार है। याद रखा जाना चाहिए। सड़कों में नए बिहार की तस्वीर मत ढूंढिये।

42 comments:

परमजीत बाली said...

सही कहा मात्र सड़क बना कर दिखा देने से बिहार में कुछ नही बदलेगा।

अनूप शुक्ल said...

सत्य वचन!

अनूप शुक्ल said...

सत्य वचन!

Bimbsaar said...

Kya jabse Nitish Kumar aaye hain, vahan sirf sadak bani hai? Kabhi soch bhi sakte the ki ek satta dal ka MLA itni saralta se giraftaar ho jayega agar galat kaam kare? Ya phir IIT ka Patna mein banana koi mayajaal hai? Bodh Gaya main budhist circuit ko badhawa dena, Ya phir patna univ ka result samay par aana, ya special aux police aur naxal hinsa mein kami?

Bihar nahin gaye hain, aapki marji - Dilli mein hi bane rahiye. Par bina vajah Bihar ki ninda shobha nahi deta. Sadaken sirf dilli valon ya gujarat valon ki bapauti nahin hai ki vahin achi banegi. Sadak ban rahi hai to achcha kaam ho raha hai - is baat ko svikaar kijiye.

राजीव कुमार - 5'8'' - अविवाहित said...

रवीश भाई, आपकी बातों से असहमति नहीं जताई जा सकती है। लेकिन, क्या सिर्फ़ बात करके या लिख के हम अपनी जिम्मेवारियों से मुक्त हो सकते हैं। क्या इसे इस्केपिज्म नहीं कहेंगे? क्या कभी हम या फिर आप वोट देने भी गए हैं अपने प्रदेश में? नहीं न। सवाल है कि हमने क्या किया है अपने प्रदेश के लिए? मैं किसी ख़ास पार्टी का समर्थन नहीं कर रहा हूं। लेकिन सच मानिए हालात बदल रहे हैं अपने प्रदेश में भी। समय लगेगा। और अनंत सिंह जैसे लुच्चे लफाड़ी तो आपको हरेक राज्य में मिल जाएंगे। तमिलनाडू, गुजरात, पंजाब तो आर्थिक पैमाने पर काफी आगे हैं। लेकिन वहाँ भी अलग-अलग नामों से "अनंत", "सूरजभान" आदि सरीके लोग हैं।

Sanjay Sharma said...

Ek Patrakaar ka kalam tab Chale jab
usake saathi ki Dhulaai kar di jaaye.ye utana hi sharmnaak hai jitana kisi mantri ,vidhayak,ya public sevak dhwara public ki aawaz ko uthaane wale ko peeta jaana. Naisadak ko Bihar ki Sadak par aaj hi kyon nazar gai?

Bihar me sudhar ho to raha hai. agar Mukhya-mantri Sadak Chhap hai.
to aap media waale Hawai jahaaj ho gaye ho.

Likhate Rahiye lagaataar tabhi emaandaar prayas kaha jayega sudhar ki disha me. Khaali Modi Anant,Sahabuddin,Surajbhan tak simit na raha jaaye. Bihar par hamesha nazar rakhiye.Sadak ko manjil dilaaiye.

बाल किशन said...

सत्य वचन.

Amit said...

Ravishji ma v journalist hu anant singh na jo kuch kya vo bahut hi gambhi masala hai. Jo kuch hua uspar mujha v bahut gussa aa raha hai.niteshji na is ghatana ka bad anant singh par furan karyee ki .bihar badlaga ya mugha viwash hai .ap jasa log hi bihar ki sabhi badnam kar hi.apko koi adikhar nahi banta ki ap nitishji ko sadak chap cm khai.ravishji dilli ma rah kar apka v dimag kaharab ho gaya . mari bat mana or apna dimag kisi hakim ko dikahaya iski apko sakth jurarat hai.

Savitree said...

satya wachan : par yah bhi utnaa hee sach hai ki aaj ke aam patrakaar apnee chhamtaa ko prayog karte samay santulit aacharan kam hee nibhate hain. Khud ko wishisht
samajhte hue doosron ko nikrishtha
samajhne kee prawrittee unmein barh rahee hai. ise najarandaaj naheen kiya janaa chahiye. Rah gaee
baat raajneetee ke galiyaron kee, to
us par alag se charchaa kee jaanee chaahiye.

savitree

MUKHIYA JEE said...

बिल्कुल ही बकवाह बात है ! बिहार के मीडीआ कर्मी जात पात करते है ! जब से नितिश सरकार आयी है - सभी मीडीआ वाले एक खास जाती को निशाना बना रहे है - यह बहुत ही गलत बात है ! NDTV पर भूमिहार पर आक्रमण करना - यह कहा तक ठीक है

MUKHIYA said...

Dear RAVISH

Whatever happened in BIHAR yesterday was wrong but its more WRONG to use abusive language against a CASTE on National Channel like NDTV INDIA !

Anant Singh or Surajbhan etc do not present the whole society .

Please stop terrorise people with the power of pen and camera :(

Baaz said...

Dear Ravish,
Very unfortunate happened in Bihar between Media and a supporters of Mokama MLA. I condemn such incident and we all should come together to condemn to anyone who is trying to overstepping and taking law and order in their hand.
I hear you sometimes on NDTV and I listen very passionately thinking some fellow Bihari is covering news. I look forward towards your comments but after reading your blog I am disillusioned. I do not find much difference in your thought and some of my co-villagers the way the speak in village on such matters. Earlier chief minister (Shri Lalu Prasad Yadav jee) had the similar view as you on development of Bihar. He also felt that Gali, naali, school, education is not important for Bihar. What is important for Bihar is class clash and I guess you also think the same way. Today media is most suppressed community in Bihar and current chief minister should leave everything and start empowering media. I would like to write an email to CM concerning your voice for media empowerment.
The way you are abusing a MLA from Bihar I am surprised. That’s where the media man should take a control of their power and behave with maturity. Such immature writing has surprised me for a media person from Bihar who appears on national news channel.

MUKHIYA said...

Ravish

You can find How bluntly MEDIA came against the BHUMIHARs in early 2006 ! How Journalist like KARAN THAPAR spent maximum time to BHUMIHARs only on CNN-IBN .

http://in.news.yahoo.com/060528/211/64ly3.html

is this face of MEDIA ??

Manoj said...

5 साल में एक बार वोट देकर (शायद वो भी नही )आप क्या समझते हैं कि आपके लोकतंत्र के प्रति सारी जिम्मेदारी ख़त्म हो गयी? एक अकेला नीतिश क्या क्या करेंगे? हम और आप जो घर बार छोड़ कर दूसरी दुनिया में भागे फिर रहे हैं उसकी तुलना में वो व्यक्ति जो वंहा रहकर उसे सुधारने कि कोशिश कर रहा है, आपकी नजर में सड़कछाप है। १५-20 साल कि बर्बादी के बाद २ साल में आप चाहते हैं कि वंहा कोई अपराध ना हो। कल ही तमिलनाडू में अदालत में एक जज को बुरी तरह से पीटा गया, क्या लोकतंत्र के पहरेदारों को ये दिखाई नही देता? आप यदि कल "Bihar" में हुई घटना कि तुलना "Tamilnaadu" से करते तो बेहतर नही होता, बजाये इसके आपने फिर से अपने चिर प्रतिद्वंदी गुजरात के CM को बिना किसी बजह के घसीट मारा। धन्य है आपकी एकतरफा पत्रकारिता!
जिस तरह से नीतिश सरकार ने बिना देर किये तुरत ही अनंत सिंह को जेल भेजवाया, वह प्रशंसा के बजाये इस तरह के "comments " और title का हकदार है, ये आपके जैसे महान और "निर्पेक्क्ष "पत्रकार ही कर सकता है...
शत शत नमन है आपको !!!! ....

Manoj

arindam said...

what happened was deplorable, pathetic, a shame on our democracy. it is utterly condemnable and i do condemn it unequivocally. But the sudden attack on a caste was uncalled for. criminals have no caste. the powerful media is responsible in a way too. time and again we have seen news being covered from the perspective of the political masters. everyone knows political patrons are neccessary to run a channell but a line should be drawn somewhere. if criminals are the neccesity of politicians then such incidents would keep on happening. both parties in the fracas are well connected and an understanding would be thrashed out sooner or later. but one thinks Bihar deserves far better, far better than what Lalu had given it, far better than what 'sushashak' Nitish Kumar have given it. one doesnt wants the once cradle of civilisation to become a place where civilisation ends (as Naipaul once said). and equating development with roads and water supplies would be understatement of the century. as for violation of human dignity it happens everywhere, everyday, do speak up for them once in a while it will give voice to the speechless millions

Sagar Chand Nahar said...

राजीव और मनोज जी की टिप्पणी पर खास गौर किया जाये।

ravish said...

नाहर जी

आपने कहा है कि राजीव और मनोज की बातों पर गौर किया जाए। कई लोगों को लगता है सड़कछाप शब्द ठीक नहीं है। उसे बदल सकता हूं। मुझे कोई दिक्कत नहीं। इसका इस्तमाल खास संदर्भ में किया है।
बहुत आसानी से लोग लिखने वाले की भूमिका पर सवाल खड़े कर देते हैं। पूछते हैं कि आपने क्या किया। सही सवाल भी है। हमारी कोशिश है कि लोग चर्चा करें। जो बातें मानसिकता के किसी कोने में दब गईं हैं उन पर खुल कर चर्चा हो। एक बदलाव इससे भी आता है। मैं नौकरी छोड़ कर आंदोलन नहीं करने जा रहा। न किसी से उम्मीद करता हूं। इसका मतलब यह नहीं कि मेरी कोई भूमिका नहीं हो सकती। अगर हम सब एक दूसरे की बातों को लिख पढ़ कर बहस कर, जनमत बना कर नई सोच बनाते रहें तो वो भी एक भूमिका है।
मैं जानता हूं कि दूसरे राज्यों की क्या हकीकत है। दूसरे राज्यों का उदाहरण देकर अनंत सिंह प्रकरण को कमजोर नहीं किया जा सकता। बिहार की बात बिहार के संदर्भ में ही हो।
मैंने किसी जाति विशेष का नाम नहीं लिया है। पाठकों की प्रतिक्रिया में भूमिहार जाति का इस्तमाल देख दुख हुआ। अनंत सिंह जैसे नेता किसी जाति विशेष के शत प्रतिशत लोगों के समर्थन से नहीं नेता बनते। मगर यह भी सच है कि इसे सहारा जाति विशेष का ही मिलता है। चाहे राजन हों या सूरजभान या शहाबुद्दीन। इसलिए यह पाठ मत पढ़ाईये कि जाति विशेष के सारे लोग इसे नेता नहीं मानते। मैं जानता हूं कि इसे नेता नहीं मानते। मगर क्या यह नेता गांधीवादी आदर्शों पर जीतता है। या जाति का भी सहारा मिलता है या नहीं।

मैंने बिहार को बदनाम नहीं किया है। बिहार बदल रहा है। लेकिन उसे कई मामलों में बदलने की ज़रूरत है। ये तो वही बात हुई कि लड़का इंजीनियर हो गया मां बाप का नाम कर दिया। लेकिन शादी किया दहेज लेकर। क्या करेंगे आप। लड़के की तारीफ करेंगे या दहेज लेने के लिए निंदा।

मेरी दलील दो बातों पर हैं। बुनियादी ढांचा बदले जो कि बदलता हुआ लगता है। मगर साथ साथ मानसिक बनावट भी बदले। इन्हीं बातों को उठाने में हमारी भूमिका है। मैं भी पूछ सकता हूं। आप मेरे लेख पर इतने उतावले क्यों हो रहे हैं। आपने क्या किया है बिहार के

avinash said...

मुखिया जी, ये शायद आप ग़लत कह रहे हैं कि अनंत सिंह के मुद्दे पर अपनी रिपोर्टिंग में कहीं भी एक जाति विशेष को निशाना बनाया। दरअसल अनंत सिंह जैसे को जिस तरह जातीय समुदायों की शह मिलती रही है, उस सामाजिक मानसिकता को ज़रूर निशाना बनाया गया है। ये जैसे बिहार और पूर्वांचल की नियति बन गया है। तमाम गुंडई के बावजूद अनंत सिंह और अमरमणि त्रिपाठी को वोट देने वाले लोग क्‍यों हैं- और क्‍या हमारे आपके बिहार जाकर वोट देने से हालात बदल जाएंगे? आज के बिहार बंद में पहली बार हुआ कि आम लोगों ने सड़कों पर व्‍यापक पैमाने पर उतर कर राजनीतिक गुंडागर्दी के खिलाफ़ अपनी सहमति जतायी। इससे पहले उन्‍हें लगता था कि गुंडई को झेलना जैसे उनकी नियति है- और पत्रकार भी सत्ता-शासन का एक हिस्‍सा है। ऐसा सोचना लाज़‍िमी था, क्‍योंकि इन्‍हीं गुंडों को पत्रकार अपने केबिन में बिठा कर चाय पिलाते रहे हैं, या फिर गुंडों की केबिन में जाकर चाय पीते रहे हैं। लेकिन आज के बाद बिहार के पत्रकारों को थोड़ी दिक्‍कत होगी गुंडों के साथ अपनी सोहबत बनाने में। इसलिए अनंत मुद्दे को गरमाने दीजिए मुखिया जी, आप अपनी संकीर्ण जातीय चेतना को थोड़ी देर के लिए विराम दीजिए - उससे हमारा आपका भला ही होगा।

Sarvesh said...

What I infer from your last comment Mr. Ravish, you mean to say that you will include caste and blame caste for all these happenings. I would like to request all my media brotherens, please refrain maliging caste for any such things.
Please guys you are educated one's and come out with such caste based writings and adding each happenings with caste.

MUKHIYA said...

Ravish Jee ,

You works with NDTV and my reactions was NDTV blunt statement on BHUMIHAR CASTEs ! aur mai aapako KOI "PAATH" nahi padhaa raha hun !

I have few questions :-
1, If ANANT SINGH got caste support then why he lost by heavy margin in year 2000 election
2, Is it not true that using ANANT SINGH - whole MEDIA is indirectly targeting a specific CASTE - DIL par haath rakh ke puchhiye !

I tell u fact - People against LALU voted for ANANT SINGH and same people defeated ANANT eleder brother in year 2000 ,

AVINASH Jee

Its frustation to see channel like NDTV are openly started a CASTE WAR using ANANT SINGH as a weapon against whole CASTE !

RAVISH jee , I am not that MASTER ki mai SHABDON ka KHEL khelun ! You are free to malign anyone ! at the end of day - MEDIA is KING in this world !

MUKHIYA said...

AVINASH jee

I too know and remember when RJD goons attacked MANISH KUMAR ( NDTV Head ) in Patna , I was first person to react ! Similarly when India Today Sanjay Jha was attacked , I was first person from Non Media to react ! BUT at that time - No One used CASTE angle !

here , everyone knows - who are playing GAMES and WHY !

निशान्त said...

रवीश भाई,
आपसे सहमत भी हूँ कि बिहार की राजनीती में BSP (बिजली, सड़क और पानी) का मुद्दा.. सामाजिक राजनीतिक संस्कृति के मुद्दे से ज्यादा मज़बूत हो गया है... पर प्रश्न यह भी है क्यों हो गया है... समस्याएं हर जगह हैं और हर समय है... सड़क का क्या महत्व है ये शायद आप भी समझते और आपके पाठक भी... वरना आपके ब्लॉग का नाम... नई सड़क नही होता... सड़क विकास का partik है...
शायद, आपको दर्द इसलिए ज्यादा हुआ की आप बिहार से हैं और आप जैसे लोगों पर ये हमला हुआ है... असुरक्षित होना सब को बुरा लगता है... इसी दर्द में आपने मुख्यमत्री को सड़क छाप, बिहार के लड़के सिलिकन वैली में इंजीनियर के सपनों को एक साँस में गरिया दिया... पत्रकार तो बुद्धिजीवी होते हैं... और बुद्धिजीवी केवल समस्या नहीं गिनाते हैं उसका सॉल्यूशन भी दिखाते हैं. शायद आप कभी दिनों से बिहार नहीं गए हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बिहार से आपका सरोकार घर वालों और रिश्तेदारों से फ़ोन तक सिमटा है इस लिए... सॉल्यूशन की तरफ़ ध्यान भी नहीं जाता है.... बिहार में आग लगी है... कहा जा सकता है माना जा सकता पर... आप तो उसकी आंच से दूर है.... जल तो हमारा घर रहा है.... आप तो दिल्ली वाले हो चलें हैं...
सामाजिक राजनीतिक संस्कृति के मुद्दे पेट और रोजीरोटी की जरूरत से बड़े नही है... जब पेट भरने लगेगा ये सारे मुद्दे पर भी बिहार के सड़क छाप मुख्यमत्री और लोग गौर करने लगेंगे... वहाँ तक पहुँचने में वक्त लगेगा ... बिहार को भी थोड़ा वक्त दें...

Atul said...

media needs to mends itz ways (not Praksh jee) but NDTV and IBN types who are sold and in fact might
be friends with Anant Singh. Who knows if rival media might have sponsored the attack on Prakash jee. Serves them best.

Sound absurd
Then here is a business case. Rival media gives a message to people like Prakash that don't be honest and don't
try to be a good reporter. Come join us in the game of stereotyping bihar and make some money as well. Also we will tell you how
best to wine/dine with corrupt politicians. They also gain from lot of free marketable stories to broadcast since they have no talent
for positive stories. Also their sponsors/bosses from Churchianity/ISI/KGB/CPM etc will not let them do a positive story if they want to remain relevant

mukund said...

dear ravish and others ,

intresting discussion is goin on , 'caste' or 'no caste' caste is everywhere , u are fighting for a journalist because ur identity is journalism , is it castiesm or not ?

If you do not belive in castiesm - then where was you when a journalist plan to down all the efforts of prof Anand Kumar super - 30 , where was u when rabri declined to visit the houses of senari victims ,

see , world is not fair and everyone knows that electronic media from bihar works on castline , if it is not true then how karan thapar knows all details about bhumihar and was telecasted in nitish interview with him on may 2006,

see , do not try to target specific caste because this caste is known as jews of bihar and east up

anant is never ur target ! u are targeting

1 Lallan sinh because he only helped nitish to remove lalu

even in past u have wrote some deragotaroy remarks on bhumihars in ur posts !

pls ! maitain ur status ! u are a national figure !

Jitendra said...

सीएम जी अच्छा काम कर रहे हैं. उनको ऐसे बदनाम करना अच्छी बात नहीं है. एक अगर फेल्लो जाती के पत्रकार पर हुए हमले को इस तरह सीएम को अपमानित कर के नहीं करनी चाहिए. आप लोग समाज के आइना हैं. कृपया बिहार जाइये और कभी वहाँ के स्थिति को समझिए. बिहार बदल रहा है. जनता दल उनितेद और बी जे पी दोनों मिलकर बिहार में बहुत अच्छा काम कर रहा है. आप लोग ऐसा कोशिश मत कीजिए की नीतिश जी अगली बार सीएम ना बन सकें. उनके वोट बैंक को कमजोर मत कीजिए. सब लोग नीतिश जी से उम्मीद लगाये बैठे हैं. यही कारन है की सब लोग सलाह देते हैं की किसको पार्टी प्रेसिडेंट बनाइये, किसको डीजीपी बनाइये, किसको विधायक बनाइये, किसको मंत्री बनाइये. किस पर स्पीद्य ट्रायल कीजिए. ये साब हम लोग अपने दृष्टिकोण से देखते हैं और इसीलिए सलाह देते हैं. कुछ उन्हें भी सोचने दीजिये और करने दीजिये. प्रकाश जी को मेरा अफ्शोश बतैयेगा और बोलियेगा बिहार की जनता ओनके साथ है. आनंद मोहन के साथ मिलकर वो भी मोर्चा खोल सकते हैं.

mukund said...

Read this comment
======================
I think you are right in saying that Bihar Band is not
justified because one media person was beaten up...
There are several thousand people being beaten up here
and there.. Does it mean that we should all stop
working and keep whole country BAND... These
politicians call themselves as a saviour of society
and nation and they call band for every small reason
to get political mileage... Do they think about the
several crores of rupees of losses due to these
Bandhs??

I have been watching news channels right from my
childhood.... There used to be specific time in a day
when we all used to sit in front of TV to see
national and international news.... In recent few
years, there has been a significant degradation in
quality of many TV news channels.... Few years back I
have seen some newspapers coming with a bang in the
market by trying to gain some cheap popularity but
eventually vanishing in air... Same is going to
happen with electronic media also... There are some TV
channels who are constantly busy with black magics,
tona-totka, kala jadu, cricketers, movie stars....
These channels try to misguide billions of people of
this country by showing anti science stuffs and trying
to convince people about black magic and similar kind
of stuff... I think they should be brought to court
for misguiding people of this nation and their license
should be seized.... I really get amazed to see their
falling standards and I wonder how they prioritize
their telecasts i.e what is to show and what not to
show and the duration of telecast.... A truck burnt
in Ghaziabad and a small fighting between people and
police is shown for not less than 12 hours in a
day... Movie stars like salman khan and sanjay dutt
are a hot cake for many media people... Who the hell
is interested to know that whether sanjay or salman
ate in jail or not, who came to meet them in
jail, why XYZ did not come to meet and when he/she
will come to meet,when will they get bail with lots of
iffs and buts etc. etc.. I feel pity for the media and
their thinking that people of this country are still
in 17th or 18th century and will give importance to
these kind of cheap stuffs??...There are thousands of
things to show on TV which can be mutually beneficial
to the people of this country and media as well....
You all can remember some time back, ISRO Launched one
satellite based on cryogenic technology and I was
looking to see the Live telecast of this launch's
success/failure...To my surprise all channels were
busy with Salman Khan and Sanjay Dutt( I guess these
two stars will decide the fate and future of this
nation and nation will grow because of these two
stars...So keep showing news whole day related to
these two moview stars) but I was lucky to get one
national channel which was telecasting it Live from
ISRO, Sriharikota.... This clearly shows the thinking
and standard of media of this country....

Then I go back to the basics that why these channels
show these kind of stuff whole day??? I got answer
from many people saying that what kind of people
are existing in media and what is their competence,
qualifications and expertise??... Is quality people of
society choosing media as a profession(mostly top
class people are preferring Engineering, Medical,
Management, Civil Services etc. and similar
kind of professions)??? Till the media segment of
industry gets real quality people, the scene, quality
and standard of media in our country is not going to
improve.... They say what kind of standard you can
expect from sub standard people(headless
chicken in the voice of Ronen Sen-US ambassador )??
Isn't it truth that best minds of this country are not
choosing media and politics as a profession(A hard
bitter truth)-- They say A bunch of sub standard
people will show quality stuffs and will guide people
of this country?? A big no.... Second reason which is
heard is that they are under pressure to keep showing
sensational news for better TRPs.... Here again they
believe that only bad and dirty news are sensational
news and nothing good is happening in this country and
good news can not be sensational....

But is it alarming situation?? No, there are still few
quality people existing in media sector and they are
constantly improving their standards and these are
the people who are hope in media sector... Similar
thing exists in print media...Many newspapers came and
vanished like ashes but Times of India, Statesman etc.

are still existing and I have seen no decline in their
standard..... Then a question arises as to why I am
purchasing news papers everyday even though I have
access to so many news channels?? The simple reason is
that I rely more on these newspapers for information
and news rather than on electronic media...
If I spend one hour a day with these news papers, I
get lot of valuable informations(reliable and pukka
information) and news in just one hour compared
to TV channel's news and Information ...

Regards,
Anil Kumar
Gurgaon

Rajesh Roshan said...

सार्थक और सकारात्मक बहस. देखिये मीडिया क्या करती है, नेता क्या करते हैं....इन सब का जवाब परोक्ष और अपरोक्ष रूप से हम और आप जनता देते हैं और दे सकते हैं. किसी ने कहा Media is King नही I dont belive in this. What i belive is in this Democracy Voter is Emperor. बड़ी सीधी से सी बात है अगर कोई चीज आपको अच्छी नही लगती है टू या आप मौन रहे या फ़िर विरोध करे, तर्क के साथ. बिहार बदल रहा है और बदलेगा लेकिन जो ख़राब है कम से कम उसे तो मैं ख़राब कह ही सकता ह. आप को लगता है की मैं ग़लत कह रहा ह तो आप मेरा विरोध कीजिये.

अनंत सिंह की जो छवि है वो केवल विरोध करने वाला नही है. वो सजा का हक़दार है. लेकिन अच्छा बोलने वाले मुख्यमंत्री नीतिश जी कहते हैं क़ानून अपना काम करेगा. बिहार के डीजीपी भी अनंत सिंह को विधायक जी कह कर बुलाते हैं. ये "जी" का मतलब क्या होता है? डर या सम्मान...

बिहार बदनाम तो है ही इसे बदनाम भी किया जा रहा है लेकिन क्या हम सच में बदनाम नही है..? बानगी देखनी हो तो आज भी इंटरनेट के सभी कहत रूम में जाकर देखे और अंत में पटना के रूम पर जाकर देखे फर्क पता चल जाएगा. हम बिहारियों को अपनी मानसिकता बदलनी पड़ेगी, आप इसे माने या न माने लेकिन ये बात सच है

Atul said...

Ravish jee aapne yeh sawal puccha hai kuch logon se ki "wo" kya kar rahe hain .. btw better nahin hoga ki aap khud kya contribute karna chahte hai .. mana ki aap ko bhi naukri karna hai, free ka daru peena hai, bada aadmi banana hai ..Lalu se beeke hua Royal Lantern (raj deep sar de sai) se competition hai .. bike hue Pranay Roy se competition hai ..

journalist bhi achcha kaam kar sakte hain .. agar aap mujhse sawal karenge to main jawab doonga ki main kya karta hoon aur is group mein blog likhne wale bahut lob bhi achchai company mein kaafi senior positions mein hain, 12-16 ghante kam karte hain, pariwar ka bhi khayal rakhte hain, samaj ke liye bhi karte hai, bihar bhi, apne college ke liye bhi aur apne desh ke liye .. jyada details ki thoda google kijiye .. bihar aur is blog pe comment karne walon jke blogs padhiye

Ashish said...

Ravish jee,

Kam se Kam aapse to aisee umeed nahi thee ek sahayogi par hamala ho jaane ke aapne baad poore Bihar pradesh ko gaali dee hai.. mujhe aise prateet bhi ho raha hai kee aap apane mitti ko gaali de rahe hain.. ap ye bhi kahate hain hain kee aap bahut dino se bihar nahi gaye hain.. aur upar se aap doosare logon se ye pooch bhi rahe hain kee aapane bihar ke liye kya kiya hain.. Atul bhai theek keh rahe hain.. kabhi google kijiye aur dekhiy hum jaise chote naukri pesha log bihar ke liye kya kar rahe hain.. bhale hi wo mahatvapurna naa ho.. lekin koshish kar rahe hain.. bahut jaddojahad ke baad Bihar mein satta parivartan hua hai.. aur wahan ke logon ko khuli hawa mein saans lene kaa mauka mila hai..
Aap Ramnath Goenka award se sammanit patrkaar hain.. aur aapki pichali bahut saari reports main dekh chuka hun.. jis ke khaatir aapka samman bhi karta hun.. lekin aapke BLOG kaa ye post dekh kar man bada vayathit hua kee. aapke colleague Prakash jee ke saath jo bhi hua wo poori tarah ninadniya hai.. lekin jis tarah se aap iss ghatana kee pratikriya apane BLOG mein de rahe hain.. wo bhi sarahniya nahi hai..
Grow up Ravish Kumar.. You belong to fourth estate..one of the pillars of democracy.. Hope you learn your lessons.. and will refrain from making such remarks in future.
God Bless you.

Kiran Kumar said...

रवीश जी
एक सर फीरे वीधायक के कारन मुख्यमंत्री की इतनी खीचाई ठीक नही है. आज की तारीक में bihar के लीए नीतीश जी से अच्छा कोई विकल्प नही है. राजनीती में काफी समझौता करना पड़ता है. नीतीश जी कम से कम समझौता करके bihar को लाईँन पे लाने की कोशिश कर रहे है. कुछ लिखने के पहले उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार तो करना था. आज bihar में कुछ अलग हो रहा है, उन्हें आप जैसे लोगो का सहयोग चाहीये.

Manoj said...

रवीश जी,
आपके ब्लोग पर इतनी सारी प्रतिक्रिया हुई या होती है उसका एक सीधा सादा निष्कर्ष ये भी है कि लोगों को आपसे कुछ बेहतर लिखने कि उम्मीद होती है.... यदि आप गौर करें तो पायेंगे कि इनमे से अधिकांश लोग पुर्वी UP या बिहार के लोग हैं.... इन तमाम लोगों को आप अपने लगते हैं.... पर शायद हम गलत हैं.... आप पहले एक पत्रकार हैं जो एक कंपनी में काम करते हैं, बाद में कुछ और ..... आपके ब्लोग पर लिखा ये वाक्य कि आपके ब्लोग को आपके पेशे से अलग कर के देखा जाये, इसे हमने से कुछ लोगों ने सच समझ लिया......
इस बार या तो आप अपनी बात ठीक से कह नही पाए, या हम समझ नही पाए..... यदि बिहार में सामाजिक राजनीतिक क्रांति कि जरूरत है तो क्या इसके लिए road, बिजली और पानी कि समस्या को सुलझाने का प्रयास बंद कर देना चाहिए? आपकी इस बात से कि प्रकाश जी पर हुए हमले की निंदा होनी चाहिए, किसी को कोई आपति नही है। पर इसके लिए नीतिश या बिहार को दोष देना, सरासर गलत है । नीतिश कुमार की निंदा तब करनी चाहिए थी जब वह इस मुद्दे पर अनंत सिंह का साथ देते, पर ऐसा नही हुआ। जब आपका बच्चा चलना शुरू करता है तो आप उसे यह कह कर फ़ेंक नही देते कि वह बोलता नही है। चीजें एक रात में नही बदलती। जिन राजनीतिक और सामाजिक समसय्यों से बिहार जूझ रहा है उससे पूरी दुनिया गुजर रही है, पर बिहार के साथ समस्या ये है कि वह इन समस्याओं के साथ साथ आर्थिक रुप से भी पीछे है। नीतिश कुमार का ज्यादा ध्यान इसे दूर करने कि तरफ है, जो कि Sufficient भले ही न हो पर necessary जरूर है।
जिस तरह से एक पत्रकार पर हुए हमले को पूरे मीडिया पर हमला माना जाता है, उसी तरह एक व्यक्ति की जीत कई बार पूरी जाति की जीत मान ली जाती है। क्या आप बता सकते हैं, की दोनों की समझ में क्या अंतर है?
आपका धन्यवाद कि आपने अपने ब्लोग पर कि गयी प्रतिक्रियाओं का जबाब देने कि जेहमत उठाई....

Manoj

Jitendra said...

बिहार गौतम बुध और भगवन महावीर का जगह है. अनंत सिंह को एक मौका दिया जाना चाहिए. जब लालूजी आये थे शुरू में तब लोग ललुआ कह कर बुलाता था. इंडिया टुडे में उनका फोटो देखे थे २० नाल बंदूक के साथ. आज वो और उनकी पत्नी हमारे बिहार के सबसे लम्बे समय तक राज करने वाले सीएम हैं. वो रेलवे के सबसे सफल मंत्री हैं. इसलिए रवीश जी गुस्सा ठुक दीजिये. सीएम तो यही कह सकते ना की कानून अपना काम करेगा और हम उसमे हस्तक्षेप नहीं करेंगे. आब वो अनंत सिंह को बीच चौराहे पर जूता निकल कर मार तो नहीं सकते ना.

anand said...

Ravish Bhai
mai is baat se bilkul sahmat nahi hu
kyoki waha pe khali road hi nahi ban raha hai
aap ja ke dekhe approx 30,000 naye school banaye jaa chuke hai, 2'50'000 naye teacher appoint kiye ja chuke hai,
goverment hospital me sari facelites mil rahi hai ( Medicine,lab test,ambulance,all facilites)
aur pure bihar me aap ko khali anant singh hi dikhte hai, aap aur logo ko dekhiye.
mai chapra se belong karta hu delhi me rahta hu, last time mai june me chapra gaya tha pehle waha ka market 7 baje tak khula rahta tha lekin ab 12 baje tak khula rahta hai kya ye change nahi hai
jaisa ki aapne kaha ki aap nitish ji ke aane ke baad Bihar nahi gaye
Ravish bhai aap ek bar Bihar jaye aur dekhe waha pe kya kya change ho gaya hai

Anand Shekhar

ravish kumar said...

तमाम दोस्तों,

लगता है आप सब अपने पूर्वाग्रह के कारण लेख को जल्दी में पढ़ कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हर बिंदु का जवाब देना मुश्किल है और हर बिंदु पर खरा उतरना और भी मुश्किल।

मैंने बिहार को बदनाम नहीं किया है। न ही कोई बदनाम करता है। मैंने सतर्क किया है कि आईआईटी या आईटी में बिहार के लड़कों की शानदार कमायाबी के बाद भी कई चीज़ें हैं जिन्हें बदलनी होगी।

पंद्रह साल तक लालू राज की खूब आलोचना हुई। आपलोगों की राय में तो ये आलोचनाएं नहीं होनी चाहिए थीं क्योंकि इससे बिहार बदनाम होता। उसी आलोचना का फायदा है कि लोग लालू मोह से निकल कर नया जनमत बनाने के लिए तैयार हुए। उसी आलोचना का नतीजा है कि शहाबुद्दीन जैसे बाहुबली अब हीरो नहीं रहे। तो आप आलोचना बदनाम करने के लिए नहीं बल्कि उसे ठीक करने के लिए करते हैं।

सिर्फ अनंत सिंह को जाति विशेष से नहीं जोड़ा गया है। कई लोगों को जोड़ा गया है। यह बात क्लियर कर लीजिए।

हर बात में जात आ जाता है। मैंने पहले भी इसी ब्लाग पर कहीं लिखा है कि मेरा एक सपना है कि इस जाति और इस पर बनी पहचान का नाश हो जाए। मैं जात पात में यकीन नहीं रखता।

रही बात भूमिका निभाने की तो वो पहले लिख चुका हूं।

यह लेख सिर्फ इसलिए नहीं लिखा गया है कि पत्रकार पर हमला हुआ है। अगर हम चर्चा भी न करते तो आप कह सकते थे, बल्कि कहते ही कि आपके ही साथियों पर हमला हुआ आप चुप रहे। लोकतंत्र में सबको अपने समय के हिसाब से प्रदर्शन करने का हक है।

पत्रकार पर हमले के संदर्भ में लेख यह याद दिलाने के लिए लिखा गया कि कहीं पुराने अवशेष बचे तो नहीं हैं। अगर हैं तो क्यों हैं।

नीतीश कुमार अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। सवाल यह नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि ऐसी स्थितियां और लोग कैसे बचे हुए हैं।

जो मूल बात थी वो ये कि आप विकास विकास कर रहे हैं तो यह समझ लें कि विकास का शून्य में और सड़क से पैदा नहीं होता है। मोदी भी कहते हैं कि गुजरात में विकास कर दिया। अच्छी सड़के हैं बिजली है। ऐसा होगा भी। मगर सवाल यह है कि जिन लोगों को मारा गया उनके साथ इंसाफ नहीं हुआ। क्या आप विकास को इंसाफ या अन्य सवाल से अलग कर सकते हैं? तब तो कोई सीएम लोगों को मरवा दें और कहें कि मेरा गुनाह माफ है क्योंकि मैंने अपने राज्य में लाख नौकरी पैदा की है । पेरिस सी सड़के बनवाई हैं। तब आप विकास की इस अवधारणा को मान लेंगे।

इस लेख की प्रतिक्रिया में जाति का ज़िक्र देख कर लगता है कि कहीं लोगों की जातिगत अहं को ठेस तो नहीं लग गई है।
शुक्रिया

Atul said...

ूर्वाग्रह के कारण लेख को जल्दी में पढ़ कर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हर बिंदु का जवाब देना मुश्किल है और हर बिंदु पर खरा उतरना और भी मुश्किल।

agar itna mushkil hai aapka kaam to naurki chor ke himalaya chale jaaiye aur tapasya kijiye .. yehan pe subka samya kyon vyarth kar rahe hain aap.. kisi ke comment se pata chala ki aapko koi award bhi mil chuka hai .. ab kaun sa award lena chahte hain aap .. aapka competition Arundhati Roy jaiso se hai jo ki "biki" hui hai bharat ke dushmano ke saath .. aur Raj Deep Sar De Sai ( Royan Lantern) ke saath jo aaphi ke tarah Lalu ke ghee se apni lalten jalate hain

MUKHIYA JEE said...

"BIHARI" bhi ek Jate hai - MANGAL grah par aapaki JATI - EARTH wale ki hai ! USA me aapaki JAATI - ASIAN ki hai - Among ASIAN - aapaki JAATI - INDIAN ki hai aur among INDIAN - aapaki JAATI - BIHARI ki hai ! AMong BIHARI - aap ya to PATRAKAAR hain , ya NDTV waale PATRAKAAR hain ya RAJPUT , BRAHMIN , KAYASTHA ya BHUMIHAR hain !

Har AADAMI ek hi din me ALAG ALAG JAATI me jeetaa hai - aap GHAR me apane Bachchon ke liye - PAPA hai - Dr Roy ke saath kaam karane waale nahi ! Apane GAON me aap RAVISH hain - jo BARASON pahale GAON se chalaa aayaa !

any way -
aap DIL par haath rakh kar PUCHHIYE ki - Kya , SABHI Patrakaar aap ki tarah hi sochate hain ? Kya , PATNA me baithe PATRAKAAR - JAAT-PAAT nahi karate ? AGAR aapaka DIL kahataa hai ki - Nahi , aapake NDTV / STAR / AAJ TAK wale sabhi Patrakaar GALAT nahi hain ! fir , aapake DIL ki baat ko swikaar karate huye - Mai , kshamaa prarthee hun YA fir aap PATRAKAAR bhi DHUDH ke dule nahi hain !

Ranjan R Sinh ,
NOIDA

TV said...

Ab jab yah baat samne aa gayi hai ki mrit ladki Reshma nahi thi jiske murder ke naam par Anant Singh ko kosa jaa raha tha aur uska naam kaajal tha, patrakaar bhaiyon ki kya rai hai?

Rajniti ke daw pench gande hain. Agar patrakaar isko samajh kar kaam karen aur sachai samne laane ki koshish karen, ye achcha hoga.

Ye baat bhi saaf kar diya jaye ki mein journalist ki pitai ke saft khilaf hoon. Par is incident ko le kar pure bihar ko kosna aur usko "badland" bana dena jaisa ki Pioneer wale Amarnath Tewary kar rahe hain, aur bhi bura hai.

Bihar bhi ek bharat ka pradesh hai aur vahan bhi insaan hi baste hain, haad mans ke insaan jinki vaisi hi choti choti aashayen aur akashayen hain jaisi dusron ki hai. aur nitish kumar bhi insaan hain, koi superhuman nahi hain ki ek din mein jadui chati se sab kuch badal denge

Atul said...

TVS. Apne patrakara bhaion se koi jyada appechcha mat rakhiye.

Kyonki apni galtiyon ki maafi mangna inhe nahin aata. Chahe wo Raj Deep Sar De Sai (Royal Lantern) hon ya Karan Thapar ya Pranay Roy ya Jennifer Arul. Inhein te kewal aag lagane mein maja aata hai aur use se apnna pocket garam karne mein.

Nitish Kumar ko to kaam bhi karna hai, badh bhi jhelna hai, apne hi bihari netaon ko sambhalna hai, vikrit aur vibhats media ki baato pe to unhe dhyaaan dena hi nahin chaahiye ..

Pramod Singh said...

सही है, गुरु.. एकदम्‍मे सही..

ऋतेश पाठक said...

बात जाति कि चली तो मैं भी कुछ कह देना चाहता हूं..
यह कि चर्चा के बहाने जिस नितीश जी को घेरा गया है उन्होंने ही पंचायत चुनावों के दौरान ब्राह्मण बहुल बस्तियों को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित करवा दिया.........

kanhaiya Lal Pandey said...

hamen apni kartabya nahin bhulni chahiye. dusaron pe kichar uchhalane se kuchh nahi badalega. balki hamen aagey aakar badalna hoga.

kanhaiya Lal Pandey said...

hamen apni kartabya nahin bhulni chahiye. dusaron pe kichar uchhalane se kuchh nahi badalega. balki hamen aagey aakar badalna hoga.