संस्मरण

चंद्रशेखर एक महान नेता थे।

9 comments:

Pramod Singh said...

अमूर्तन की कैसी घनेरी बदलियां हैं.. ओह्.. इसे अब ध्रुपद में गाते रहें?..

अभय तिवारी said...

ये क्या ब्रेसॉनियन शिल्प ब्लॉग साहित्य में ले के आ रहे हैं आप.. ?

अनामदास said...

और आप एक महान ब्लॉगर

काकेश said...

ये कौन सा राग था/है.. आप महानतम हैं..

Parul Agrawal said...

Chaar maarmik shabd... kaash marne waala jeevit hota inka marm samajhne ke liye ...

avinash said...

अरे, मैं चंद्रशेखर जी के साथ इतने दिन रहा, ये तो पता ही नहीं चला। आपने बिल्‍कुल नया सत्‍य उद्घाटित किया है। आपको साधुवाद।

vikas said...

रवीश जी,
चंद्रशेखर के बारे में केवल पांच शब्द, उनके लिए शब्द नहीं मिल रहे थे या आप सचमुच उनके बारे में लिखना ही नहीं चाहते।

ravish said...

विकास जी
जितने के नेता थे उतना लिख दिया। जब महान ही लिखना है तो अगर मगर क्यों लगाएं। वीर संघवी साहब ने अपने कालम काउंटरप्वांइट में कुछ इस तरह से उदगार व्यक्त किये हैं। मैं चंद्रशेखर को महान नेता नहीं मानता। वैसे भी मैं कौन होता हूं मानने या नहीं मानने वाला। उनके देहांत के बाद लोगों के आंसू देखकर लगा कि वाकई महान होंगे। तभी लोग इतना अफसोस कर रहे हैं। कितना कर रहे हैं यह सवाल छोड़ देता हूं। इसलिए मैंने सिर्फ एक पंक्ति में उन्हें याद किया। याद करने वाले नेता तो थे ही। कई मायनों में। कई नेताओं से अच्छे भी। जैसा कि मैंने कहा कि अगर मगर लगाकर लिखना ठीक नहीं होता। या तो आप महान कहें या नहीं कहें। शायद इसीलिए मैंने शीर्षक में संस्मरण शब्द का इस्तमाल किया है। नीचे वीर संघवी ने जो लिखा है उसे छाप रहा


" All the good politicians had deserted him believing he was finished so he was left with the garbage, with people who had nowhere elso to go: shady swamis and subramaniam swamy, racketeers, dacoits and dalals" Veer Sanghvi On Chandra Shekhar, sunday 15 july.

Aarish said...

bahut achhe!! veer sanghvee ko shayad khae peene k baare mein hi likhna chahiye..main bhale hi khud nahi likhta par darshak aur paathak k naate ye kehne ka haq rakhta hun..aap kya kehte hain??