सेकुलर बनाम सांप्रदायिकता का ट्वेंटी ट्वेंटी

कांग्रेस ने चालाकी से भ्रष्टाचार के मुद्दे को धर्मनिरपेक्ष बनाम सांप्रदायिक में बदल दिया है। रामदेव को मिठाई खिलाने से लेकर पिटाई तक के सफर में कांग्रेस अपनी कमज़ोरी को मर्दाना ताकत की दवाओं से दूर कर देने के लिए बेबस नज़र आई। दिल्ली आने से पहले रामदेव ने कहा था कि मुझे आरएसएस का समर्थन प्राप्त है। कभी नहीं कहा कि मैं आरएसएस से दूर हूं। रामदेव सरकार के दबाव में कहने लगे कि यह मंच राजनीतिक नहीं है। राजनीतिक काम करने वाले संघ को सामाजिक बता कर कब एनजीओ में बदल दिया जाता है ये सब भगवा दल की मर्ज़ी पर निर्भर करता है। साधु सियासत में रंग लगाने आते और भांग घोल कर चले जाते हैं। मंदिर मुद्दे पर लुट-पिट जाने के बाद सत्ता संघर्ष में वापसी के लिए बेचैन सन्यासी दल रामदेव को सहारा बना रहे थे। शनिवार को रामलीला मैदान में मंच से धार्मिक बयान दिये जा रहे थे। भारत महान की भगवा व्याख्या होने लगी। हरिद्वार के भारत माता मंदिर ट्रस्ट के किसी भगवा प्रमुख ने कहा कि वे महाभारत के किस्से तो पढ़ते हैं मगर आज सचमुच के महाभारत में शामिल होने आए हैं। कहीं से इन सबके दिमाग में है कि प्राचीन भारत की जड़ों में सन्यासियों का पसीना है। उनके आशीर्वाद और प्रताप से प्राचीन भारत विश्वविजेता था और अगर ये मिलकर एक मंच पर आ जायें तो भारत फिर से विश्वविजेता हो जाएगा। विश्वविजेता वाली अवधारणा ही कुंठित मनों की बुनियाद पर टिकी है।


रामदेव अगर सिर्फ योग के दम पर सर्वमान्य नेता बनने चले थे तो उन्हें संघ परिवार को लेकर अपनी नीति साफ करनी चाहिए थी। मंच से एक दो मुसलमानों को बुलवा देने से कोई सेकुलर नहीं हो जाता। बोलने के लिए तो एक जैन साधु भी बोल गए। मनोज तिवारी भी गाना गा गए। लेकिन इन सबसे से पहले रामदेव आरएसएस के समर्थन का बयान दे चुके थे। पूरे पंडाल में किसी हिन्दू महासभा का पोस्टर लगा था। आर्य वीर दल का पोस्टर लगा था। केसरिया पगड़ी धारण किये हुए लोग एक धर्म एक रंग का माहौल बना रहे थे। इससे पहले भी भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और सुभाष चंद्र बोस के पोस्टर बैनर और नारों से सांप्रदायिक मन को राष्ट्रीय भावना वाला कवच पहनाने की कोशिशें होती रही हैं। यह सही है कि रामदेव ने कभी सांप्रदायिक बयान नहीं दिया। कम से कम मुझे अभी याद नहीं आ रहा है। मगर रामदेव ने स्टैंड क्यों नहीं लिया। वे अब क्यों कह रहे हैं कि उनका बीजेपी से कोई लेना देना नहीं। फिर वे क्यों कहते हैं कि उनका आरएसएस से लेना देना है।

रामलीला मैदान में जब मैं बोल रहा था कि मंच पर धार्मिक प्रतीकों, मुहावरों और प्रसंगों के ज़रिये भारत की व्याख्या की जा रही है। मैंने लाइव प्रसारण में कहना शुरू कर दिया कि भ्रष्टाचार से हर मंच से लड़ा जाना चाहिए लेकिन क्या हमने आमसहमति बना ली है कि हम इस लड़ाई के साथ-साथ भारत की धार्मिक व्याख्या भी करेंगे। अगर ऐसा है तो क्या धर्म के भीतर फैले भ्रष्टाचार से लड़ने की भी कोई पहल होगी? पास में खड़े एक सज्जन भड़क गए और कहने लगे कि धर्म को राष्ट्र से अलग नहीं किया जा सकता। ऐसी फालतू की दलीलें पहले भी सुन चुके हैं जब लोग राम मंदिर के नाम पर सत्ता सुख प्राप्त करने के लिए जुगाड़ कर रहे थे और जनता को गुमराह कर रहे थे। अगर यह दलील इतनी ही शाश्वत है तो फिर नितिन गडकरी क्यों कहते हैं कि राममंदिर बीजेपी का मुद्दा नहीं है। तो किसका था और किसका है। रथ लेकर किसके नेता निकले थे? इसीलिए धर्म से राष्ट्र की व्याख्या नहीं कर सकते। कब कौन किस पुराण की दलील देकर किधर से निकल ले पता नहीं चलता। प्रवेश करने और निकलने का मार्ग खुला रहता है। सरस्वती शिशु मंदिर और गुरुकुल की लड़कियों से हिन्दू राष्ट्र गान गवा कर किसी आंदोलन को आप गैर राजनीतिक नहीं बता सकते। पंडाल में मौजूद कई लोग जो संघ से जुड़े या समर्थन रखते हैं, दूसरे संगठन में काम करते हैं, दिल्ली आई भीड़ के ज़रिये किसी धर्म राष्ट्र का सपना तो देख ही रहे थे।

रही बात सरकार की तो वो अपने अहंकार में इतनी मदमस्त रही कि पहले दिन से लेकर आखिर दिन तक टेटिया ज़बान में बात करती रही। अण्णा हज़ारे के आंदोलन को फर्जी सीडी के ज़रिये ध्वस्त करने की कोशिश की गई। जब एक्सपोज़ हो गई तो लगी कमेटी से गंभीर बात करने। लेकिन इस बार सतर्क थी। रामदेव नहीं थे। सरकार ने रामदेव को फंसा लिया। चिट्ठी लिखवा ली। जिस तरह से चिट्ठी दिखाई जा रही थी उससे बाबा तो एक्सपोज हो ही रहे थे सरकार भी हो रही थी। रामदेव को अपनी ताकत दिखाने के बजाए अण्णा हज़ारे के साथ चलना चाहिए था। संघ और हिन्दू महासभा के लोगों को मंच पर बुलाकर मंच को राजनीतिक नहीं बनाना चाहिए था। बीजेपी भी गैर ज़िम्मेदाराना बर्ताव कर रही थी. अपने प्रोग्राम में जब मैंने राजीव प्रताप रूडी से पूछा कि क्या आप रामदेव के सभी मांगों का समर्थन देते हैं तो सीधा जवाब नहीं दिया। मैंने पूछा कि क्या पांच सौ के नोट खत्म करने और हिन्दी मीडियम शुरू करने की मांग पार्टी की है तो जवाब नहीं दिया। कहा कि पहले भ्रष्टाचार पर तय हो जाए उसके बाद देखेंगे।अब बीजेपी सत्याग्रह कर रही है कि रामदेव पर अत्याचार क्यों हुआ? फिर से जलियांवालां बाग और आपातकाल की यादें आने लगीं। किसी भी सूरत में इसकी तुलना जलियांवालां बाग से नहीं की जा सकती। इसके बावजूद कि कांग्रेस ने लाठी चलवा कर बड़ी ग़लती की है। इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी। वो सिर्फ अपनी सत्ता के अहंकार का प्रदर्शन करना चाह रही थी। पांच हज़ार पुलिस लेकर कूदने की कोई ज़रूरत नहीं थी। तब फिर राहुल गांधी कहां जाकर आंदोलन करेंगे और भट्टा परसौल की तरह मायावती की आलोचना करेंगे कि गांव के लोगों को पुलिस ने पीटा।

रामदेव का अपना मार्केट है। वे मार्केट में खेलने वाले सन्यासी रहे हैं। कई लोग मंच पर ही ग्यारह और बारह लाख का चंदा देने लगे। रांची के राम अग्रवाल ने तो ग्यारह लाख का चेक थमा दिया। दिल्ली के अशोक विहार की सभा में पचास लाख रुपये जमा होने की ख़बर थी। संसाधनों की कोई कमी नहीं रामदेव के पास। भ्रष्टाचार से लड़ने की नीयत पर भी सवाल नहीं खड़े किये जा सकते। मगर समर्थन,साधन और तरीके को लेकर बहस तो हो सकती है। शायद इसी वजह से रामदेव का आंदोलन सर्वमान्य सर्वधर्म नहीं बन सका। रामदेव के सलाहकार ग़लत थे। अब वे अपनी लड़ाई छोड़ आरएसएस और बीजेपी पर सफाई देते फिरेंगे। उन्हें तय करना होगा कि भारत को वैकल्पिक रूप से समृद्ध और खुशहाल करने का रास्ता बचे-खुचे हिन्दू संगठनों से ही जाएगा या कोई दूसरा तरीका भी है। कई बार लगता है कि वे रामलीला मैदान के पंडाल के मोह में फंस गए। जब डील हो ही गई थी तो वापस चले जाना चाहिए था। किसी व्यापारी का ही तो पैसा लगा था,उसे पुण्य तो तभी मिल गया था जब उसने बैंक से पैसे निकाल कर बाबा को दे दिये थे। उसके दुख की क्या चिन्ता।

ज़ाहिर है रामदेव और सरकार दोनों एक दूसरे से खेल रहे थे। लड़ नहीं रहे थे। इस खेल-खेल में कुछ भयंकर किस्म की ग़लतियां हो गईं। यह सरकार अब पब्लिक पर ही ताकत दिखाएगी। लाखों करोड़ों लूट कर चले गए लोगों में से दो चार को जेल भेज कर सत्याग्रही बन रही है। सवाल दो बड़े हैं। क्या किसी सही मुद्दे से लड़ने के लिए सांप्रदायिक शक्तियों का सहारा लिया सकता है और दूसरा क्या सेकुलर बने रहने के लिए किसी सरकार को अहंकारी और घोटालेबाज़ बने रहने दिया जा सकता है? बहरहाल फिर से सेकुलर बनाम सांप्रदायिकता का ट्वेंटी ट्वेंटी शुरू हो गया है।

नोट- वैसे सलवार कमीज़ और दुपट्टे में रामदेव सुसंस्कृत,सुशील,सौम्य और घरेलु लग रहे हैं। यह तस्वीर दुर्लभ है। प्राण देने वाले बाबा ने प्राण बचाने के लिए स्त्री धर्म का जो सम्मान किया है उसका मैं कायल हो गया हूं। हज़ारों की भीड़ ने बाबा को बचाने की कोशिश नहीं की, लड़कियों के छोटे से समूह ने यह जोखिम उठाया। उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

44 comments:

डॉ .अनुराग said...

रामदेव चतुर व्योपारी थे....थे से आशय उनकी राजनैतिक मह्त्व्कान्शायो से है..वे उन्हें ले डूबी . मौका था हीरो बनने का पर चूक गए ....ना भागते ..गिरफ्तार होते तो शायद तस्वीर बदली हुई होती .... पर पूरे पोलिटिकल ड्रामे में एक बात समझ नहीं आयी हो सकता है कुछ लोग उनके झंडे के कलर से सहमत न हो हो सकता हो उनकी आइडियो लोजी से इत्तेफाक न हो...पर ये कहना के भाई चूँकि आप कट्टर हिन्दू हो इसलिए आप भ्रष्टाचार पे बात नहीं कर सकते ..समझ नहीं आता ...ऐसा कौन सा डर है सरकार के भीतर के रात को एक बजे वो लोगो को खदेड़ती है उन लोगो को जो शांति पूर्वक आन्दोलन कर रहे है ..यानी चोरो के एक समूह ने पहले बात की भाई देखो मामला तय कर लो ..जब मामला तय न हुआ तो कह दिया देखो ये भी चोर है ....मान लिया रामदेव कोई संत नहीं है पर आप ? आपका क्या स्टेंड है ? ये कौन सा लोकतंत्र है जो आपकी बात न माने उसे खदेड़ दो ?
पूरे ड्रामे से दोनों एक्सपोज़ हुए है रामदेव भी सरकार भी .....
सच पूछिए इस देश में किसी को इस मुद्दे पर बहस नहीं करनी है .......नैतिकता किसी आन्दोलन किसी अनशन से नहीं आती उसे हमें आपको अपने भीतर लाना होगा अपने व्योव्हार में अपने आचरण में लाना होगा .

Arvind Mishra said...

मौजू मुद्दा अब बस केवल इतना रह गया है
बिना आगाह किये रात में भूखे सोये हुए आम आदमी पर क्यों ढाया गया कहर ?
कालेधन के विरोध में स्वर उठते ही उसका दमन क्यों ?
किसे बचाया जा रहा है ?
माननीय उच्च न्यायालय ने अब तो स्वतः संज्ञान ले लिया है ..
जलिम कार्यवाही का दंड भुगतना होगा अब ...

JC said...

रविश जी, आपने सारे पत्ते खोल के रख दिए, जो भी किसी भी इस खेल में भाग लेने वाले खिलाडी के हाथ में आप देख पाए हैं... किन्तु आज, कलियुग अथवा घोर कलियुग में, जब देवताओं और राक्षशों के मिलेजुले प्रयास से क्षीरसागर मंथन आरंभ करने के तुरंत पश्चात चहुँ ओर हलाहल व्याप्त हो गया था, जिसे केवल शिव ही अपने कंठ में ग्रहण करने की क्षमता रखते थे... यानि सांकेतिक भाषा में शिव को 'गंगाधर', 'चंद्रशेखर', और 'नीलकंठ' कह पृथ्वी को ही शिव दर्शाया चला आ रहा है... वर्तमान में भी पृथ्वी को 'ब्ल्यू प्लैनैट' कहा जाता है, और चन्द्रमा की (हिमालय पुत्री, पार्वती की) उत्पत्ति भी पृथ्वी से ही जानी गयी है,,,जबकि हिमालय भी पृथ्वी के कोख से ही उत्पन्न हुआ...

तथाकथित काल-चक्र के प्रभाव से कोई भी आम आदमी इतना ज्ञानी होना संभव ही नहीं है जो इन कठपुतलियों के पीछे शिव के अदृश्य हाथ को देख ले, और समझ भी ले कि भविष्य कि अँधेरी सुरंग में क्या छुपा है और उसके अंत में कब प्रकाश दिखाई पड़ेगा...

ज्ञानी कह गए दृष्टा भाव से रामलीला, कृष्ण लीला, शिव पुराण, विष्णु पुराण, आदि आदि का आनंद उठाइए क्यूंकि मानव केवल एक मिटटी का पुतला है... और यह भी कि 'सत्य कटु होता है' :)

जय धरती माता, जय हिंद!

पंकज सुबीर said...

एक अतुलनीय संतुलित रपट, बहुत दिनों बाद किसी जगह पर टिप्‍पणी नहीं करने की अपनी क़सम को आपकी इस रपट ने तुड़वा दिया । बहुत बारीकी से विश्‍लेषण किया है आपने, इसे कहते हैं राग द्वेष से रहित लेखन, हर किसी को कटघरे में आना ही होगा। जब से बाबा रामदेव 30 जून को मेरे शहर सीहोर में आकर जिले के भ्रष्‍टतम ठेकेदार के घर रात्रि विश्राम करके गये थे तब से ही मैं उद्वेलित था, आपकी रपट ने मन को ठंडक पहुंचा दी । लगा कि कहीं न कहीं कोई न कोई है जो सच को सच की ही तरह प्रस्‍तुत कर रहा है । '' किसी व्यापारी का ही तो पैसा लगा था,उसे पुण्य तो तभी मिल गया था जब उसने बैंक से पैसे निकाल कर बाबा को दे दिये थे।'' अंग्रेजी का उपयोग करना होगा कि ये extra ord. पंक्तियां हैं । ये पंक्तियां उस सोच का बताती हैं जो इस प्रकार के लेखों को लिखने के पहले गहरे मन में कहीं चलता रहता है । बधाई बहुत बधाई । एक निष्‍पक्ष आलेख के लिये

पंकज सुबीर said...

क्या किसी सही मुद्दे से लड़ने के लिए सांप्रदायिक शक्तियों का सहारा लिया सकता है और दूसरा क्या सेकुलर बने रहने के लिए किसी सरकार को अहंकारी और घोटालेबाज़ बने रहने दिया जा सकता है? एक चीज़ छूट गई थी उसे ही लिखने फिर आना पड़ा । बहुत सामयिक प्रश्‍न उठाये है । विशेष कर प्रहले प्रश्‍न का तो क्‍या कहूं आपने करोड़ों लोगों के सवालों को शब्‍द दे दिये हैं ।

ZEAL said...

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क्या बाबा का गुनाह सिर्फ इतना है की वे गेरुआ वस्त्र पहनते हैं ? अपने भारतीय संस्कृति के अनुसार आचरण करते हैं ?

क्या स्वामी-विवेकानंद एक योगी नहीं थे ? एक संत नहीं थे ? एक तपस्वी नहीं थे ?

क्या महात्मा गांधी , एक संत नहीं थे जिन्होंने देश के लिए लड़ाई लड़ी ?

क्या नेताजी बोस भी एक संत और एक योगी नहीं थे ?

नेता वही है जो शासन करना जानता है , जो देश-हित में तत्पर रहता है । और करोड़ों के दिलों पर राज करता है।

आप नेता किसे कहेंगे ? जो अरबों के घोटाले कर रहा है ? क्या राजा और कलमाड़ी को हक है ऐसे आन्दोलनों का ?

क्या आजकल के फर्जी संत जो प्रवचन करते हैं और underground अपनी ऐय्याशी की दूकान चलाते हैं । आप उनके समर्थक हैं ?

आखिर कुछ मुट्ठी भर लोगों को बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार के खिलाफ और काला धन वापस लाये जाने के खिलाफ आन्दोलन से इतनी परेशानी क्यूँ है ?

- क्या ये लोग भ्रष्टाचार चाहते हैं ?
-क्या ये देशद्रोही हैं ?
-क्या है काला धनखोरी में शामिल हैं ?
- क्या नाम जाहिर होने पर इन्हें डर लग रहा है ?
- बाबा की खिलाफत करके ये कहना क्या चाहते हैं ? की काला धन बाहर ही रहने दो ? भारत देश को गरीब ही रहने दो ? किसानों को भूखे मरने दो ?
- क्या राजा और कलमाड़ीयों को पनपने देना चाहिए ?

ये क्रांति का दौर है। चाहे मिस्र हो या भारत । सत्य की आवाज़ को कोई दबा नहीं सकता। चोरों का मुंह काला और सत्यवादियों का बोल-बाला होगा ही होगा।

सत्य की जय हो !
भारत माता की जय

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ZEAL said...

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असंवेदनशील जनता को ये क्यूँ नहीं दीखता की नींद में सोये निर्दोष और अनशन पर बैठे लोगों के पर लाठियां बरसायीं । क्या इसकी सराहना की जाए ?

लोकतंत्र में आम जनता को अधिकार है की वो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाये । बाबा ने क्या गलत किया ?

बाबा के पार पैसे है तो सरकार में बैठे बैमानों को बाबा भी बइमान लग रहे हैं ? जिसके भी पास पैसा हैं , सब बइमान हैं क्या ? चोर हैं क्या ?

हर साल बाबा के पैसों का भी audit होता है । white money है । लोगों के पेट में इतना दर्द क्यूँ है ? जो लोग बाबा के खिलाफ हैं , वे भ्रष्टाचार के समर्थक हैं और लोकतंत्र का सम्मान करना भी नहीं जानते।

इश्वर करे बाबा के पास और भी धन आये जिससे वे देश की सेवा निर्बाध रूप में कर सकें।

आधी रात में दरिंदगी दिखाने वाली निर्लज्ज सरकार की जितनी भी भर्त्सना की जाए , कम होगी।

अब तो आन्दोलन और भी विकराल होगा । क्रान्ति की लहर को रोका नहीं जा सकेगा। सरकार ने इतना काला धन कमाया है और भंडा-फोड़ होने के भय से ऐसी बर्बरता कर रही है जो अति निंदनीय है।

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ZEAL said...

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सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश ने ये आदेश दिया है की केंद्र सरकार इसका बात का जवाब दे की वो कौन सी परिस्थिति थी , जिसके लिए दस हज़ार की संख्या में पुलिस बल के इस्तेमाल की आवश्यकता हुयी ?

सोयी हुयी निर्दोष जनता ने कौन सा आतंक मचाया था ?

क्या सरकार इसका जवाब दे पाएगी ?

सरकार ने एक आम नागरिक के fundamental rights का हनन किया है । एक शांतिपूर्ण अनशन का बर्बरता के साथ दमन किया है। क्यूँ किया गया दमन ?

क्यूँ नहीं गुर्जरों के ४० दिवसीय उत्पात को रोका गया , जहाँ देश की करोड़ों की संपत्ति को क्षति पहुंचाई गयी।

क्यूंकि वो देश का नुकसान था , लेकिन बाबा के अनशन से उनका निजी नुक्सान हो रहा था इसलिए ?

पूरे रामलीला मैदान को लाक्षाग्रह बनाकर बाबा समेत अनेकों लोगों को जलाकर मारने की असफल कोशिश। आग बुझाने की अवस्था में बार बार आग क्यूँ लगायी गयी ? बुझाने वाले कार्यकर्ताओं को लाठियों से बुरी तरह पीटा।

महिलाओं के साथ वहशीपने का सलूक हुआ , जिसकी सच्चाई जानकार भी सरकार का दिल नहीं पसीज रहा।

कानून मंत्री अपने कानूनी दांव पेंचों से सीधी-साधी जनता और बाबा को फंसाना चाहता है ?

कानून और बल द्वारा आम जनता को त्रस्त किया जाएगा तो रक्षा के लिए कौन से हथियार प्रयुक्त होंगे ?

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गिरधारी खंकरियाल said...

आप क्या जाताना चाहते है ? यदि आर एस एस या रामदेव बाबा भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते है तो साम्प्रदायिकता होती है यही कम राहुल गाँधी करता तो महान काम होता ! जिसका आयोजन होगा उसके बैनर भी होंगे. किसी दूसरे समूह यानि कांग्रेस या N D T V का बैनर तो लगायेगा नहीं . सरकार में ताकत थी तो रात में लाठी चार्ज क्यों किया . जब लाठी चार्ज हो रही थी तब आप जैसे रिपोर्टर कहाँ थे आपको क्यों नहीं बुलाया. चंदा किया तो जिसकी मार्केट होगी ( श्रधा की , या व्यापर की ) उसे तो मिलेगा ही उसमे चोरी तो नहीं है तो परेशानी किस बात की . जब टीवी वाले या अखबार वाले कई समाचारों के लिए ( प्रकाशन व् अप्रकाशन ) के लिए अवैध पैसे लेते है तब क्या होता है . बाबा राम देव से इतनी अलेर्जी क्यों? क्या ये कृत्या तथा कथित धर्मनिरपेक्ष सरकार का उचित है उपवास पर बैठे लोगो पर लाठियां बजाये . क्या कसूर था उनका . क्या राम देव के मुद्दे गलत थे रूढीने आपको सही जबाब नहीं दिया इससे क्या अर्थ निकालना चाहते है आप? कि सारे मुद्दे वकवास है आप जैसे रिपोर्टर जो चौथे स्तम्भ का दंभ भरते हो से ऐसी आशा नहीं थी कि लीपा पोती कर लिखोगे

ZEAL said...

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बाबा ने जो mass consciousness (जन चेतना) जगाई है , वो कोई दूसरा नहीं कर सकता । हाँ इस जगी हुयी चेतना की आग पर , मौकापरस्त राजनीतिज्ञ अपनी रोटियां अवश्य सेंक लेंगे।

बाबा की मेहनत विफल नहीं जायेगी। भ्रष्टाचार दूर हो इसके लिए बाबा जैसे साफ़ दिल इंसानों की बहुत ज़रुरत है। यदि इस धरा पर कहीं अच्छाई और नेकी है तो वो सभी पवित्र ताकतें बाबा के आन्दोलन को सफल बनाएं और आम जनता का मनोबल भी ऊँचा रखें ।

Thanks and regards,

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गिरधारी खंकरियाल said...

उपर से आप ये भी कहते हो कि जलिया वाला बाग की जैसी घटना तो बिलकुल भी नहीं है स्वतंत्र भारत में इतनी बड़ी घटना रात के अँधेरे में होती है अरे अंग्रेजों ने ये जलील काम सरेआम दिन में किया था इस नपुंसक सरकार नें तो रात में किया शर्म आनी चाहिए आपको भी . राहुल गाँधी भट्टा पारसोल जाता है धरा १४४ तोडकर तब कुछ नहीं होता बाकि नेता जाते है उन्हें गिरफ्तार किया जाता है . आप महान है आपकी रचना कालजयी है आपका विवेचन... !

नीरज बसलियाल said...

Good Report

Vijai Mathur said...

आपका लेख संतुलित एवं जायज है.जब तक धार्मिक भ्रष्टाचार दूर नहीं किया जाता जो आर्थिक भ्रशाचार की जननी है ,सारे आंदोलन चाहे अन्ना हजारे के हों या राम देव के बकवास और जनता को ठगने वाले हैं.जब तक मजार पर चादर और मंदिर में प्रशाद चढाना जारी रहेगा भ्रष्टाचार फलता-फूलता रहेगा.मजदूरों और किसानों का शोषण किया धन हिंदुस्तान लीवर आदि औद्योगिक घराने इन ढोंगियों को देकर जनता को बेवकूफ बनाने हेतु खड़ा करते हैं -उससे भ्रष्टाचार कैसे दूर होगा?क्या झूठ बोलना,फरेब करना,औरतों के वस्त्र धारण करना और औरताना वेश में औरतों के झुण्ड में छिप कर चोरों की तर्तः भागना ही सन्यासी के लक्षण होते हैं?

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

रवीश जी !
आपकी बात कुछ लोगों को समझ नहीं आएगी क्योंकि आजकल लोग दिमाग और तर्क बुद्धि से सोचना नहीं चाहते और जो दिमाग का सही इस्तेमाल करते हैं लोग उन्हें मूर्ख और भ्रष्टाचार का समर्थक कहते हैं.तरस आता है ऐसे लोगों की सोच पर.
बहरहाल आप के इस लेख से शतशः सहमत हूँ और इसका लिंक अपनी फेसबुक वॉल के लिये ले रहा हूँ.

सादर

अरूण साथी said...

सरजी मैं आपके बात से पूरी तरह से असहमत हूं बाबजूद इसके की कभी बाबा के उन विचारों से मैं सहमत नहीं रहा जिनमें अहंकार का पुट हो और दुर्भग्य से बाबा के ज्यादा बातों में अहंकार का ही पुट होती है। खैर जिस मुददे को आपने उठाया है मेरी समझ से देश का सबसे ज्यादा नुकसान इसी मुददे ने पहूंचाया है और बेड़ा गर्क भी यही मुददा करेगा। मैं कभी सम्प्रदायिकता का साथ नहीं रहा पर सिर्फ उसका विरोध करने के लिए विरोध करना भी उतना ही बड़ा जुर्म है जितना दूसरा।

आरएसएस के नाम को आगे करके हम देश को कितना नुकसान करेगें?

क्या आतंकबाद से बड़ा मुददा आरएसएस है?

क्या भ्रष्टाचार से बड़ा मुददा आरएसएस है?

क्या ऐसा नहीं है कि वैचारिक और सेकुलर कहने के अहं की तुष्टीकरण की परिणति के रूप में भी आरएसएस का विरोध सामने आता है?

Sonal Rastogi said...

एक तूफ़ान उठा था अन्ना के साथ ...उसके आवेग से अच्छी-अच्छी जडें हिल गई ,अब जो हुआ वो तमाशे से ज्यादा कुछ नहीं लगा ...इस बार दिल ने नहीं कहा "आप संघर्ष करो हम आपके साथ है "

electrickashish said...

chaubey ji chale they chabbey ji banane dubey ban ke lautey..

Poorviya said...

सेकुलर मर गए क्या और राजकुमार को क्या हुआ मानवाधिकारी कहा गए सब ........

अब इन सब को कुछ नजर नहीं आता सब के सब पता नहीं अब कहा है ......

जय बाबा बनारस ............

electrickashish said...

भाई बाबा सहगल ज़्यादा बेहतर था बाबा रामदेव से रामेव को भी कोई ठंडा ठंडा पानी दे.... . 1100 करोर कमा लिए और क्या चाहिए ... और भ्रास्तचार तो भाई कभी ख़तम नही होगा लोगों विदेशों से 80 हज़ार करोर आप ले आओगे तो फिर से वापस वो पैसा विदेश नही पहुँचेगा...? आर टी आई और सी वी सी का इस्तेमाल कौन कर पाता है आम जनता में ? 250 लोगों का सी वी सी क्या कर पाएगा?? ज़्यादा से ज़्यादा लोकपाल को 1000 लोगों का स्टाफ मिलेगा ?? जनता मॅक्रो लेवेल के भ्रास्तचार से उतनी दुखी नही होती जितनी माइक्रो लेवेल के भ्रष्टाचार से.. और आम जनता की सुनवाई इस देश में नही होती.. किसी ने कवक में भेजी सुनवाई आप लोगों में?? सिस्टें दे देने से कुछ नही होगा जब तक स्यटें इस्तेमाल कैसे होगा इसका ग्यान एक अंगूठे छाप आदमी को भी हो तभी सुयस्तें बनेगा

Anand Rathore said...

Ravi bhaiya , ramdev kya hai kaun hai ? kaisa hai , kis se mila hai ? ye saari baaten congress ko deal karte waqt pata nahi thi kya?

ramdev kya hai , kyun hai janta ko kuch lena dena nahi... kyunki wo janta ke haq ki baat kar rahe the.. baaki baaten janta nahi sochti...

janta apna vote deke 5 saal tak baithi rahe aur dekhti rahe apne aapko lutte huye... loktantra mein janta bina neta ke kaise sangathit ho .. ?

saari baaten ek taraf ..jo uss raat logon ke saath huya , kya sahi hai?

saare news channel par bade bade reporters ko suna.. aisa laga saare confuse ho gaye hain... aap se umeed thi lekin aap bhi kai jagah chuke ... khaas kar netayon ko javab dene ke mamle mein.. unhe sahi mudde par rakhna mushkil kaam hai ..lekin bebaak hokar apni baat rakhne ke hasiyat aap ki ho gayi hai itna main samjhta hoon..jo aap iss baar nahi kar paaye...

dil ki awaaz kahti hai galat huya hai.. aur aam aadmi ke roop mein bebas mahsoos kar raha hoon...

ram dev kya hai.. kyun hai...kaisa hai .. mujhe nahi pata... mujhe pata hai bhrastachaar ke khilaaf awaaz uthayi gayi thi..jiska daman huya hai...

aisa lag raha hai...shhhhhhh ..khamosh .. bolge to jaban kaat li jaayegi.. dekhoge to aankhen nikaal di jaayengi... chup chaap lut te raho... media ka har reporter apni vaktigat rai deta rahega...sahi baat se kosho door confuse hota rahega ..karta rahega... aur ye chor apni rotiyan senkte rahenge...

पंकज सुबीर said...

अपने फेस बुक http://www.facebook.com/subeerin के लिये मैंने भी लिंक को साभार आज प्राप्‍त किया है, इस लेख का जितना प्रचार प्रसार हो उतना कम है. ये आज का वो सच है जो सबको जानना चाहिये ।

नीरज गोस्वामी said...

रविश जी रामदेव बाबा के भ्रस्टाचार आन्दोलन पर आपका लेख बहुत संतुलित है. इसमें दोनों ही पक्ष, सरकार और बाबा, गलती कर गए खामियाजा बिचारी आम जनता को भुगतना पड़ा. इस पूरे आन्दोलन की सबसे खेद जनक बात सोते लोगों को जगा कर भगाना और पिटाई करना है, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है. आम जन अपने सपनो को साकार करने वाले स्वनामधन्य मसीहाओं के पीछे हमेशा से ही चलते आये हैं और हमेशा प्रताड़ित होते आये हैं. ये दो पाटों के बीच पिसने वाले वो जीव हैं जो अपनी नादानी से बार बार जानते हुए भी पिसने चले आते हैं. आपके इस दुर्लभ लेख की आखरी पंक्तियाँ कमाल की हैं:-

"प्राण देने वाले बाबा ने प्राण बचाने के लिए स्त्री धर्म का जो सम्मान किया है उसका मैं कायल हो गया हूं। हज़ारों की भीड़ ने बाबा को बचाने की कोशिश नहीं की, लड़कियों के छोटे से समूह ने यह जोखिम उठाया। उनका सम्मान किया जाना चाहिए।"


नीरज

Navin C. Chaturvedi said...

यदि संक्षेप में कहा जाए तो यह घटना हमें उद्वेलित कम पर विचलित अधिक कर गई है|

►►♫♫♥¶♂Ş├┤└┘β╠╣Ąм™♂¶♥♫♫◄◄ said...

वो दिन दूर नही जब लोग रंगों के आधार पे पहचाने जाएँगे| वो देखो "नीले" रंग वाला आम आदमी जा रहा है, वो देखो "भगवा" रंग वाले बड़े साहब जा रहे हैं| क्या करें भाई भगवान के प्रतिनिधि हैं, पूरे देश के धर्म का ठेका इन्होनें ही ले रखा है ना| यहाँ तक की भगवान चुनने की अनुमति भी यही साहब देते हैं| जब जान पे बन आती है तो सत्याग्रह का चोला फेंक कर "सलवार-कमीज़" भी पहन लेते हैं और सत्याग्रह जैसे पवित्र शब्द को कलन्क्रित करने से भी बाज़ नही आते| मन करता है कि खींच के एक तमाचा रसीद दूँ जब कोई कहता है कि देश के लिए कुछ करना है| हम तो "नीले" रंग वाले भिखारी हैं भैया और "भिखारी को चुनने का अधिकार थोड़े ही है" , ये सब काम तो "भगवा" रंग वाले "बड़े साहबों" का है|
बात सीधी सी है, कॉंग्रेस के रास्ते पर चलकर देश विनाश के गर्त में जा रहा है लेकिन ये मत भूलिएगा की बाबा के रास्ते पर चलकर भी देश का कल्याण नही होने वाला क्योंकि बाबा तो "डीलिंग" करते रहेंगे और जेट में उड़ते रहेंगे, और हम एक रामलीला मैदान से दूसरे मैदान में भीड़ बढ़ाते रहेंगे|

P.S. : योगा किया कीजिए और फिर देखिए आपके अंदर के देशभक्त को जगाने के लिए बाबाओं की ज़रूरत नही पड़ेगी|

दीपक बाबा said...

देश की गरीबी को टीवी पर परोस कर वाह वाही बटोरने वाले रवीश जी बहुत अच्छा लगा आपका ये लेख. और इसी बहाने साम्प्रदय्कता और शर्म(धर्म) निरपेक्षता पर अच्छी खासी बहस चल रही है.....

तर्क बुद्धि मेरे पास है नहीं.. पर एक बात पूछना चाहता हूँ की वो दूकान कहाँ है जहाँ से आप सभी प्रबुद्ध लोग आर एस एस का अदृश्य हाथ देख लेते हो.

रघुबीर सिंह said...

रामलीला मैदान पर बाबा रामदेव के नेतृत्व में चल रहे सत्याग्रह में, सरकार के इशारों पर पुलिस द्वारा दमनात्मक कार्यवाही की गयी और आन्दोलन को कुचला गया वह लोकतंत्र के लिए अत्यंत शर्मनाक है। साथ ही बाबा रामदेव द्वारा जिस तरह से भीड़तंत्र का सहारा लेकर सरकार को ब्लैकमेल किया जा रहा था वह भी जायज नहीं कहा जा सकता है। लोकतंत्र बनाम भीडतंत्र के इस खेल की निंदा की जानी चाहिए क्योंकि इस लडाई में मारा तो बेचारा आम आदमी ही जाता है।

Deepak said...

who is talking communal? at this time who is willing to divide us on communal grounds? we have seen in all the media coverage that people from all the community supported the common causes of us and was there at the satyagrah. not a single word was spoken there which shall have disturb the communal harmony of the country. but the some people look the gathering as communal and now shouting it large just to provoke and induce communal un balance in the country. always they fooled us and want us to discuss other things then main. they always diverted issues be it lokpal while targetting mr shanti bhushan

Paresh Kumar Singh said...

But earning of Baba is not by any illegal source. i have personally used the medicines of Baba Ramdev and all of them are cheap and more effective than multinational brands. Govt. has done various investigations from different agencies and failed to prove anything against Baba but see politicians, most of them are corrupt and central govt. did nothing for recovery of Black Money from Swiss banks because top leaders of congress have billions crores in swiss bank including Sonia and Rahul. Anna Hazrae is so simple that we should learn from his life style and do something for nation. And, congress govt. must stop corruption otherwise be ready for next revolution.Congress govt failed in recovery of black money because he is not interested at all.

Paresh Kumar Singh said...

Don’t blame always RSS for each crisis. RSS has always done various constructive job in India and RSS is not a communal organization. And, if still, RSS supports Baba Ramdev for a right cause then we should support RSS.(better than corrupt central govt.0 Corruption is big issue and please don’t divert it. Muslims also in the support of the Baba Ramdev's movement. Thousand Muslims are actively participating in movement because most of them are patriot. So, Mr. Ravish be neutral and don’t divert this great movement otherwise history will never forgive you, for wrong reporting.

Hem Jyotsana said...

इस निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद थी आप से बहुत बहुत शुक्रिया |

संजय ग्रोवर Sanjay Grover said...

संतुलित लेख लगा। मैं वह प्रसारण देख रहा था। आप उस भीड और उस माहौल से़ प्रभावित हुए बिना इस तरह बोलने वाले हिंदी के शायद अकेले रिपोर्टर रहे होंगे। मुझे आपका इस तरह बोलना काफ़ी साहसपूर्ण लग रहा था।

पंकज मिश्रा said...

आपकी और बाबा की तो राशि भी एक ही लगती है। रामदेव और रवीश, क्यों????
बाबा अकेले हीरो बनने चले थे, इसलिए मामला गड़बड़ा गया। अन्न्ना के आंदोलन पर कोई ऐसी लाठी चला कर देखे। औकात पता चल जाएगी। अन्ना भगेंगे नहीं बल्कि सामने आएंगे।
खैर, आपकी रिपोर्ट अच्छी है।

vibidha said...

रवीश जी आपकी विश्लेषात्मक रिपोर्ट में नया कुछ नहीं है में आपके विचारों से असहमत हॅू बाबा द्वारा उठाऐ गऐ गंभीर देशहित के मुद्दों की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है इस देश का बुद्धिजीवी वर्ग फालतू की वैचारिक जुगाली कर रहा है जिसमें आप भी शामिल होगए लगाता है। इस तरह की रिपोर्ट कॉग्रेस और उस वर्ग का मजबूती देती है जिन्हें देशहित से कोई सरोकार नहीं है बाबा के एक महत्वपूर्ण कालेधन को देश में वापस लानें की मॉग को एक तरह से दरकिनार किया जा रहा है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कॉग्रेस भी तो यही चाहती है। बाबा ने आरएसएस का साथ लिया है या किसी भी और संगठन का यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि उनका मुद्दा लेकिन हम है कि कॉग्रेस के दिऐ गऐ बयानों में उलझकर रह गऐ है बाबा की मॉग कहॉ से नाजायज है। यदि कोई संगठन देशहित से जुडे़ मद्दों का समर्थन करता हो चाहे वह तथाकथित साम्प्रदायिक ही क्यों ना हो क्या उसकी इस मॉग के समर्थन में साम्प्रदायिकता झलकती है जरा स्पष्ट किया जाऐ ?

SHEETAL said...

congress ki yeh sochi samjhi chal thi baba RAM DEV ke ansahn ko ramlila maidan se ukhad fekne ki ....
per baba RAM DEV bhi jab yoga sikha ke nam kma rahe the to kya zarurat thi netagiri krne ki .....
ye achi bat hai ki vo desh ke liye socte hai aur satyagrah aur black money vapas lane ke liye satygrah krte hai per usme RSS aur BJP ko lake usko political stage banane ki kya zarurat hai .....
kahi iske jariye vo rajneeti me to nahi kadam rakhna chahte the shayad ha, tabhi congree ne socha inka satyagrah sucess hua to yeh neta ban jayega isi liye neta banne se pahle hi kahani uti kardi ......
kaha gaye RAHUL GANDHI vo kyu nahi ate kabhi andolan me curruption ke khilaf bolne BHATTA PARSOL me to subah 4 am pahuch gaye the ki MAYAWATI ne police dwara zulm kiya ab kyu nahi ate bolne jb police ne ram lila maidan me dande barsaye the.....
BJP ho ya CONGRESS sab ek thali sikke ke pahlu hai vo bhi us sikke ke jo ki khota hai

dipesh said...

ravish, apka lekh der se padh paya aur har bar ki tarah baba ramdev aur congress se ghumte firte ap bjp par akar thithak gaye. sivay chhati kootne ke apke lekh me kuchh naya nahi, wahi bjp ko gariyana. lekin is bar ek bat bahut buri lagi wo ye ki apne likha, shishu mandir ki ladkiyo se ''HINDU RASHTRA GAN' gavana. kya yar ye rashtra gan kab se hindu musalman ho gaye hain. ndtv me kam karte karte tumhari patrakarita khatam ho chuki hai. sirf bjp aur hinduwadi sangthano ko gariyana apka target hai. gariyao yar, farq nahi padta par ye rashtragan ka to apman mat karo. apne chelon ke liye tum bade patrakar hoge, desh aur uske pratiko se nahi, jitna tumhe ndtv india se pyar hai utna hi hame bharat se hai. iska jawab to tum doge nahi, pata hai.

रवि कुमार, रावतभाटा said...

वैसे सलवार कमीज़ और दुपट्टे में रामदेव सुसंस्कृत,सुशील,सौम्य और घरेलु लग रहे हैं। यह तस्वीर दुर्लभ है। प्राण देने वाले बाबा ने प्राण बचाने के लिए स्त्री धर्म का जो सम्मान किया है उसका मैं कायल हो गया हूं। हज़ारों की भीड़ ने बाबा को बचाने की कोशिश नहीं की, लड़कियों के छोटे से समूह ने यह जोखिम उठाया।...

एकदम नई बात... :-)

sanjay said...

यह तो तय है किबबा रामदेव व्यापारी है यह तमाम लोग कह रहें है पर मुझे नहीं लगता कि वो व्यापारी हैं गर ऐसा था तो चिट्ठी लिखने के बाद हीं वो वापस हरिद्वार कि ऑर कुछ कर जाते .इस पूरी मुहिम में मुझे जो दीखता है वो यह है कि उनके पास कुशल सलाहकार नहीं हैं जिसका खामियाजा निरपराध लोगों ने भुगता . पुलिस पर सवाल उठाना बेकार है वो वहीं करती आयी है वो वहीं करेगी इतनी बड़ी संख्या में आयी पुलिस को कौन नियंत्रित कर सकता है . जो फुटेज दिखे है उसमें कहीं ऐसा नहीं लगता कि लोगों ने विरोध नहीं किया हो .पर इस लड़ाई में दूसरी लड़ाई कमजोर पड़ती जा रही है . यह स्पस्ट दिख तह है.
आनंद

प्रिया said...

Sorry Sir, I'm not agree with u...Generally aisi baaton par comment nahi karte...Aapki report bhi dekhi thi hamne...waise to bada naam aap bhi hain...Flatters to aapke pass bhi honge....Jo sawaal Divya ji ne uthaye hain unke jawaab hain aapke pass? Ham zyada kuch nahi jaante lekin itna jaante hain ki is samay Desh ko Ramdev Baba aur Anna ji dono ki zaroorat hai ....aur Kaladhan to T.V channels owner ke pass hi hota hai hoga ...Generalist saare to imaandar nahi hote....Imaandar ki kamaai mein itna paisa kahan hai sir....ki news channels Launch ho saken ....hamko to shaq hai ki media ke high profile log bhi swiss bank mein chupa ke paisa rakhtey hain :-)

Rishi said...

aisa suna hai ki 'ravish ki report' ab nahi dikhai jaegi. Ye sach hai kya?

वनमानुष said...

कल स्टार न्यूज़ में कुछ बड़े योगाचार्यों का व्यक्तव्य सुना.कुछ बातें उन्होंने बहुत सही ताडीं कि रामदेव असल में योग नही वरन बॉडी वार्मअप का व्यायाम मात्र कराते हैं.योग गुरु का तमगा लगाकर रामदेव ने उन करोडो लोगो को ठगा है जिन्होंने पतंजलि को नहीं पढ़ा.गुरु योग की आड़ में एक्रोबैट्स की ट्रेनिंग देते हुए प्रतीत होते हैं.योगी बंदरों की तरह उछलकूद नहीं करता बल्कि वह हर स्थिति में शांतचित रहता है.रामदेव योग के मूलभूत नियमों का ही अनादर करते हैं जो सत्य, अहिंसा ,अस्तेय, अपरिग्रह तथा अब तक उन्होंने जो किया है वह मंशा वाचा कर्मणा झूठ,हिंसा,धोखाधडी और जमाखोरी जैसे अवगुणों से लबालब है.यदि हम रामदेव को योगी कहें तो ये बुद्ध और महावीर का अपमान होगा.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमें ऐसे लोगों को अपना आध्यात्मिक नेतृत्व सौंपना चाहिए?क्या वे गैर संवैधानिक तत्व जिनकी खुद की कोई क्रेडिबिलिटी नहीं,को सिर्फ आस्था (जो अक्सर अंधभक्ति का पर्याय होती है) के आधार पर हमारे देश का नीति निर्माता बनने का कोई हक़ है?क्या आस्था के आधार पर चुने हुए व्यक्ति को संविधान से छेड़छाड़ और लोकतान्त्रिक सरकार को ब्लैकमेल करने देना चाहिए?जनता से पहले मीडिया को इन सवालों पर आत्मावलोकन करना चाहिए.

AMIT MISHRA said...

रामदेव के पास अब छिपाने के लिए कुछ नहीं बचा। जो कुछ भी अभी तक जनता से छिपा हुआ है वह भी उनकी महत्वाकाक्षाओं के चलते जल्द ही समाने आ जायेगा। कुल मिलाकर एक सधा हुआ लेख जिसमें बाबा के भक्त तो खामियां जरूर निकाल सकते हैं लेकिन कोई भी राष्टरवादी इंसान कोई त्रुटि नहीं निकाल सकता
आपकी लेखनी को प्रणाम
हर बारी आप उम्मीद से बेहतर डिलीवर करते हैं

Suresh Chiplunkar said...

सवाल दो बड़े हैं। क्या किसी सही मुद्दे से लड़ने के लिए सांप्रदायिक शक्तियों का सहारा लिया सकता है और दूसरा क्या सेकुलर बने रहने के लिए किसी सरकार को अहंकारी और घोटालेबाज़ बने रहने दिया जा सकता है?

इसमें से दूसरे सवाल का जवाब "हाँ" में देने वालों की तादाद ज्यादा है…। सेकुलरिज़्म की जय…

रामदेव बाबा के मात खाने के पीछे एक कारण यह भी रहा कि उनके साथ शातिर-कमीने किस्म के सलाहकार नहीं थे…

विजय प्रकाश सिंह said...

रवीश जी,

पहली बार आप के किसी लेख पर आप के पाठकों की इतनी असहमति दिखाई दी | यह बाबा रामदेव का प्रभाव है और एक पढ़े लिखे वर्ग में स्वीकृति भी |

आपके ही चैनल पर सुना था कि रामदेव और अन्ना के आंदोलन में शामिल लोगों में फरक यह था कि जहाँ अन्ना के साथ ज्यादा शहरी अभिजात्य वर्ग था , रामदेव के साथ ज्यादा देहाती लोग थे यानी आम लोग , वह भी किसी राजनैतिक दल के किराए के लोग नहीं थे | यह बाते तब तक ही थीं जब तक सरकार ने अपना रौद्र रूप नहीं दिखाया था , जैसे ही सरकार पलटी, बाबा की पोल खोलने का सिलसिला चालू हुआ, जो जाहिर है सत्ता पक्ष द्वारा प्रायोजित था |

इस आमरण अनसन के बाद मेरे मन में एक ही विचार आया कि अब इस देश में कोई शान्ति पूर्वक अहिंसक आंदोलन नहीं कर सकता , उसे सोते में पीटा जाएगा और कोई शस्त्र और शास्त्र में पारंगत दल भी नहीं खडा कर सकता क्योंकि वह एक्स्पोस हो जाएगा उसका फासीवादी चेहरा सामने आ जाएगा | अब आप ज्ञानी हैं रास्ता आप ही बताइए ? हाँ ध्यान रखियेगा , आप जो जवाब दें उसे कोई RSS या BJP वाला समर्थन न करदे नहीं तो कही के न रहिएगा आप अछूत हो जायेगे, और कहीं किसी हिंदू देवता का नाम ले लिया तब तो आपका क्या हाल होगा सोच लीजिए |

यह है आज का राजनैतिक माहौल | हम सब इसमे खिलौना बने हुए हैं | अंत में , जब अन्ना का आंदोलन चल रहा था तो हर चैनल ने जिसमे NDTV ( 24x7 ) और NDTV India शामिल है ने मंच पर भारत माता की तस्वीर होने के कारण उसे भी हिंदूवादी कहा था , मगर अब बैलेंसिंग के लिए उसे सेकुलर बताया जा रहा |

Amit Choudhary said...

media waale rss se itna khouf kyun khate hain ravish ji ..kya vo atankwadi hain?