निर्लज्ज दर्शक और क्रिकेट के दलाल विशेषज्ञ

आईपीएल का जन्म क्रिकेट के विकास के लिए हुआ था। लफंगई के इस खेल में कुछ महान विचारक क्रिकेट का भविष्य देख रहे थे। ललित मोदी को दलाली के इस दंगल के रचयिता के रूप में पूजा जा रहा था। ये विचारक उसी कैटगरी के हैं जो मान कर चलते हैं कि सरकारी विभागों में काम कराना है तो कुछ न कुछ घूस देने में एतराज़ नहीं है। चलता है। चार बंदरियों को नचाकर हर छक्के पर ताल ठोंक कर खेल का विकास हो रहा था। जैसे क्रिकेट में इसी की कमी रह गई थी कि हर छक्के पर कोई नाचने वाला नहीं मिल रहा था। एनर्जी दिखती है लोगों को ऐसे खेल में। आईपीएल से पहले हो रहे क्रिकेट में बिना एनर्जी के ही सब कुछ हो रहा था। मानो जहां आईपीएल नहीं हैं,वहां कोई खेल ही नहीं है। कोई यह बता दे कि पिछले तीन साल में क्रिकेट का कितना विकास हुआ है। जानने की इच्छा हो रही है। तीन घंटे में सीरीयल की तरह क्रिकेट देखने वाले जानकार ललित के इस शाहकार की तुलना शाहजहां के ताजमहल से कर रहे थे।

सर फोड़ने का मन तब किया जब इतने हंगामे के बाद भी निर्लज्ज दर्शक सेमिफाइनल देखने पहुंच गए। यह भारत के समाज का असली चेहरा है। भ्रष्टाचार के प्रति हमारी सामाजिक सहनशीलता इस स्तर पर चली जाएगी कि लोग आईपीएल की दलाली और दलदल की खबरों के बाद भी मुंबई इंडियन्स और डेक्कन चार्जर्स के हुल्लड़ खिलाड़ियों का मैच देखने चले गए। दलीलबाज़ कहेंगे कि कुछ लोग मेरे क्रिकेट को मैला कर बदनाम नहीं कर सकते। मैच फिक्सिंग के बाद से मैंने क्रिकेट मैच देखना बंद कर दिया था। उसके पहले भाग कर पड़ोसी के घर जाता था स्कोर देखने। क्रिकेट के भविष्य संवारने में जुटे तीन टके के दर्शकों और खेलप्रेमियों के जमात से खुद को अलग कर लिया था। अभी कुछ भी साबित नहीं हुआ है लेकिन दलाली का संगम है आईपीएल, इसका मंज़र दिखने लगा है। फिर किस खेल के प्रेम का इज़हार करने ये दर्शक स्टेडियम में गए। क्या ये वही दर्शक हैं जो दहेज की शादी में बाराती बन कर जाते हैं। जिनके लिए भ्रष्टाचार किसी तरह का सामाजिक अपरिग्रह नहीं है।

आईपीएल एक जुआ है। इस जुए का जुगाड़ पैसा कमाने के लिए किया गया था। कंपनियां बनाकर निवेश का खेल खेला गया। गलत तरीके से मुनाफा बटोरा गया। मुझे तो आईपीएल से लेकर बीसीसीआई के तक चेहरे शरद यादव की तरह लुटेरों के चेहरे लगते हैं। नवाब पटौदी ने कहा कि गवर्निंग बॉडी के बाकी सदस्यों को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी। क्या कर रहे थे जनाब। ललित मोदी की वाहवाही। क्रिकेट प्रेमियों का जुनून देश में दलाली का ऐसा गठजोड़ पैदा करेगाय ये नहीं सोचा था। जुनून या फैन्स होने का शौक पालने वालों को सतर्क रहना चाहिए कि उनकी इन भावनाओं का इस्तमाल कोई इस तरह से कर सकता है।

जब यह विवाद उठा तो कई जानकारों ने ललित मोदी के योगदान की तारीफ करनी शुरू कर दी। मोहल्ले के दस बीस ओवरों के मैच का आइडिया उठाकर लुटेरों ने आईपीएल बनाया और पैसे लेकर विदेशों में लगा दिये। ललित मोदी का योगदान इस बात में है कि क्रिकेट जैसे खेल से दलाली कर कैसे पैसा कमाया जा सकता। जानकारों का योगदान है कि कैसे ललित मोदी की तारीफ कर दलाली के पक्ष में खड़े होने का शाब्दिक हुनर हासिल किया जा सकता है।

अगर आप क्रिकेट प्रेमी है और दलाली की इन खबरों के बाद भी आईपीएल के तीन टके मैच को देखते हैं तो आपके प्रति नाराज़गी ज़ाहिर करने की अनुमति दीजिए। आप किस टाइप के दीवाने हैं। आपकी भावनाओं के दम पर घोटाला हो रहा है और आप कहते हैं कि खेल अलग है। हम तो खेल से जुड़े हैं। अजीब बात है। कायदे से तो खिलाड़ियों को भी आवाज उठानी चाहिए। लेकिन आईपीएल के इस घपले में क्रिकेट खिलाड़ी और क्रिकेट प्रेमियों की चुप्पी समझ नहीं आती। आप ही बता दीजिए। मैच फिक्सिंग के बाद एक भी मैच नहीं देखा है।आईपीएल का तो एक मिनट भी नहीं। कुछ गलती हो गई हो तो माफ कर दीजिएगा।

41 comments:

Jai Prakash Pathak said...

namskaar!

manalaayak baat kahane kii bdhaaii.
grih mantraalay ke baare men kyaa khayaal hai. cidambaram saahab kyaa kar rahe the.

maje se bhrastaachaar karo. mast raho.
dimaag lagaao aur paise kamaao. kuchh din kaa ho hallaa fir sab shaant.

jai ho bhaarat. meraa desh mahaan.

namaskaar.

Rangnath Singh said...

बेहतरीन। बहुत ही बेहतरीन।

honesty project democracy said...

वाह मजा आ गया / आज तो रवीश जी की असल पत्रकार की आत्मा ने क्रिकेट ही नहीं बल्कि उससे जुड़े सभी नकली खिलाडियों की पूरी तरह बखिया उरेल दी है / वास्तव में ये खिलारी क्रिकेट ही नहीं देश की व्यवस्था से भी खेल रहें है ,इनकी सामाजिक जाँच और कानूनी जाँच दोनों करके इनको इसी क्रिकेट के मैदान में आम जनता के सामने सजा दिया जाना चाहिए / आपके खोजी पत्रकारिता और उम्दा विवेचना के लिए आपको मेरा सलाम /

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

रवीश भाई! बहुत बहुत बधाई!
पूँजीवाद हर चीज को बिकाऊ और हर रिश्ते को धंधा बना देता है।

Kulwant Happy said...

क्रिकेट को देश में धर्म बना दिया, कुछ लोगों ने, और धर्म में आस्था रखने वाले, धर्म में आँख मूँदकर विश्वास करते हैं, वो धर्म की बुराईयों को देखना ही नहीं चाहते, या कहूँ आदि हो गए हैं। अब लत छूटे नहीं छूटती उन से, कामरेडों ने धर्म को अफीम कहा, अच्छा ही कहा है। और क्रिकेट धर्म है और धर्म अफीम। कैसे छूटेगी रवीश कुमार क्रिकेट प्रेमियों की लत।

कौन कहता है मदर टरेसा नहीं रही

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

यह निर्लज्जत तो हर बार दिखती है जबकि पहले भी कई बार क्रिकेट को बदनाम करने वाले काम किये गए. एक बार सर पर उठाएंगे फिर जूतों से मारेंगे. ये तो इस देश के दर्शकों का चरित्र है.
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

L.R.Gandhi said...

रविश जी क्रिकेट में मैच फिक्सिंग -पैसे का बेजा इस्तेमाल तो आम बात है..अब किसी तरहं भांडा फूट गया तो सभी लिखने बैठ गए.॥ कल तक तो पाक खिलाडिओं की नखरीद पर शाहरुख़ का साथ दे रहे थे ये सभी पत्रकार बिरादरी वाले। बरसाती मेंदकों की तरहं अभी टरट्राएंगे और फिर ऐसे ही चलने लगेगा।
साफगोई के लिए साधुवाद...

amitvikram said...

Aap se ek bat kahna chahooga ki aap usi mahan loktantra me rahte hain jahan mere jaise bhi kayi log hai. Aap ko apne vichar vyakt karne ka sampoorna adhikar hai aur main sahmat bi hoon ki IPL jaise pratiyogita ke nam per cricket ko currency notes chhapne vali machine bana dena yakinan desh ke karoro cricket premiyon ke sath hua ek dhokha hai. par manneya bandhu aap ki bhasha shaili aur shabdo ka chayan ti nirlazzata ki sari hado ko langhta dikhayi diya. aisa laga ki jaise IPL se aapki koyi gambhir jatee dushmani hai. main aapko saavdhan karna chahooga ki agar apne liye thoda sa bhi chinta karte ho to aap is tarah ki neechta bhari bhasha se parhez kariya varna aap ki to izzat mujhe lagta nahi ki hai, lekin sath sath aap baki hindostaniyon ka bhi sir sharm se jhukva rahe hai, apne vicharo ko shalinta se vyakt kare to behtar hoga anyatha log aapke liye bhi yehi sochna shuru kar dege ki jaise kutta bhaunkta hai per koyi dhyan nahi deta ulte jyada bhaunkne per ek laathi markar use bhaga diya jata hai vaise hi kahin aapko na ais tiraskar jhelna pade. Ishwar aapki nirlazz vaanee ko shant aur saumya banaye aise meri prarthna hai. sadhuvad

JC said...

हा हा हा हा! रवि वहां नहीं पहुँच सकता जहां कवि की पहुँच होती है, कह गए ग्यानी- ध्यानी :)

भारत योगियों का देश है: राम, कृष्ण आदि आदि का जिन्होंने अज्ञानता के कारण उपजे क्रोध को 'नरक का द्वार' कहा, और मानव को इस धरती पर आ केवल भगवान् यानी 'परम सत्य' को पाने का प्रयास करने को कहा,,,गीता में कृष्ण ने अज्ञानता को ही सब गलतियों का बाप या मूल कहा - अज्ञानता वश ही पतंगा भी दीपक की लौ में जल कर राख हो जाता है...

और कृष्ण ने यहाँ तक कहा कि यदि आप किसी को गाली देते हो तो आप स्वयं कृष्ण को, इस श्रृष्टि के रचयिता को, गाली दे रहे हैं क्यूंकि वो सभी के भीतर विद्यमान हैं, मेरे आपके आलावा ललित मोदी के भीतर भी जो ड्रामे में केवल एक पात्र है, एक कठपुतली के समान, या एक पतंग के समान, जिसकी डोर निराकार नादबिन्दू के हाथ में है, या कहें मन में है...

क्रिकेट, एक सर्वोच्च खेल के माध्यम से 'गुरु' (परमब्रह्म) आदमी को अपनी संरचना का मूल समझा रहे हैं - सौरमंडल के सदस्यों के सार से,,,और उसे हम जैसे मूर्ख विद्यार्थियों हेतु दोहराए जा रहे हैं - बीस ओवर, पचास ओवर, चार पारी, आदि अदि और बच्चे के माध्यम से तो कपडे को पीटने वाले डंडे और ईंटों के माध्यम से भी,,,और हम हैं कि केन्द्र-बिंदु के चारों ओर घूमे जा रहे हैं, और दलदल में जैसे प्रवेश किये जा रहे हैं... हिन्दू मान्यता अनुसार ब्रह्मा विष्णु के नाभि-कमल से उत्पन्न हो कमल पर बैठ सूर्य समान (गरुड़ समान) ऊपर से ही नाटक देख रहे हैं,,,और शायद कोई ऐसा नहीं होगा जो न जानता हो कि इस धरा पर कमल कीचड से उत्पन्न होता है,,,और अंततोगत्वा सीता भी इसी से उत्पन्न हुई और इसी में समां गयी थी - ऐसा इशारे से भी समझा गए ग्यानी-ध्यानी...अब कुम्भकर्ण या ध्रितराष्ट्र का रोल जिसको दिया हुआ हो उसे कृष्ण कहाँ से नज़र आएंगे :)

मजबूरी का नाम महात्मा गाँधी" भी कहा किसी ने...अब यदि कोई पानी में तेज प्रभाव के कारण बहे जा रहा हो तो केवल राम नाम तो जप ही सकता है :)

मुनीश ( munish ) said...

एक जघन्य, घृणित सामूहिक आचरण के अलावा क्रिकेट कुछ नहीं जिस पर कोकीन आदि मादक द्रव्यों की भांति कडा प्रतिबन्ध आवश्यक है.

anoop joshi said...

रविश जी माफ़ कीजिये पर समझदारी कीचड़ देखकर रास्ता बदलने में नहीं बल्कि रास्ता साफ़ करने में है.आपने फिक्सिंग के बाद और मेने worldcup final में इंडिया के हारने के बाद क्रिकेट देखना बंद किया था . हर किसी की अलग अलग वजह हो सकती है. आप उन्हें निर्लज न कहे जो ऑफिस में झूट बोलकर, हजारो रूपया खर्च कर के, स्कूल से भागकर, घंटो लाइन में खड़े होकर, जान की बाजी लगाकर,बम फटने की घटना के बाद भी मैच देखने आये. तो कुछ तो होगा. आपने क्या उन तमाम नेताओं का interview लेना छोड़ दिया जिन में भिर्स्थाचार के आरोप लगे है. नहीं न तो दुसरो को क्यों कह रहे है? लेकिन सर में समझ सकता हूँ आप भी उन तमाम लोगो में सामिल है जो क्रिकेट को दीवानगी से प्यार करते है लेकिन उसकी ये दसा देखकर सिर्फ गुस्सा निकल पा रहे है और कुछ नहीं.................

Archana said...

IPL yani ILLEGAL PAISA LAGAO
AB AAGE AAP KHUD SAMAJHDAAR HAIN:)

अशोक कुमार पाण्डेय said...

sahi kaha ravish...please allow me to use this piece in yuva samvad's print bulletin DAKHAL.

ashokk34@gmail.com

Anoop Aakash Verma said...

Ravish ji ko sadar parnaam....bhai ji mai aapse is masle par purnth sahmat hu..schhai bhi yahi hai ki IPL kuchh sattebaazo ki ghatiya soch ka parinaam hai jise ab anzam diya ja chuka hai...

AK said...

sir wakai is lekh ke liye apko chama kar dena chaiye.apko kya kya dikhata hai mujhe nahi maloom magar hame to 3 ghanta sirf cricket hi dikhata hai.
aap usi cricket ko news bana kar kamayan koi baat nahi.Jo jaanch ho rahi hai usme ab tak kewal aasanka hai.agar kahi koi galati sabit hoti hai to rajnetaon ki.mantri ko istifa dena pada koi lekh nahi koi jaanch nahi.talibanion ki tarah sarkar ne suru kiya aap ne 1 mantri mara mai apko maroonga.tamam janch sansthan janch kam janch se sambandhit khabar jyada leek kar rahe hain.or jab 1 janch me kuch na nikle to 2nd chapa.khabar garm rahni chaiya.(or ravis ji agar aap par bhi janch ho to 25 iljam lagaye ja sakte hain.agar sirf logo ka mobile sms hi dekhe to kai niskarsh niklega or kai iljam lag sakte hai)tathya samne ane dijiye phir dekhange

JC said...

अब कलियुग के अंत में भ्रष्टाचार अधिक न दिखाई देगा तो क्या सतयुग में दिखाई देगा??? हम क्या बंद करेंगे,,,बंद तो सब हो ही जायेगा जब ब्रह्मा जी अपनी झूठे माल की दूकान बंद कर सो जायेंगे और चार अरब साल से ऊपर की अवधि के लिए अँधेरे या परम सत्य का राज्य होगा - कुम्भकर्ण तो हमारे केवल छः से आठ घंटे की तुलना में (बाकी १६ घंटे सत्य की खोज के लिए छोड़) छः माह तक ही सोता था!!!

जय हो भारत माता की!!!

manu said...

aditya : kya khel ke sudherne ki koi ummied abhi baki hai ravish ji?

shailendra said...

IPL KI SAHI TATHA NISPAKCH JANCH HONI CAHIYE AUR JANCH AISI NAHI KI SALO TAK CHALTI RAHE BALKI AISI KI JALDI RESULT AAYE.

Bhopale said...

Ravishji, Namaskar. Kal aapka show dekha, garmi ke bare mein. Laga ki aap shayad patrakarita mein woh karna chahte hein jo khwahish mein hi rah jati hai. Lekin aaj aapka yeh post...kahan hai aapki leek se hatne ki iccha? Sab jo kah rahen hain wohi to aap bhi kah rahe hain.
IPL ka faisla bahut pahle hi ho chuka hai, media jo ab dikha rahi hai us dharawahik ki shooting pahle ho chuki hai. Tharror ke bad, Manmohan Singhji ko Modi ka sar chahiye, Congress ko Vasundhara/Modi ke jariye BJP ko nicha dikhana hai, aur Pawar ko bhi control karna hai. Yeh sab rajneeti ke utha patak media na bhi bataein, public khub samajhti hai.Dusri baat, jab tak media ke nazar se dur ji le tab tak thik hai. Pata nahi kab media Sunanda Pushkar ya Rajesh aur Nupur Talwar (Aarushi ke mata pita) ki tarah meherban ho jaye (Yeh paren http://bit.ly/d1Js0O). Agar aap chahen toh yeh comment reject kar sakte hain, lekin yehi sacchai hai

सागर said...

नहीं आपकी गलती की बात नहीं है... अगर लोग मजे लेने में इतने अंधे हो गए हैं तो उनको वाकई ऐसा सोचना चाहिए... अपनी बात करूँ तो मैंने आज तक एक भी IPL का मैच नहीं देखा है... यह मुझे अपने संस्करण में मुजरा जैसा लगा.. यह भारत नहीं था... यहाँ लोग बिअर पीते हैं, नाचते हैं, कमाते हैं.... जितने फैशन क्लास लोग इसपर ए सी स्टूडियो में बैठ कर स्टाइल में हाथ फेकते हैं सब पैसा खाए हुए लोग हैं... IPL के नाम पर इन लोगों में एक्स्ट्रा जोश आ जाता है... सबने अपने जान झोंक दी है...
यहाँ सब चोर-चोर मौसेरे भाई हैं...इस हम्माम में सभी नंगे हैं

मुझे आपका यह तेवर बहुत पसंद आया... शुकर हैं किकियाते चैनल से अलग एक मुखर आवाज़ तो मिला...

पी.सी.गोदियाल said...

इसपर टिपण्णी देने का मन तो नहीं था मगर कोई बात जहाँ में जरूर थी जो उँगलियों पर आ गयी ;

अगर गौर से अध्ययन करे तो पायेंगे कि वो जो महंगी टिकिट खरीदकर स्टेडियम में गए एक तो निठ्ठले किस्म के इंसान थे , जो कोई काम करने में कम विस्वास और फ्रीफंड की खाने में ज्यादा विस्वास रखते है ! या फिर नंबर दो की कमाई घर में ज्यादा आती है ! वरना तो आम आदमी के पास इतना भी जलील होने की फुरशत कहाँ ?

amitvikram said...

Jai Prakash Ji

ishwar aapko sadbuddhi de Jaiprakash ji. cricket ko lekar aapke dimag me bhare bhoose ka mai to kuch nahi kar sakta but aap to iske sahi istemal jante hi hoge. agar aapko kuch achha nahi lagta to use mat dekhiye, mat kariye. Lekin sspko koyi hsq nahin ki apne ghatuya aur gair zimmedari bhari tippaniyon se blogs ke page bhane ke liye bakwas bate karte rahe. Cricket jinka passion hai vo sub jante hain ki nirlazz aur behaya to darasal aap jaise vo log hain jinhe doosro ke zindagi me jhannknele alava koyi kam nahi hota. shayad aap berozgar hoge ya ki aapke pas haram ka paisa hoga, tabhi uun zahilon ke mafiq bate chodte rahte ho aur apna aur doosron ka waqt zaya karte rahte ho.... dobara tippanii na hi karo to aap ke bhoose bhare dimag me machi hulchal shant kar sako. ye meri salah hai

अविनाश said...

अमित विक्रम जी, मै आपसे सहमत हूँ पर आपने अपनी टिप्पणी अमर्यादित भाषा और गलत शब्दों के प्रयोग की शिकायत के साथ शुरू की थी लेकिन मुझे आपकी ही भाषा अमर्यादित लग रही है दोस्त , अगर आप किसी के ब्लॉग के किसी लेख से संतुष्ट नहीं है तो आपको पूरा अधिकार है की आप अपने विचार उस पर प्रस्तुत करे पर भाषा का ध्यान तो हमें रखना ही चाहिए . हम सबके साथ सबसे बड़ी
समस्या यही है की हम लोग कभी उस पैमाने को अपने लिए निर्धारित नहीं करते जो दूसरों के लिए करते है . खैर मै आपसे आग्रह करूँगा की आप एक
बार मेरी इस सलाह के बारे में सोचे
अविनाश

amitvikram said...

Jai Prakash Ji

ishwar aapko sadbuddhi de Jaiprakash ji. cricket ko lekar aapke dimag me bhare bhoose ka mai to kuch nahi kar sakta but aap to iske sahi istemal jante hi hoge. agar aapko kuch achha nahi lagta to use mat dekhiye, mat kariye. Lekin sspko koyi hsq nahin ki apne ghatuya aur gair zimmedari bhari tippaniyon se blogs ke page bhane ke liye bakwas bate karte rahe. Cricket jinka passion hai vo sub jante hain ki nirlazz aur behaya to darasal aap jaise vo log hain jinhe doosro ke zindagi me jhannknele alava koyi kam nahi hota. shayad aap berozgar hoge ya ki aapke pas haram ka paisa hoga, tabhi uun zahilon ke mafiq bate chodte rahte ho aur apna aur doosron ka waqt zaya karte rahte ho.... dobara tippanii na hi karo to aap ke bhoose bhare dimag me machi hulchal shant kar sako. ye meri salah hai

amitvikram said...

Hi Avinash,
sorry for making u feel hurt bcoz of my language. It was not exactly replicated myself. Actually I had gone wild just because of having extreme love and my zeal for cricket and Cricketers. While if I talk about IPL I can say that 20-20s are good for cricket without any doubt.
In fact I believe that apart from some die-hard cricket romantics, who loved to watch the drab of five-day pajama cricket, most of the cricketing fraternity in the country was happy. The league opened the flood-gates of cash for cricketers. The established ones got richer by leaps and bounds. Even the mediocre cricketers got rich. Everybody attached to the league, be it umpires, commentators, event management groups, former players or even the skimpily dressed girls dancing after every boundary, has got something to cheer for!

But the best thing the league brought, which most of us overlook, is for the little known domestic cricketers. They got the kind of money, which they never imagined and got the fame they never dreamt of.

For the majority of the parents in India, who always tried to get their children away from this ‘game of time wasting’, cricket, has suddenly became a superb career option.

Since everyone is happy, what is plaguing some ‘chicken-hearted’ cricket writers and some old time cricket romantics?

amitvikram said...

पी.सी.गोदियाल जी आप को किस बात का घुमं है जो आप इस कदर आपत्तिजनक बाते कर रहे हैं, क्रिकेट और क्रिकेटर्स क्ले बारे में. मैं क्रिकेट का जुनूनी दीवाना हूँ, और मैंने या किसी और ऐसे शख्स ने जो क्रिकेट से प्यार करते हैं, आपसे कभी नहीं कहा होगा की आप ज़बरदस्ती क्रिकेट देखे, खेले या क्रिकेट की दुनिया में कदम रखे, कूनकी ये आप की इच्छा पर निर्भर होना चाहिए. लेकिनं आप को निम्न स्टार की अपनी सोच के साथ हम जैसे लोगों के बारे मैं अपनी कोई गैर ज़रूरी राय देने की कतई कोई आवश्यकता नहीं है. अपने विचारो को अपने पास रखियेगा तो बेहतर रहेगा. इश्व्वर आपको भी सद्बुद्धि दे...

JC said...

आज 'हिन्दू' सबसे अधिक 'कन्फ्युसिया गया' लगता है - एक ओर तो युधिस्टर को, (जिसने अपने राज्य, भाइयों को और सारे भाइयों की एक अकेली पत्नी को भी जुए में लगा कर खो दिया), 'धर्मराज' कहता है और दूसरी ओर जुए को गलत ठहराता है...इससे साफ़ है कि हम 'हिन्दू' या 'हिन्दुस्तानी' कहलाये जाने के लायक ही नहीं हैं: हमें पता ही नहीं 'सही' / 'गलत' क्या है!!! लेकिन हमारी जुबान, या उंगलियाँ, थकती ही नहीं कुछ भी बोलने या लिखने में,,,इसी कारण प्राचीन ज्ञानी दोष सारा जुबान को दे गए...:)

शिवजी के माथे को ठंडा रखने के लिए गंगा के शीतल जल (जिस में रविशजी हाल ही में डुबकी भी लगा के आये होंगे), और उसके स्रोत चन्द्रमा को सांकेतिक भाषा द्वारा उनके माथे में दिखाया जाता है - यूं ठन्डे दिमाग से काम लेने की सलाह दे गए ज्ञानी लोग, सोचने/ कूदने से पहले दो बार सोचने की सलाह दे...

prkant said...

रवीश जी ,
(sms की भाषा में कहें तो) B +ve. हमारी संसद का बहुमत जिस तरह JPC की मांग कर रहा है उससे आपको नहीं लगता कि मलाई में मुंह मारने से चूक जाने का दर्द कसक रहा है! लालू जी का लड़का अब बैट की जगह तौलिया लेकर दौड़ रहा है तो IPL दलालों का अड्डा दीख रहा है जबकि कल तक क्रिकेट का भविष्य था. पाखंड हमारा सामाजिक चरित्र है जितना जल्दी समझ लेंगे सुखी रहेंगे.

विजय प्रकाश सिंह said...

रवीश जी,

सही, सटीक बात ।

subhash said...

रवीश आपका विश्लेषण तो अच्छा है, लेकिन आपने शरद यादव का नाम क्यों लिया? कहीं शरद पवार की जगह ग़लती से शरद यादव का नाम तो नहीं लिख दिया ?

composition....photography said...

Ravish ji
I am not a fan of cricket..never been that but just as we say........".Cricket bharatvaasiyo ka dharam hai"..........ab hamaare yaha dharm ki haalat to pata haio aapko......bhagwaan k prasad k naam pe log kai thge jaate hain to kai mukti k naam pe striyo aur bachcho ka shoshan hota hai...............aaj ka bharat yai hai.lekin kal ka bharat na ho aisa ..iski koshish chalti rehni chahiye..........

JC said...

क्रिकेट और आई पी एल के माध्यम से सब पर, ख़ास तौर पर खेल प्रेमी पर कीचड़ उछालने का प्रयास देख एक स्कूल इंस्पेक्टर के ऊपर चुटकुला याद आ गया:
उन्होंने पांचवी कक्षा के सब बच्चों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहेंगे?

सबने इंजिनियर, डॉक्टर, फौजी, या पुलिस, अफसर आदि आदि बताया किन्तु आश्चर्य हुआ जब एक बच्चा बोला "ट्रक ड्राईवर!"

उन्होंने पूछा वो ट्रक ड्राईवर क्यों बनना चाहता था जबकि उसके अन्य साथी कुछ बड़ा बनना चाहते हैं?

लड़का बोला कि जब बारिश होगी और कीचड़ होगा रास्ते में तो वो सब के ऊपर कीचड उछालेगा और मजा लेगा!

kamlakar Mishra Smriti Sansthan said...

sir,namaskar,aapne sahi kaha hai,khel khel ke bhavana se khela jana chahiya .es vishay par kahna yah ki khel ko khel hi rahne de to bade meharbani hogi.
sarkar aab tak so rahi thi kya?sakar bhi khel kar rahi hai aur hum sab tamasabin bane huy hai?

आशीष तिवारी said...

रवीश दादा यह एक सोच का विषय है मीडिया दर्शकों को क्यों निर्लज्ज मने....क्या मीडिया बहुत शर्म वाली है..अगर ऐसा है तो तमाम न्यूज़ चैनल्स पर चल रहे आई पी एल स्पेशल क्यों नहीं रोक दिए गए....
www.agnivaarta.blogspot.com

Nikhil Srivastava said...

लिखा बहुत अच्छा है सर.

मैं एक कट्टर दर्शक हूँ और दर्शक के लिहाज से कमेन्ट दे रहा हूँ.

बेशक दर्शक निर्लज्ज हैं. न ख़बरों के पीछे का सच समझ पाते हैं न ही क्रिकेट के पीछे का सच. मानता हूँ आईपीएल में भयानक दलाली है, तो खबरें कहाँ सत्यवादी रजा हरिश्चंद्र के खानदान से अवतरित हो रही हैं. कितने पत्रकार करोडपति बन गये, इसका डिटेल है? और न्यूज़ के भी दलाल विशेषज्ञों की कमी नहीं है. दूसरी बात, अभी तक कहाँ थे? मोदी ने चिड़िया न बैठाई होती तो कोई न बोलता. मोदी खुद फंस गए तो सब कूद रहे हैं. मोदी के ट्वीट करने से पहले ये खुलासे होते तो मैं मान लेता कि दर्शक निर्लज्ज हैं.

amitvikram said...

निखिल आप के प्रतिक्रिया पड़ी तो ऐसा लगा की हाँ अब भी कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने मन सम्मान के बारे में न केवल सचेत हैं बल्कि अपने अन्दर से बेहद स्पष्ट हैं की किसी को हक नहीं की अपनी लोकतान्त्रिक आज़ादी का वो अपने व्यक्तिगत अहम् की तुष्टि के लिए दुरूपयोग करें और किसी अन्य व्यक्ति के आत्मा सम्मान को नीचा दिखने की कोशिश करें. रविश जी एक निहायत ही घटिया किस्म के पत्रकार हैं ये मैं और आप अछि तरह से समझते हैं. इन जैसे निचली सोच वाले वाहियात लोगो की वजह से ही आज हमारा देश इतना पिछड़ा हुआ है. क्या ये रविश जी बता सकते है की न्यूज़ टीवी चेन्नेल्स पैर आने वाली बे सर पैर की सूचनाओं और भूटिया अंदाज़ में बात करने वाले पत्रकारों के सीधे प्रसारण के द्वारा ये किस हद तक अपने भूमिका का सही सही पालन कर रहे है, इन के जैसे पत्रकारों को तो बरी में बंद करके अंदमान निकोबार भेज दिया जाना चाहिए. एक नीच पत्रकार नीचपने की ही बात कर सकता है. और ये रविश ने साक्षात् सिद्ध कर दिया है.

Nikhil Srivastava said...

अमित विक्रम जी. माफ़ कीजिएगा. आपको भी किसी के लिए अपशब्द इस्तेमाल करने का हक नहीं है. आप अपनी सोच को देखिये. और मुझे अपनी सोच का हिस्सेदार न बनाइये. मेरा अपना मत था, उसके लिए अलग तर्क है. मैं आपसे एकदम सहमत नहीं हूँ. रविश जी एक बहुत ही उम्दा और अच्छे पत्रकार हैं. उन्होंने जो लिखा वो उसे सब्जेक्टिविली देखें तो अलग बहस हो सकती है. ऑब्जेक्टिवली सही कहा है उन्होंने.

amitvikram said...

निखिल मैं आपसे माफ़ी चाहूगा जो अगर मेरे शब्दों से आप को किसी भी तरह की ठेस पहुंची हो. लेकिन आप मुझे निष्पक्ष नज़रिए से इतना बता दीजिये की अगर कोई एक आम हिन्दोस्तानी क्रिकेट प्रशंशक के liye itni अबद्रतापूर्ण और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करे तो मुझ जैसे व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा और मेरी स्वाभाविक प्रतिक्रिया क्या बहुत ही ज्यादा सौम्यता लिए हुए व्यक्त के जा सकेगी. मैंने शब्द चयन गलत किया होगा. लेकिन मेरी भावना गलत नहीं है. आप अगर मेरी बेईज्ज़ती करते हैं तो आप को स्वाभाविक रूप से उसकी प्रतिक्रिया के लिए भी तैयार रहना चाहिए. और अगर ऐसा न कर सके तो कृपया अपना मुंह बंद रखें, आपकी अति कृपा होगी.

Rishi Badola said...

Ha ha ha.... sahi kaha sir aapne ekdum sahi..... per aap ye bhi jantey hai ki ye bharat hai jahan kuch bhi sambhav hai... 200 saal ke angrezon ke raaj se 63 saal ke netaoun ke raaz tak aab kafi kuch badal gaya hai, aapney ek baar kaha tha hum idea kaal may jee rahe hai , Lalit Modi idea se arab pati ban gaye , sath may saabhi company malik or IPL ke barati IPL ki shaadi ka khana kha gaye. Ab kuch nahi ho skata public ko koi parwah nahi, unhe kuch fark nahi padta. wah wah maza aa gaya ,
Namastay

ravish said...

रवीश जी माफी चाहूंगा इस पोस्ट में पहले वाले पोस्ट का कमेंट कर रहा हूं। क्योंकि आपकी इस पोस्ट की मुझे जानकारी जरा देर से मिली। आप ने कहा कि फिक्सिंग की बात आने के बाद भी बेहया दर्शक मैच देखने गए। लगता है कि आप का संविधान में विश्वास नहीं है। मैं कहूंगा कि चुनाव में सभी चोटृटे, बलात्कारी, डाकू और अपराधी जीतते हैं। आप के हिसाब से तो फिर वोट ही डालने नहीं जाना चाहिए। मैं कहूंगा कि टीवी की आधा से अधिक खबरे प्रायोजित होती हैं और उस पर आप ही के साथी भडैती करते फिरते हैं तो फिर आदमी को समाचार भी देखना बंद कर देना चाहिए। ऐसा नहीं है। हां ठीक है कि आईपीएल में घपले हुए लेकिन आईपीएल बंद कर देना चाहिए यह हल नहीं है। आप क्यों नहीं आवाज उठाते शरद पवार के खिलाफ। आप खुलासा कीजिए कि ललित मोदी ने कितना पैसा बनाया। आप नहीं कर सकते। आपका चैनल भी आईपीएल सीधे दक्षिण अफ्रीका से दिखा रहा था। आप कहां थे। आप ने पूछा न क्या मिला आईपीएल से। सौरभ तिवारी को कौना जानता था। आज आप भी उसके गुण गा रहे हैं। रायडू गायब हो गया था वापस आ गया। उथप्पा क्यों नहीं आज हर आदमी पूछ रहा है। यह है आईपीएल की देन। बाॅस चीज खराब हो जाने पर उसे छोडा नहीं जाता। जैसे आप ने बिहार छोडकर दिल्ली का दामन पकड लिया। अब आप केवल महुआ चैनल पर बिहार को देखकर याद करते हैं और कहते अम्मा भी तारीफ करती है। दम है तो वापस लौटिए अपने प्रदेश और वहां के लिए कुछ कीजिए। रोज शाम को दारू पीकर लेक्चर देना बहूुत आसान है। और हां एक बात और कहूंगा। जिस पैसे से आप दारू पीते हैं वह भी चैनल की कमाई है और आप को पता है कि चैनल पैसा कहां से कमाता है। तो बंधु लेक्चर ने दें और केवल जय चैनलाय नमा का जाम करें।

amitvikram said...

Awesome comment by you boss. I also suggest to send reporters like Ravish Ji(dont know why this Ji is added with his idiotic name) to the worst cell of Tihar Central Jail for regularly shouting in an abusive manner against all indian cricket fans such as you and me... Simply the Great...