लघु प्रेम कथा-लप्रेक

1) स्पाइडरमैन की तरह मेट्रो पर सवार जब वह आनंद विहार उतरा तो मर्दानापन दुरुस्त करने के डाक्टरों के दावों से घिर गया। वहां से नज़र हटी से मशहूर चाट की दुकानों से होती हुई की रिंग,छोले,तरह तरह के मोजों के बीच से टर्न लेती हुई उस आटो स्डैंट पर टिकी जहां वो आई तो सही समय पर लेकिन दुप्पटे का नकाब उतारना भूल गई। उस वक्त आटो से ऐसी कई नकाबपोश लड़कियां उतरीं थीं। बाइक सवारों की पिछली सीट पर भी ऐसी ही लड़किया गुज़री थीं। शिखर और राजश्री गुटखा की लड़ियों से बचते हुए आनंद विहार की आवाजाही में उसकी चिल्लाहट खो गई। कोई सुन ही नहीं रहा था। सब कानों में ईयर पीस ठूंसे सीढ़िया चढ़े जा रहे थे। यहां सब एक दूसरे से पराये हैं। बुदबुदाते हुए जब उसने मोबाइल का कॉल बटन दबाया तो एक जैसे कई रिंग टोन बजने लगे। एक जैसे दुपट्टे, कालर ट्यून और ईयर पीस के दौर में हमारा इश्क भी आनंद विहार जैसा है। अराजक चौराहा।

2)मेट्रो ने अचानक उनकी गली को बदल दिया। अनजाने लोग आने जाने लगे। दोनों ने दस बाई दस के कमरे के ख्वाब को दुकान में बदल दिया। खुद महफूज़ जगह की तलाश में मेट्रो से दिल्ली घूमने लगे। वो लेडिज़ कूपे में बंद हो गई और ये जेन्ट्स कूपे में। उनका सफर ऐसे बंट गया जैसे खाप आ गया हो। उसकी शिकायतें बढ़ने लगीं। जब कहीं पहुंचकर उतरने के बाद ही मिलना हो तो फिर सफर का झंझट क्यों? यही तो तुम नहीं समझती हो। कुछ तो हो जीवन में कि तुमसे मिलने की बेकरारी बढ़ती जाए। भोजला पहाड़ी की ऊंचाई से भी चितली कबर के चौराहे की भीड़ में तुमको पहचानने लगा था। बात सफर की नहीं है,बात अनजाने रास्तों पर सफर की है। इश्क़ में अजनबी न रहे तो इश्क नहीं रहता। )

12 comments:

Unknown said...

aja ke ise time me hamre pass apnp ke liye he time he nahi to girl fr8 to bade ki bath hai

ब्लॉग बुलेटिन said...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - दो पटरी पे दौडी रेल ..देखो पोस्ट की ठेलमठेल

Madhav Mishra said...

kantaap, kya baat hai. waah waah. kahiye hindi prem lekhni mein jo baat hai wo bas nahin aa paati hai angrezi mein. khush kar diya sarkaar

Pratyaksha said...

:-)

astitva said...

Laprek- love in delhi!!!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):)

KETANKUMAR said...

can u make it avilabel in marathi........????

KETANKUMAR said...

can i make one poem on this article in marathi??????????????????:-)

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...
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Unknown said...

रविश, आज कल आप की कुछ कमी सी हे NDTV-हिंदी चानेल में! क्या हुआ कहीं NDTV से नाराज़ तो नहीं हैं न ! चनेल से छुटी ली है तो कोई बात नहीं अन्यथा अपने दर्शको को किसी माध्यम से अवगत करा दिया करें!
इसी आग और इमानदारी से रिपोर्टिंग करते रहें !

- अजय सिंह
न्यू हम्प्शायर, USA

Parveen said...

सुंदर और व्यक्तिगत!