चांद तुम एक कर्मचारी हो.....

दफ्तर है आसमान, चांद तुम एक कर्मचारी हो।
पंद्रह दिनों तक कंटते छटते घटते रह जाते हो।
बाद पंद्रह दिनों के कृष्ण पक्ष में खो जाते हो ।
नौकरी के पहले दिन जैसे पूनम हो जाते हो।
वेतन के दिन जैसे चांदनी बिखराते निकलते हो।
चांद तुम एक कर्मचारी हो.....

13 comments:

suchak said...

Arjun k bad ab CHAND ki bari aayi hai !!
hello chand , ab tumhari class lagane vali hai, be prepare !
ha ha aha :))

RAJESH KUMAR said...

SIR JEE
CHAND SIRF KARMCHARI NAHI ,KABHI NAHI RETIRE HONE WALA SARKARI KARAMCHARI HAI......
BIHAR ME EK KAHAVAT HAI...
NAUKARI KARO SARKARI ,NAHI TO BECHO TARKARI...

RAJESH KUMAR said...

SIR JEE
EK CHHOTA SA SAWAL??
CHUNAV PRACHAR KE PRAVDHAN KO KYU NAHI KHATM KAR DIYA JANA CHAHIYE??
POLITICIANS APANE POLICY AUR PROGRAMMES KA PRACHAR ANWARAT RUP SE 365 DIN KYU NAHI KARTE...ISASE PART TIME POLITICS SE NIJAT MILEGA..AUR SAM PITRODA KI JATI KA PATA BAHUT PAHALE SE LOGO KO RAHEGA.....

SUMIT PARASHAR said...

Hamara chand bda khush nasib h, comptition nahi sehna padta, jaisa b chahe kaam kr skta h, warna dosre planets k chand to comptition m naukri krte h,

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, क्या तुलना की है...बचपन में माँ का चाँद कहना सत्य हो गया..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:) न जाने कितने बरसों से कर्मचारी बना हुआ है और हमेशा बना ही रहेगा ॥

काजल कुमार Kajal Kumar said...

Udan Tashtari said...

प्राईवेट नौकरी वाला कर्मचारी है मगर नौकरी है कि चलती जा रही है...

Praveen Kumar said...

chand tum kabhi tum mama ho, kabhi tum eid key ho, kabi karwa chaut key, chand tum mere pyar ki chandni ho, grahan mey chand tum abhishaap ho, chand tum ...yaar phir bhi mere bacchey key mama ho, kyon ki chandini mere biwi hai, chand tum mere sasuraal ho, .. ravish ji ..how is my try?

nptHeer said...

Warkoholic's menifesto regarding cosmic election:) people can impliment their job n duty on moon also.how creative but negetively.think good.good will happen with you.good luck.:)

JC said...

चाँद को हिंदी / संस्कृत में 'इंदु' कहते हैं... और प्राचीन काल से ही 'भारत' में तिथि आदि चन्द्रमा के चक्र के आधार पर ही 'हिन्दू' द्वारा निर्धारित की जाती आ रही है, प्रकाश और शक्ति के मुख्य स्रोत सूर्य (बॉस!) के चक्र के भीतर ही, जिसमें वर्ष के बारह माह में हर माह के दौरान सूर्य प्रति वर्ष उसी श्रंखला बद्ध रूप से १२ भिन्न भिन्न तारा मंडलों में से एक के भीतर अतिथि समान समय व्यतीत करता प्रतीत होता है... और हिन्दू इंदु को उच्चतम स्थान देते आ रहे हैं, अर्थात असली बॉस :)...

दीपिका रानी said...

वेतन वाले दिन चांद पूरे शबाब पर होता है :-)

akhilesh said...

funny