कोसी ढूंढ रही है सबको

( दोस्तों,सहरसा,सुपौल और मधेपुरा से लौट आया हूं । मेरा अब भी मानना है कि बाढ़ प्राकृतिक नहीं है। ऐसे तर्को से सावधान रहने की ज़रूरत है कि कोई भी सरकार इतनी बड़ी तबाही में क्या कर सकती है। इस तर्क से दोषियों को चेहरा छुपाने के लिए पर्दा मिल जाता है। नितांत भाग्यवादी तर्कों से बचा जाना चाहिए। भ्रष्ट लोगों की वजह से बाढ़ आई है। इसलिए इस आपदा में कारण बड़ी खबर है राहत नहीं। मानवीय खबरें बड़ी खबर नहीं है न ही बचाव में लगे किसी नायक की खोज। बल्कि बड़ी ख़बर सिर्फ यही है कि जिनकी वजह से बाढ़ आई वो कहां हैं। मुझे जो कुछ भी दिखा, लगा मैं यहां आपके सामने रखूंगा। यह मेरा पहला लेख है।)


माइक और कैमरा बंद कर दिया है। अब आप सच बताइये। कहते ही कुशहा में तैनात इंजीनियर के चेहरे पर भय की रेखाएं निकल आईं। सच। हां,कैमरे पर कही गई बहुत बातें पर्दे में ही होती हैं। मैं ये अपने लिए जानना चाहता हूं। किसी को बताने के लिए नहीं। आपके बाल बच्चे होंगे। घर होगा। ईमान भी होगा। बता दीजिए कि कुशहा में जहां आप तटबंध का कटाव रोक रहे हैं वो काम पंद्रह दिन पहले हो सकता था या नहीं। इंजीनियर अब सच बोलना चाहता था। मुझे अकेले में ले गया। पत्रकार साहब,लोगों के शरीर में कीड़े पड़ेंगे। यहां जब हम आए तो लगा ही नहीं कि कुछ भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा था। अगर बचाये जाने की कोशिश होती तो बचाया जा सकता था। कोई बड़ी बात नहीं थी। विभाग और सरकार से पाप हुआ है। लेकिन मेरा नाम मत छापियेगा। मेरी नौकरी चली जाएगी। मैं तो चौबीस तारीख के बाद पटना से आया हूं। मेरा कोई कसूर नहीं है। वो सच बोल चुका था। लेकिन बोलने के बाद भी उसका मन हल्का नहीं हुआ। क्योंकि उसके ठीक सामने से कोशी पूर्वी किनारे को तोड़ उन अधिकारियों,नेताओं और ठेकेदारों को ढूंढने पूर्णिया,सहरसा,अररिया,मधेपुरा,सुपौल तक जा चुकी थी। वो खेतो में,सड़कों पर,गांवों में,घरों की छत पर,हर तरफ ढूंढ रही थी।

कोसी का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। वो उस समाज को भी ढूंढने लगी जिसने ऐसी चोर व्यवस्था चुनी है। उस मतदाता को भी ढूंढने लगी जो भ्रष्ट राजनेता चुनती है,उस नागरिक को भी ढूंढने लगी जिसके बेखबर होने से अफसरशाही भ्रष्ट होती है। कोसी इन्हीं को लोगों को ढूंढते ढूंढते बर्बादी ला रही थी। कोसी ने चालीस पचास निकम्मे और चोर नेताओं और अफसरों की सजा उन लाखों लोगों को भी दी है जिनकी एक उंगली इन्हें चुनती है। कोशी को समाज की सड़न या उसकी मजबूरियों से मतलब नहीं था। वो इन मजबूरियों को तटबंध से निकल कर ढहा देना चाह रही है। कोशी ने लाखों मासूम लोगों को मासूम बने रहने की सज़ा दी है। इंजीनियर सच बोलकर भी हल्का नहीं हुआ तो सिर्फ इसीलिए क्योंकि वह कोसी के इरादे को जान गया था।

बिहार सरकार और नीतीश कुमार रात दिन झूठ बोल रहे हैं। चेहरा गंभीर होता है लेकिन झूठ बोलते हैं। वे बाढ़ और राहत कार्य में व्यस्त होने के बहाने कारण पर बात नहीं करना चाहते। वे जानते हैं कि कारण पर चर्चा की तो गर्दन उनकी भी फंस जाएगी और कोशी ने जिन लाखों लोगों को उजाड़ा है वे कोसी का गुस्सा नीतीश कुमार पर उतार देंगे। हर मुख्यमंत्री राहत काम में व्यस्त होता है लेकिन किसकी वजह से टूटा ये क्या वो चार साल बाद बतायेगा। १७ अगस्त को कोसी प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर का तबादला किया जाता है। चीफ इंजीनियर एक बड़ा अफसर होता है। इसकी तैनाती या तबादला बिना मुख्यमंत्री की जानकारी या दस्तखत के नहीं होता। अगर जलसंसाधन मंत्री की कलम से भी होता है तो साफ हो जाता है कि बिजेंद्र यादव एक रुटीन तबादले में व्यस्त थे। वैसे चीफ इंजीनियर के तबादले की फाइल कैबिनेट में जाती है और मुख्यमंत्री मंजूरी देते हैं। ध्यान रहे कि चीफ इंजीनियर को किसी लापरवाही के चलते नहीं हटाया गया था बल्कि कोई और कारण रहे होंगे। साफ है कि किसी को मालूम नहीं था।

मालूम इसलिए नहीं था क्योंकि जिस जगह पर तटबंध टूटा है वहां जाकर साफ हो गया कि आने जाने का रास्ता ही नहीं है। जंगल देखकर और बुरी तरह से टूटे रास्ते से पता चल गया कि यहां कोई आया ही नहीं होगा। रास्ते की हालत बता रही थी कि यहां किसी भी प्रयास से युद्ध स्तर के प्रयास हो ही नहीं सकते थे।

किसी ने पूछा है कि निराशाजनक कहानी के बीच में कोई तो होगा जो अच्छा काम कर रहा होगा। ऐसे बहुत लोग है। लेकिन ये बाद की कहानी है। उनके अच्छा काम करने से से बाढ़ ग्रस्त इलाके की हकीकत में कोई बदलाव नहीं होता। जो अपने घरों में बैठे टीवी देख रहे हैं उन्हें शायद पोज़िटीव स्टोरी से राहत मिले लेकिन क्या जिनके घर उजड़ गए हैं उन्हें ह्यूमन या मानवीय या सकारात्मक स्टोरी से राहत मिलेगी। और इस जानकारी का क्या महत्व है। इस पर बहस अगले लेख में करूंगा।

मेरी राय में कोसी को पटना तक आना चाहिए। इस सड़े हुए प्रदेश को सिरे से उजाड़ देना चाहिए। किसी को बिहार की ऐसी छवि से परेशानी हो सकती है लेकिन कोसी जानती है कि बिहार को एक दिन नई छवि बनानी होगी तब तक के लिए वो तटबंधों को तोड़ ऐसे भ्रष्ट समाज और सरकार को ढूंढने के लिए तबाही लाती रहेगी।

30 comments:

Pramod Singh said...

लिखिए, लिखिए. सब लिख डालिए. ईश्‍वर अगर कहीं हो तो पहुंचा ही दे कोशी को पटना..

अनिल रघुराज said...

तटबंधों को तोड़ते हुए सिलसिला आगे बढ़ाते रहें। मौके से लौटकर आए हैं तो जो जानकारियों आपके पास होंगी, वे किसी और से नहीं मिल सकतीं।
रवीश, शायद यही इस माध्यम की ताकत है जो हम चैनल पर नहीं दिखा सकते, यहां खुलकर बता सकते हैं।

रंजन said...

देश द्रोह का मुकदमा चलना चाहिये..

सुशील कुमार छौक्कर said...

रवीश यही सच है कि कोसी ने लोगो को नही उजाड़ा। लोगो को उजाड़ा कुछ गिनती के भ्रष्ट नेताओ, अफसरों ने। जिनके स्वार्थ, काम चोरी की सजा इन मासूम लोगो को मिली जो इस आपदा में उजड़ गए।

Rajesh Roshan said...

कोशी ने मासूम लोगों को मासूम बने रहने की सजा दी है। Crux of the post...

टीवी पर चल रहे फुटेज, अखबारों में छपी तस्‍वीरें, गूगल पर कोशी सर्च करने के बाद जो तस्‍वीरें और खबरें मिलती हैं उसके मर्म को समझने के बाद अंदर की मासूम आत्‍मा तांडव करने लगती है. क्‍या किसी ने देखा कि बाढ़ग्रस्‍त जिलों के सांसद और विधायक क्‍या कर रहे थे? प्रसाशन और नेताओं से पहले हमें बदलना होगा.

Himwant said...

जल संशाधन हमारे लिए वरदान है, लेकिन आज यह अभिशाप बना हुआ है । कौन है दोषी इसके लिए ? जब भी जल संशाधनो के व्यवस्थापन की बात चलती है, नेपाल के छद्म राष्ट्रवादी और भारत मे मेघा पाटकर सरीखे लोग विरोध शुरु कर देते है । भारत में अटल जी के समय बाढ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए नदीयों को जोडने की बात चली थी तो मेघा पाटकर नेपाल पहुंच गई और लोगो को भारत की योजना के विरुद्ध भडकाने लगी । नेपाल मे भारत जब भी तटबन्ध निर्माण या मरम्मत की कोशिश करता है तो नेपाल मे भारत विरोधी ईसे नेपाल की राष्ट्रिय अस्मिता से जोड कर अंनर्गल दुष्प्रचार शुरु कर देते है ।

नेपाल मे भारत द्वारा तटबन्ध के मरम्मत मे अडचन एवम असहयोग भी प्रमुख कारक रहा है तराई की इस त्रासदी के लिए । नेपाल मे तटबन्धो मे पत्थरो को बांधने वाले गैबिन वायर (तार) तक चुरा लिए गए थे । नेपाल सरकार तटबन्धो की सुरक्षा के प्रति गम्भीर नही थी । तटबन्ध के टुटने के कई कारणो मे पत्थरो को बांधने वाले तारो की चोरी भी प्रमुख कारण है ।

जो भी हो, कोशी के इस कहर से सब को सबक लेना जरुरी है । भारत और नेपाल के बीच जल सन्धि को मजबुत किया जाना चाहिए । जल संशाधनो के विकास मे अविश्वास के वातावरण को समाप्त किया जाना चाहिए । नेपाल के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री प्रचण्ड ने बिना सोचे समझे कोशी नदी के सम्झौते को एतिहासिक भुल तक कह डाला, एसे बयानो से अविश्वास बढेगा यो दोनो देशो के लिए प्रत्युपादक है ।

काठमांडौ मे भारत के राजदुत हर महिने नेपाल के प्रधानमंत्री से मिलते थे, लेकिन कोशी के तटबन्ध की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता मे नही होती थी । वे तो महारानी सोनिया को खुश करने के लिए प्रधानमंत्री को ईस बात के लिए मनाते है की हिन्दु राष्ट्र समाप्त कर धर्म निर्पेक्ष बनाया जाए नेपाल को । नेपाल मे भारत के राजनयिको को राजनैतिक गतिविधियो की बजाए जन सरोकार के विषयों मे अधिक ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ।

ravishndtv said...

हिमवंत जी

आप बात को कहां से कहां ले जा रहे हैं। बांध की मरम्मत का काम बिहार सरकार का है। बांध पर जो सड़क है चाहे वो बिहार के हिस्से में हो नेपाल के हिस्से में सब टूटे पड़े हैं। अपने हिस्से के बांध को मरम्मत करने से किसने रोका है। उनकी भी हालत ठीक नहीं है। सोनिया को कौन खुश कर रहा है उससे मतलब नहीं है। सवाल है कि बिहार सरकार ने बवाल क्यों नहीं मचाया।

२६ जुलाई को नीतीश कुमार गए थे बीरपुर। यहां कोशी प्रोजेक्ट का मुख्यालय है। आस पास के ज़िलों के कलेक्टर भी थे। बयान आया कि सब ठीक है। हर साल आने वाली सामान्य बाढ़ से राहत के सभी उपाय कर लिये गए हैं। तो यह बताइये कि जब कोसी ने बांध तोड़ कर असमान्य स्थिति पैदा कर दी तब ये राहत की तैयारी कहां गायब हो गई। एक नाव तक नहीं था ज़िला प्रशासनों के पास। क्या अधिकारी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में झूठ बोल रहे थे। उस बैठक में क्या किसी ने मुख्यमंत्री को बताया था कि तटबंध की मरम्मत की ज़रूरत है। आप २७ जुलाई का हिंदुस्तान पढ़िये। इसमें उसी बैठक के बाद जलसंसाधन मंत्री बिजेंद्र यादव का बयान छपा है कि नवंबर के बाद मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। किस लिए नवंबर का इंतजार हो रहा था। क्या मंत्री को ज़रा भी नहीं बताया गया कि स्थिति खराब है। और मंत्री कहां के हैं। सुपौल ज़िले के हैं। जिसकी सीमा के आगे नेपाल के हिस्से में तटबंध टूटा है। आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्रा का गांव भी इसी इलाके में पड़ता है।

सोनिया गांधी और भारत सरकार पर गुस्सा मत निकालिये। सभी हुक्मरान दोषी है। लेकिन अपराध किया है बिहार सरकार ने। कोसी प्रोजेक्ट के सहरसा मुख्यालय में जाइये। उसके कंट्रोल रूम की हालत देखिये। क्या ये भी नेपाल और भारत सरकार की बेरूखी के कारण जर्जर हालत में हैं। मुख्यालय में एक फैक्स मशीन तक नहीं है। क्या इसके लिए भी नेपाल से संधि मजबूत की जानी चाहिए।

घूसखोर सरकारों की वजह से यह दुर्घटना हुई है। बंदूक को निशाने पर रखिये। हवा में गोली चलाने से क्या होगा। हवा में ही गोली चलाई जा रही थी कि लाखों लोग घर बार सहित उजड़ गए।

Parul said...

aaj se 10 varsh poorv mujjafarpur ke hamarey ek parichit exe.engg ne( jinka imman thoda bahut bacha hua thaa) isi area se tabaadlaa karva liya thaa. AKSAR KAHTEY THE- KI ANYA JAGAHON PE LOOT 100 ME 30 RS HAI PAR IS JAGAH SE JEE GHABRA GAYA HAI..YAHAN KORI LOOT HI LOOT ....

श्रीकांत पाराशर said...

Raveeshji, aapne sahi likha hai aur sachai aapko mili camera tatha mike hatane ke baad. naukarshah kisi bhi sarkaar ke antargat kaam karte hon ve lagbhag saare chor hain. ya to loot men busy rahte hain ya phir apni post bachane men aur promotion men. Neetish Kumar ki bhi saari galati nahihai. is samay to sab rajnetaon ko mil kar kaam karna chahiye. Lalu yaadav ko \bhi lapete men leejiye.

code red films said...

laakho log be ghar-baar ho chuke hain, lekin desh ki ek badi aabadi is chinta main ghool rahi hai ki , is hafte Big Boss ke ghar se kaun nikala jaayega...Bihar main trahi trahi machi hui hai, lekin wahan ke logo ka dard baaki desh ki janta mahsoos hi nahi kar rahi...ya karna nahi chahti,kanni kaat kar nikal jaana chahti hai...Bihar main baadh se log trast hain ye mere liye takleef ki baat hai... par isse zyada main is baat se vichleet hoon ki desh ke baaki logo ki aankh ka paani sookh gaya hai...samvedanheenta ki ye sthithi achchi nahi hai...Gajraj.

संगीता पुरी said...

विभाग और सरकार से पाप हुआ और उसका परिणाम लाखों को भुगतना पड़ा ........भुगतना ही होगा , गैरजिम्मेदार प्रतिनिधि जो चुने जा रहे हैं , वैसी ही गैरजिम्मेदारसरकार बन रही है......... आखिर जनता ही तो उन्हें भेज रही है .......जनता को ही सोंचने की जरूरत है।

Ashok Pande said...

झकझोर देने वाली पोस्ट है रवीश भाई! ... और क्या लिखूं!

Sarvesh said...

इस बार सचमुच नीतीश कुमार सोते हुए पकड़े गये हैं. जिस समय कोशी पर ध्यान देना चाहिये था उस दिन वो लालू से गल थेथरइ कर रहे थे. और ये घटना सोचने पर मजबुर कर देती है कि शायद बिहार की जनता एक से बची तो दुसरे के चंगुल मे फसीं. नीतीश जी को समझना होगा की पटना और नालंदा से बाहर भी बिहार है.
रविश जी इस बार मिडिया का भी रुप देखने को मिला. जो मिडिया बिदेशी तुफानो के बारे १५ दिन पहले से बताते रहती है वो बिहार के प्रलय को गुजर जाने के बाद बताई. बिहार मे १८ से २६ अगस्त तक कोइ मिडिया नहीं पहुच पाई. गढे मे गिरे बचे को बचाने के लिये मिडिया २४x७ कवरेज देता है, देश भर मे पुजा पाठ शुरु करा देता है वो बिहार मे २५ लाख लोगो के फसे हुए लोगो का समाचार भी इमानदारी से नहीं दिखा पाया.
आपका कवरेज लोगो के दिल मे जगह बना पाया है. आपका रिपोर्टिंग से लोगो ने पिड़ितों के दर्द को रु ब रु महशुश किया. बहुतो ने मुझे बताया (बंगलोर मे) कि रविश का रिपोर्ट ने दिल को झकझोर दिया.
-सर्वेश

निखिल आनन्द गिरि said...

आप जैसे लोग रहे तो कोसी दिल्ली तक भी आएगी....आपकी रिपोर्टिंग बढ़िया थी.....ऐसे ही सब अपना काम ढंग से करते तो बाढ़ कभी इतनी खतरनाक नहीं होती....खैर........

parul said...

sir apke in veecharo ko padhkar yha seekne ko milta hein ki kisi gatna kram kaise samjna chaiye

रज़िया "राज़" said...

लेकिन क्या जिनके घर उजड़ गए हैं उन्हें ह्यूमन या मानवीय या सकारात्मक स्टोरी से राहत मिलेगी।
जी हाँ ! आप बिल्कुल सही कहते हैं उन लोगों का क्या जिनके घर उजड गये है?
उन सभी कि बददुआ लगेगी इन दरिंदो को।भगवान उन लोगों के साथ एसा ही करेगा जो लोगों कि जान से खेलते हैं।
रविशजी , दिल से बददुआ निकलती है। सच माने आप ख़बरों की तह तक जाते हैं। सावधान रहिये। इन दरिंदों का क्या भरोसा?
इंजीनियर जब डरके आपको यह बता रहा था बताइये ग़रीब जनता ये सब कहाँ से समजेगी?
फ़िर एलेक्शन आयेगा, फ़िर वही लोग इन ग़रीबों के पास आयेंगे आज़ के "कोशी वासीओं की तरहाँ"एक लाचार मुंह से एक-एक वोट के लिये तरस्ते हुए! क्या तब उन्हें इन ग़रीबों कि दशा याद नहिं आयेगी?
सत्य उज़ागर कर्ने के लिये धन्यवाद

रज़िया "राज़" said...

रविशजी! आपकी पोस्ट की एक कमेन्ट और उसमे छपे आपके जवाब ने फिर इसी पोस्ट पर आनेको मजबूर कर दीया।
एसी कमेन्ट देनेवाले बात को कहाँ से कहाँ ले जाते है? ताक़ि असल बात का वजुद ही मिट जाये।आपके मिडीया के सामने जवाब देते वक़्त भी एसे लोग बात का "रास्ता"बदलकर सच छुपाने की कोशिश करते है।मेरा कहना है कि अरे भाइ आप कोइ भी पार्टि के क्यों न हो! कमसे कम सच का सामना तो करो. और जो सच सामने लाते है उन्हें दबाने से क्या सच्चाइ छिप जायेगी?अगर यही हादसा उअनके साथ हुआ होता तो क्या वे किसको कोसते?

KAUSHAL KISHORE / Kharbhaia / Patna said...

Ravishji
Badh ki vibhishika aur is manaviya trasadi ko saamne lane ke liye badhai.
Baandh ke tootne ki jaanch aniwarya hai, agar ismen Nitish Kumar ki bhi laaparwahi athawa criminal invovement sabit hota hai to kanoonsammat saja jaroor mile.Aisa bhi na ho ki bhootpurva nikkamen aur bhrsta sattadhariyon ke gunah Koshi ki is pralayleela men dhul jaaye.
Lekin mujhe abhi Nitish KUMAR ki neeyat se bharosh nahin utha hai.
Koshi project men paise ki bandarbaant shuriyati daur men hi chal nikali thi.
Late Arvind N. Das ne apni ek Kitab men likha hai ki kaise Lalit Narayan Mishra cut his teeth in Koshi project." he perfected the art of playing politics to make money and making money to play politics. Ham sab logon ko pata hai ki is neta ne bharstrchar ke kitne kirtimaan sthapit kiye aur satta ke shirsh ke karib raha.
Ravishji aapki reporting aur lekh ke liye sadhuwad
Kaushal Kishore/ Kharbhaia/ Patna

Rufi said...

रवीश जी मैंने आपकी कोसी पर की गई लगभग सभी स्टोरी देखी थीं। आपकी रिपोर्टिंग गज़ब की थी। मैं बहुत दिनों से कस्बा पढ़ रही हुं और इसे पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगता है।

anil yadav said...

रवीश जी क्या कोशी मइया पटना के बाद दिल्ली तक नही आ सकती अगर हो सके तो उन्हें दिल्ली तक भी आने का न्यौता जरूर दीजिएगा....

santoshsahi said...

कोसी की बाढ़ निश्चित रुप से व्यवस्था की देन है ,उस व्यवस्था की जो बंद कमरे से इतिहास बदलने का सपना देखती है।नीतीश कुमार जी इसी सपना के देवता है।व्यवस्था बातों से नहीं बदलती इसके लिए सतही ज़मीन पर आना होगा। कोसी के तट से आपने रिपोर्टींग की है विशेष जानकारी आपको होगी।आपकी बेचैनी बताती है कुछ करने की तमन्ना जब मटियामेट हो जाता है तो कलम में ताक़त आ जाती है।पर बागमती ने इस बार तबाही नहीं मचाई तो इसका श्रेय भी सरकार को जाती है ।इस साल सीतामढ़ी,शिवहर ,सोनबरसा के लोगों को
बढ़ में रात नहीं गुजारनी पड़ी।पर कोसी को ही पटना आने का आमंत्रण देकर बागमती ,कमला ,बलान.गंडक को तो नाराज कर ही दिया है,हो सके तो इन सबको एक आणे मार्ग ,विरचंद पटेल मार्ग में आने के लिए मेरी ओर से चुल्हियानेवार (समदरका)बोल दीजिएगा santosh sahi

ahan said...

Kya likha hai Ravish! Par kya bihar ke log hi ekmaatr roop se in karno ke liye zimmedar hain? Koshi agar dhoond rahi hai sabko to bhej dijiye use dilli me, jahan keechad ko dhoney ki sakht zarurat hai. Bhej dijiye usey Mahrashtra me jahan kuchh log hindustan ko baant rahey hain. Pata bata do Orrisa ka, jahan dharm ke naam par kinhi masoomo ki jaan li ja rahi hai. Jammu tak bhi pahuncha do isey. Bangal ko bhi thodi thnadak pahunchni chahiye. Mera aur apna pata bhi de dijiye Koshi ko, kyonki hum bhi is corrupt system ke liye utney hi zimmedar hain.

rahul said...

मैडम रूफी जी काहे हंसिया के ब्याह में खुरपी का गीत गा रही हैं ....बात हो रही बाढ जैसे इतने गंभीर मुद्दे पर और आप उतारू हैं चाटुकारिता पर एनडीटीवी में जुगाड़ लगा रही है क्या... इतनी वाहियात टिप्पणी करके अपने बौद्धकदिवालिये पन का सबूत क्यों दे रही हैं....

rahul said...

भाई अहान ,
कोसी को जम्मू तक पहुँचा कर आपने अपने कट्टरपन का सबूत दे दिया है....कोसी को जम्मू तक ही पहुँचाकर रूक गये....कश्मीर क्यों नही पहुँचाया ....वहाँ आपके चाचा मियां रहते हैं क्या....औऱ थोड़ी दूर पर ही पाकिस्तान भी तो है वहाँ का पता क्यों नही बताते....आप भी कबीरा के चेले लगते हो ....मारो दोनो सालो को.....

neelima sukhija arora said...

रवीश जी, बहुत दिनों से आपके ब्लाग पर मैं कोसी की रिपोर्टिंग का इंतजार कर रही थी, टीवी पर तो देख ही रहे थे हम लोग। वाकई बिहार में दिल दहला देने वाला मंजर था। भ्रष्ट सरकारों का परिणाम आम आदमी को ही भुगतना पड़ता है। ऐसे मंत्रियों और अफसरों की अकर्मण्यता का परिणाम आज बिहार है। अभी बाढ़ के पानी उतरने और फिर महामािरयों से लड़ने जैसे अजगर तो अभी भी मुंह बाये खड़े हैं।

ahan said...

Rahul, lagta hai aapney hamara comment sirf padha, usko samjha nahi. Lagta hai aap mansik roop se thode sankeern hai. Bhai sahab ismey kattarpana kahan se aa gaya? kisi bhi baat ko koi bhav hota hai aur aap jaise sankeern vichardhara wale log usko sangh ke mansikta se soch saktey hain. Aap jaise log mouka dhhondtey hai kisi cheez ko tukdo me batney ke liye. Baat hum sirf apney system ki kar rahe they aur aap pakistan pahucnh gaye. Baat yahan hindustaniyo ki ho rahi hai naki kisi dharm ki. par kya karey hum, hamarey desh ka durbhagya ye hai ke yahan par bhi aap jaise kuchh bidhhijivi log wahan tak soch hi nahi patey. wo dhoondtey hai koi mouka apney aapka ahsaas dilaney ke liye. Humney to apna pata bhi dene ke liye kaha tha, kyon ki hum bhi maantey hai ke kahin na kahin hum bhi zimmedar hai is system ke liye aur is tabahi ke liye.

SAROKAR said...

कोसी कि माया से लोग बने करोडपति
कोसी कि महाप्रलय से लोगों को तडपते देखा बहुत गुस्सा आ रहा था। कभी सरकार को तो कभी उन बाबुओ को कोश रहा था जो इसके लिए जिम्मेदार थे।
सबसे अघिक गुस्सा उन बाबुओ पर आ रहा था जो कोसी बराज (भीमनगर,सुपौल) में पदस्थापित होने के 1 या 2 साल बाद लखपति व करोडपति
हो जाते है।
ऐसे ही हमारे पडोस में एक चाचा रहते है जो कि मेरे ही विरादरी के है। किसी जमाने में वो भी कोसी बराज में बतौर सुपरवाइजर के तौर पर पदस्थापित थे वेतन हुआ करता था मात्र 6000 प्रति मास।
रिटायर किए हुए उनको कइ साल हो चुके है आज स्थिती यह है कि उनका एकाउंट देश के प्रत्येक बैंक में है और प्रत्येक मास उनकी जमा रकम 5-10 लाख तो कहीं 10-20 लाख होती जा रहा है।
सरकार को चाहिए कि उन तमाम सरकारी बाबुओ के एकाउंट की जांच करे जो कोसी बराज बनने के बाद (भीमनगर,सुपौल) में पदस्थापित रहे हैं।
मेरा मानना है की दूघ का दूघ और पानी का पानी सब सामने आ जाऐगा।

latikesh said...

ravish ji,
aap ko nahi lagta kee sirf samyasha batane se sara kuch hal ho jayega . aaj ka yuva sirf apna swarth dekh raha hai . jab tak rajniti mai yuva nahi aayege bhasha aur dharm ke naam yahi hot rahega .

latikesh
mumbai

kumar Dheeraj said...

लोकतंत्र से हमेंशा देश को उम्मीदे रही है । हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । जाहिर है कि जनता का विश्वास लोकतंत्र से जुड़ा रहा है । जनता के वोटो से जीते गए उम्मीदवार के दिल में भी यही रहता है कि जनता हमसे नाराज न हो इसलिए वे ऐसा कोई काम नही करना चाहते है जिससे जनता का दिल या कोई खास वगॆ उस दल या पाटीॆ से टूटे । लोकतंत्र में प्रजा यानी जनता की तमाम उम्मीदो का ख्याल रखा जाता है । लेकिन राज्यतंत्र से इस तरह की उम्मीद नही की जा सकती है । न्याय करना और जनता को उचित न्याय दिलाना राज्यतंत्र का काम होता है । अगर ऐसा नही होगा तो देश नही चल सकता है ।
जनता को भी ऐसी उम्मीदे रहती है कि राजा उसके साथ औऱ राज्य की नीतियो के साथ भेदभाव न करे या सरकार एकपक्षीय न हो । लेकिन कांग्रेस सरकार इस समय देश में जो कर रही है उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि सरकार वोट बैंक से ज्यादा कुछ नही सोच नही पा रही है या सरकार में अल्पसंख्यक या इससे अधिक सोचने की दमखम रखती ही नही है । आतंकवाद के मसले पर सरकार ने जो अपनी रणनीति दिखाई उससे यह नही कहा जा सकता है कि सरकार ने पूरे तंत्र को पंगु बना दिया है । दिल्ली में बम धमाके हुए लेकिन सरकार ने क्या किया । सरकार ने आतंकबादियो को पकड़ने के नाम पर जनता के साथ ठगी किया । शायद उसे लग रहा है कि आतंकवादियो को गिरफ्तार करने से उनका मुसलिम वोट खिसक जाएगा । यही माना जाए कि सरकार अल्पसंख्यको के वोट को पाने के लिए पूरे देश को खौफ और दहशत में जीने के लिए छोड़ देना चाहती है । सरकार ने दहशतगदो को पकड़ने कि लिए कोई कदम नही उठाए । अगर दिल्ली में कुछ आतंकवादियो को पकड़ने में सफलता मिली है तो उसका कारण भी गुजरात सरकार है जो अहम सुराग देकर आतंकवादियो के बारे में अहम सुराग दिए जिसके कारण कुछ गिरफ्तारियां हुई । उसको अगर अलग मानकर देखा जाए तो सरकार आतंकवाद के नाम पर उदासीन रही है ।
सरकार यह सोचती है कि इससे उसे अल्पसंख्यको वोट मिल जाएगा । लेकिन कितना बड़ा नुकसान देश को है सरकार नही सोच रही है । सरकार के इस व्यवहार से हमारा देश दो हिस्सो में बंट रहा है । जिसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है ।

kumar Dheeraj said...

लोकतंत्र से हमेंशा देश को उम्मीदे रही है । हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । जाहिर है कि जनता का विश्वास लोकतंत्र से जुड़ा रहा है । जनता के वोटो से जीते गए उम्मीदवार के दिल में भी यही रहता है कि जनता हमसे नाराज न हो इसलिए वे ऐसा कोई काम नही करना चाहते है जिससे जनता का दिल या कोई खास वगॆ उस दल या पाटीॆ से टूटे । लोकतंत्र में प्रजा यानी जनता की तमाम उम्मीदो का ख्याल रखा जाता है । लेकिन राज्यतंत्र से इस तरह की उम्मीद नही की जा सकती है । न्याय करना और जनता को उचित न्याय दिलाना राज्यतंत्र का काम होता है । अगर ऐसा नही होगा तो देश नही चल सकता है ।
जनता को भी ऐसी उम्मीदे रहती है कि राजा उसके साथ औऱ राज्य की नीतियो के साथ भेदभाव न करे या सरकार एकपक्षीय न हो । लेकिन कांग्रेस सरकार इस समय देश में जो कर रही है उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि सरकार वोट बैंक से ज्यादा कुछ नही सोच नही पा रही है या सरकार में अल्पसंख्यक या इससे अधिक सोचने की दमखम रखती ही नही है । आतंकवाद के मसले पर सरकार ने जो अपनी रणनीति दिखाई उससे यह नही कहा जा सकता है कि सरकार ने पूरे तंत्र को पंगु बना दिया है । दिल्ली में बम धमाके हुए लेकिन सरकार ने क्या किया । सरकार ने आतंकबादियो को पकड़ने के नाम पर जनता के साथ ठगी किया । शायद उसे लग रहा है कि आतंकवादियो को गिरफ्तार करने से उनका मुसलिम वोट खिसक जाएगा । यही माना जाए कि सरकार अल्पसंख्यको के वोट को पाने के लिए पूरे देश को खौफ और दहशत में जीने के लिए छोड़ देना चाहती है । सरकार ने दहशतगदो को पकड़ने कि लिए कोई कदम नही उठाए । अगर दिल्ली में कुछ आतंकवादियो को पकड़ने में सफलता मिली है तो उसका कारण भी गुजरात सरकार है जो अहम सुराग देकर आतंकवादियो के बारे में अहम सुराग दिए जिसके कारण कुछ गिरफ्तारियां हुई । उसको अगर अलग मानकर देखा जाए तो सरकार आतंकवाद के नाम पर उदासीन रही है ।
सरकार यह सोचती है कि इससे उसे अल्पसंख्यको वोट मिल जाएगा । लेकिन कितना बड़ा नुकसान देश को है सरकार नही सोच रही है । सरकार के इस व्यवहार से हमारा देश दो हिस्सो में बंट रहा है । जिसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है ।