प्रतिभा पाटिल होने का मतलब

मैंने पहले भी प्रतिभा पाटिल पर लिखा है। जिसमें उनके रबर स्टांप होने जैसी बात कही है। मैं इस राय के साथ कुछ और कहना चाहता हूं। सवाल खुद से भी है और आप सबसे भी।

लोगों ने कहा प्रतिभा को नहीं जानते। किसने कहा कि हम नहीं जानते? दिल्ली की मीडिया ने। जो राष्ट्रीय होने के कारण अपनी सीमित जानकारी को पूरे देश पर थोप देती है। प्रतिभा पाटिल १९६२ से विधायक हैं। महाराष्ट्र में पांच बार मंत्री और प्रतिपक्ष की नेता और कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं। क्या यह मुमकिन है कि करोड़ों की आबादी वाले महाराष्ट्र में कोई प्रतिभा पाटिल को नहीं जानता होगा। राजस्थान की राज्यपाल होने के कारण होली दीवाली पर तो उनका संदेश छपता ही होगा तो क्या राजस्थान की करोड़ों जनता वाकई प्रतिभा पाटिल को नहीं जानती होगी। महाराष्ट्र और राजस्थान की आबादी भारत की आबादी का कम से कम दस प्रतिशत होनी चाहिए। सौ में दस आदमी प्रतिभा पाटिल को जानता होगा लेकिन मेरे सहित दिल्ली की मीडिया ने कहा कि प्रतिभा पाटिल को कोई नहीं जानता।

मुझे लगता है प्रतिभा का नाम सिर्फ अचानक ही आया। इसका मतलब नहीं कि वो गुमनाम हैं। यह हमारी अज्ञानता है कि हम राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल के बारे कम जानते हैं। वो भी तब जब वो मौजूदा समय में देशभर में अकेली महिला राज्यपाल हैं। दिल्ली मीडिया के किसी संपादक संवाददाता को क्या पता था कि उन्होंने बतौर राज्यपाल किस तरह की भूमिका अदा की है। क्या इसके प्रमाण मिल गए हैं कि राजस्थान में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के रबर स्टैंप के रूप में काम किया है? मीडिया न सही बीजेपी तो बता ही सकती है।
हम अपनी अज्ञानता को कैसे राष्ट्र का मत बना देते हैं।

दूसरी अहम बात ये हैं कि प्रतिभा पाटिल के चुने जाने से वो लोग संतोष कर सकते हैं जो चुपचाप काम करने में यकीन रखते हैं। मीडिया में कई नाम चले। तो क्या हताशा इस बात की है कि वो इस पद पर नहीं पहुंचा जो नामवर था? क्या प्रचार होने से प्रतिभा तय होती है या काम करने की निरंतरता और बिना प्रचार से प्रतिभा तय होती है। शिवराज पाटिल कौन से गुणवान नेता हैं जिनकी चर्चा मीडिया कर रहा था या जिनके न चुने जाने पर निराश हो गया। कर्ण सिंह खुद को सबसे बेहतर उम्मीदवार बता रहे थे। क्या किया है इन्होंने? इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गप्पबाज़ी या फिर कौन सी इनकी सक्रिय भूमिका रही है? क्या वो इसी दम पर कह रहे थे कि मीडिया के कारण लोग उन्हें अच्छी हैसियत का जानते हैं?

इतिहास तय करेगा कि प्रतिभा पाटिल कैसी राष्ट्रपति होती हैं? मगर इतिहास ने एक बात तय किया है। ज़रूरी नहीं कि चर्चित ही चुना जाए कभी कभी सारगर्भित को भी मौका मिलता है। और ऐसी प्रतिभाओं को अचानक ही मौका मिलता है। जैसे कलाम को मिला था। मैं अपनी राय बदलता हूं।

6 comments:

Laxmi N. Gupta said...

मैं आपकी सराहना करता हूँ। आप सही कह रहे हैं कि समय ही बतायेगा कि प्रतिभा पाटिल कैसी राष्ट्रपति बनेंगी।

रंजन said...

मीडिया, पिछले एक महीने से राष्ट्रपति चुन रहा था.. लेकिन वो दुर दुर तक नहीं सोच पाया प्रतिभा पाटिल के बारे मे...


अच्छा किया भाई आपने राय बदल दी.

Sagar Chand Nahar said...

रवीश जी
प्रतिभा जी के बारे में मुझे भी इतना ही पता था कि वे राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल हैं। पर उन्हें राष्ट्र्पति पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद प्रतिभा जी के बारे में जो कुछ जाना उससे लगता है कि वे देश कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रपति बनने के लिये श्रेष्ठ उम्मीदवार है।
बाकी शिवराज पाटिल में उतनी गंभीरता नहीं दिखती हाँ प्रणव मुखर्जी भी ठीक ही थे पर...... अच्छा है मौका प्रतिभाजी को मिला। :)

जोगलिखी संजय पटेल की said...

प्रतिभा ताई/जीजी के मनोनयन से सोनियाजी की ताक़त तो बढी़ है साथ ही उन्होने ये भी साबित कर दिया है कि वे चाणक्य-शास्त्र अंग्रेज़ी में रूपांतरित कर ज़रूर पढ़ रहीं हैं ...और हां सोनियाजी के खाते में एक और बात जा रही है कि देश के सर्वोच्च पद पर महिला की उपस्थिति की बात करना और है और उसे अंजाम देना कुछ और बात.महिला समाज में श्रीमती पाटिल के आरूढ होने से निश्चित ही एक सकारात्मक संदेश जाएगा.

सुनील डोगरा ज़ालिम said...

क्षमा चाहूंगा परन्तु पत्रकार हॊकर अगर प्रतिभा पाटिल से अनजान हैं तॊ पत्रकारिता छॊड दें।
शेष क्या कहूं।

Neeraj said...

किस पत्रकार ने कहां छाप दिया या प्रसारित कर दिया ये भी बताएं. कुछ लोगों की यह धारणा हो भी कि श्रीमती पाटिल को कोई नहीं जानता है तो भी दिल्ली और गैरदिल्ली मीडिया के बीच वैचारिक अंतर की धारणा बना लेना उचित नहीं.