हवा महल

15 comments:

Mahendra Singh said...

Jabardast,Maintenance tareef ke kabil hai.

sandeep pandey said...

Waah sir..... raat me dekhne layak hai

DIVYA RANI said...

Really amazing sir, rajputana sanskriti ki shilpkari ke samne modern technology......high speed me daudti ye cars.....

kanshu sinha said...

Sir ek baat kehni hai. Abhi Patna ke ghar me electronic meter laga. Bilkul Delhi ki tarah. Yaha meter ki reading jo pure ghar ki 1 mahine me aayi wo Delhi me 7 din me aati hai wo bhi sirf 1 kamre ki. Mane Delhi me meter me gadbad to hai. Light yaha bhi ab 21 ghante se zyada rahti hai.

RAHUL VAISH said...

raveesh tarun tejpaal per kiyon silent hai un per bhi to blog likhiye na .. kabhi aapne ye bataya hai ki aapka channel congress ka kitna bada supporter hai .. ek central minister ki wife khud ndtv me kaam karti hai.. seedhe saadhe students de journalism ki padai ke naam per 2 lakhs rupees basule jate hai ndtv dwara .. kabhi logon ko andar ki baat bhi batoiye na kiya hum hi sub log media ki poll kholte rahenge

Vikas Gupta said...

बहुत ही खूबसूरत ।

nptHeer said...

हवाई किल्ला?:)
हवाओं का महल(visible form of air)?:)
या फिर
हवाओं के स्वागत का महल?:)

नकली प्रकाश वीरान भव्यता देता है
और सूर्य का प्रकाश खंडहर को भी भव्य बना देता है है न?:)

kunwar singh inda said...

Ye rajputo ki shaan hai

bahar e-jaan said...

ये तस्वीरें आपने खुद ली हैं ??

Aanchal said...

मज़ा तो तब आता है, जब पाजेब/पायल पहनकर पूरे हवामहल में घूमे...छनछन छनछन करते हुए :)

Aanchal said...

मज़ा तो तब आता है, जब पाजेब/पायल पहनकर पूरे हवामहल में घूमे...छनछन छनछन करते हुए :)

sandeep pandey said...

Ye saubhagya to sirf ladkiyon ko mil sakta hai....

pragati sinha said...

sir,ho gya ab kitna jaipur ghumenge??
please come back,aapke bina kya primetime ??

RAHUL VAISH said...

कुँए का मेढ़क बना देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया

देश के महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (महाभ्रष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इसलिए क्यों की उसका उल्लेख मैं अपने पूर्व के ब्लॉग में विस्तारपूर्वक कर चूका हूँ अत: मेरे पूर्व के ब्लॉग का अध्यन जागरणजंक्शन.कॉम पर करे ) के उन न्यूज़ चैनलों को अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए जो न्यूज़ चैनल के नाम के आगे ”इंडिया” या देश का नॉ.१ इत्यादि शब्दों का प्रयोग करते है. क्यों की इन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों का राडार या तो एन.सी.आर. या फिर बीमारू राज्य तक सीमित रहता है. कुए के मेढ़क बने इन न्यूज़ चैनलों को दिल्ली का “दामिनी” केस तो दिख जाता है लेकिन जब नागालैंड में कोई लड़की दिल्ली के “दामनी” जैसी शिकार बनती है तो वह घटना इन न्यूज़ चैनलों को तो दूर, इनके आकाओं को भी नहीं मालूम पड़ पाती. आई.ए.एस. दुर्गा नागपाल की के निलंबन की खबर इनके राडार पड़ इसलिए चढ़ जाती हैं क्यों की वो घटना नोएडा में घटित हो रही है जहाँ इन कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों के दफ्तर है जबकि दुर्गा जैसी किसी महिला अफसर के साथ यदि मणिपुर में नाइंसाफी होती है तो वह बात इनको दूर-दूर तक मालूम नहीं पड़ पाती है कारण साफ़ है की खुद को देश का चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क न्यूज़ चैनलों का कोई संबाददाता आज देश उत्तर-पूर्व इलाकों में मौजूद नहीं है. देश का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिस तरह से न्यूज़ की रिपोर्टिंग करता है उससे तो मालूम पड़ता है की देश के उत्तर-पूर्व राज्यों में कोई घटना ही नहीं होती है. बड़े शर्म की बात है कि जब देश के सिक्किम राज्य में कुछ बर्ष पहले भूकंप आया था तो देश का न्यूज़ चैनल बताने वाले इन कुँए का मेढ़क न्यूज़ चैनलों के संबाददाताओं को सिक्किम पहुचने में २ दिन लग गए. यहाँ तक की गुवहाटी में जब कुछ बर्ष पहले एक लड़की से सरेआम घटना हुई थी तो इन कुँए के मेढक न्यूज़ चैनलों को उस घटना की वाइट के लिए एक लोकल न्यूज़ चैनल के ऊपर निर्भर रहना पड़ा था. इन न्यूज़ चैनलों की दिन भर की ख़बरों में ना तो देश दक्षिण राज्य केरल, तमिलनाडु, लक्ष्यद्वीप और अंडमान की ख़बरें होती है और ना ही उत्तर-पूर्व के राज्यों की. हाँ अगर एन.सी.आर. या बीमारू राज्यों में कोई घटना घटित हो जाती है तो इनका न्यूज़ राडार अवश्य उधर घूमता है. जब देश के उत्तर-पूर्व या दक्षिण राज्यों के भारतीय लोग इनके न्यूज़ चैनलों को देखते होंगे तो इन न्यूज़ चैनलों के द्वारा देश या इंडिया नाम के इस्तेमाल किये जा रहे शब्द पर जरुर दुःख प्रकट करते होंगे. क्यों की देश में कुँए का मेढ़क बने इन न्यूज़ चैनलों को हमारे देश की भौगोलिक सीमायें ही ज्ञात नहीं है तो फिर ये न्यूज़ चैनल क्यों देश या इंडिया जैसे शब्दों का प्रयोग करते है क्यों नहीं खुद को कुँए का मेढक न्यूज़ चैनल घोषित कर लेते आखिर जब ये आलसी बन कर देश बिभिन्न भागों में घटित हो रही घटनाओं को दिखने की जहमत ही नहीं उठाना चाहते. धन्यवाद. राहुल वैश्य ( रैंक अवार्ड विजेता), एम. ए. जनसंचार एवम भारतीय सिविल सेवा के लिए प्रयासरत फेसबुक पर मुझे शामिल करे- vaishr_rahul@yahoo.कॉम और Rahul Vaish Moradabad

DHARMENDRA SINGH LODHI said...

aapke bina kya primetime ?