मिस्र से आ रही तस्वीरों को देख कर ग़ज़ल- तहसीन मुनव्वर

अब तुझ से बेज़ार हैं लोग
ख़ुद अपनी सरकार हैं लोग
अब अनदेखी मत करना
मरने को तय्यार हैं लोग
ज़ालिम रेत का टीला है
लोहे की दीवार हैं लोग
खून है सब की आँखों में
यह न समझ बीमार हैं लोग
अब क्या ख़बरें रोकेगा
अब ख़ुद ही अख़बार हैं लोग
तुझ पर थूक नहीं पायें
कब इतने लाचार हैं लोग
पहले कितने आसां थे
लेकिन अब दुशवार हैं लोग
पहले नींद का ग़लबा था
लेकिन अब बेदार हैं लोग
देख इन्हें हाँ देख ज़रा
हर लम्हा इनकार हैं लोग
तुझ से प्यार नहीं करते
नफरत का इज़हार हैं लोग
तेरा काम ही छीनेंगे
यह जितने बेकार हैं लोग
यह है 'मुनव्वर' की दुनिया
जिसका कुल संसार हैं लोग....

21 comments:

आशीष said...

.PUKKU@GMAIL.COMख़ुद अपनी सरकार हैं लोग
अब अनदेखी मत करना
मरने को तय्यार हैं लोग.

बहुत खूब सर जी ....

संतोष कुमार said...

क्या तस्वीर उकेरी है मिस्र की, वह की जनता अब जाग चुकी है.
अब भारत में ऐसे ही प्रयास करने होगे !

Astro Bharti said...
This comment has been removed by the author.
संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरती से कही अपनी बात

iqbal abhimanyu said...

अपने मुल्क में भी ये सैलाब आये,
बहुत सह चुके अब इन्कलाब आये.

यही तमन्ना है

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01- 02- 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

सम्वेदना के स्वर said...

अब क्या ख़बरें रोकेगा
अब ख़ुद ही अख़बार हैं लोग

ये हुयी न बात,रवीश भाई!

G Maurya said...

ऐसी सामयिक बोध वाली गजल बहुत कम पढ़ने को मिलती है। बहुत खूबसूरत रचना। तहसीन मुनव्‍वर जी की शायरी का फैन हूँ। पत्र पत्रिकाओं में कहीं भी उनकी शायरी पर नजर पड़ती है तो पढे बिना नहीं रहता। बड़े जज्‍बाती शायर हैं मुनव्‍वर साहब।

प्रवीण पाण्डेय said...

सरकारी बोध, आजकल मिश्र की यात्रा पर है।

anil yadav said...

भारत में भी महंगाई और भ्रष्टाचार से बेजार हैं लोग
मन्नू...मैडम भले ही न कुर्सी छोड़ें
तख्त हिलाने को तैयार हैं लोग....
बहुत जानदार........

Parul kanani said...

waah!

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत बढ़िया ....

इस्मत ज़ैदी said...

पहले नींद का ग़लबा था
लेकिन अब बेदार हैं लोग

बहुत ख़ूब !

अरुण चन्द्र रॉय said...

रवीश भाई आपको देखना जितना अच्छा लगता है उतना ही अच्छा लगा आपको पढना... समसामयिक विषय पर सुन्दर ग़ज़ल... जैस्मिन क्रांति नई रौशनी लेके आये...

jainendra said...

dekhte hain kb tk aisa sailab hindustan ke sarakari mehakmo ke khilaph aata hai........

Tehseen said...

ग़ज़ल को पसंद करने के लिए सभी का शुक्रिया...
आपका

तहसीन मुनव्वर

आशुतोष सिंह said...

jitna kaha jaye sayad kam hai

iqbal abhimanyu said...

धोबी घाट की समीक्षा का मन बनाइये, मुझे अच्छी लगी, लेकिन आपका नजरिया जानना चाहता हूँ.

स्वप्निल तिवारी said...

taheseen munavvar jee ki yah ghazal mishr kee tasveeron se kam nahi hain...

Desh Deepak Sachdeva said...

बहुत खूब, बहुत खूब, बहुत खूब,.........

Kavita Krishnapallavi said...

ओ नौजवान, आज का दिन है तुम्‍हारे नाम
उठाओ आवाज़, अब न थकान हो, न गहरी नींद
ये वक्‍़त है तुम्‍हारा, तुम्‍हारी है ये जगह
न्‍योछावर करो हम पर अपना हुनर, अपनी जद्दोजहद
हम चाहते हैं कि मिस्र के नौजवान डटे रहें
हमालावरों और अत्‍याचारियों के हर हमले का मुक़ाबला करें...
- मिस्र के कवि इब्राहीम नाजी (1898-1953)