कस्बा qasba
कहने का मन करता है...
कभी पुतला हुआ महान है ?
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भीड़ आई है दरवाज़े के बाहर बता रही है गंभीर मुझे सरोकार से सने सनकी की तलाश में दहलीज़ पर हिंदी जगत के मेरे कहे पर बेताब है चलने को पूछती हु...
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पटना के अशोक राजपथ से अग्निपथ तक का सफर
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भोर होने में कुछ घंटे बाक़ी रहे होंगे। दरवाज़े के सांकल को चुपचाप लगाकर निकल गया था। गांधी मैदान की तरफ पैदल ही। फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने क...
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त्वरितर के अनुचर- मीडिया बनते शोहरतमंद
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जब बरखा दत्त को साढ़े चार लाख से अधिक और राजदीप सरदेसाई को पौने चार लाख से ज्यादा लोग ट्वीटर पर फॉलो कर रहे हों तो क्या आप इस सवाल से टकराना...
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मूर्तियों में जड़ मत करो विवेकानंद को
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गौरव की मुद्रा में शांत भाव से बाजूबंद किये सामने देखते हुए विवेकानंद की मूर्तियां और तस्वीरों को किसने नहीं देखा होगा। इन मूर्तियों में ढाल...
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कोई तुम्हें हांकता है गधे की तरह
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प्रमोशन की आस में तुम्हारी हड्डियां जर्जर होने लगीं हैं जमीर खंडहर, दिन ख़राब दिल की धमनियों में मौसम नहीं दफ़्तर धड़कता है कोई तुम्हें हांक...
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रामधन एंड मूलधन इन यूपी इलेक्शन पार्ट-२
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रामधन मूलधनवा को खोजते हुए भागे जा रहे थे। ए मूलधनवा चलबे न रे। राहुल भइया पांच साल मांगत हवन। कहत रहलन कि बाईस साल सभन के देनी हमन के तब मि...
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पुराने बरगद से दरकते मुस्लिम नेता
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क्या उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति मुस्लिम मतदाता के प्रति अब तक के बने बनाए सभी नज़रिये को बदलने जा रही है? क्या यह पहला चुनाव होगा जो बाब...
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रामधन एंड मूलधन इन यूपी इलेक्शन
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रामधन पगडंडी पर दौड़े चले आ रहे थे। मूलधन ने रोक लिया तो टोके जाने पर गरमा गये। काहें रे काहें टोक दिया हमको बीच रास्ते में। मूलधन भी गरम हो...
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सैम तुम बैकवर्ड हो
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आपने सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा के बारे में तो सुना ही होगा। तीस सालों से जो भारतीय सत्ता के शिखर तबके में सैम पित्रोदा नाम से जाने जाते है...
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पत्रकारिता का बक्साबंद वक्तावृंद काल
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यह साल स्पीड न्यूज़ और बक्साबंद वक्तावृंद का काल रहा है। अन्ना आंदोलन ने दर्शकों को भी उत्तेजित किया तो स्क्रीन दड़बेनुमा बना दिए गए। बहसें ...
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