कस्‍बा qasba

कहने का मन करता है...

वन रूम सेट का रोमांस- दिल्ली मेरी जान (7)

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अचानक कोई लड़का कमरे में आ जाता था। पहचान तो रे। अरे..मूंछें कहां गई। पीछे से दूसरा लड़का अंदर आता था। पूछो न किसके लिए गई है। बस दरवाज़े पर...
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दोस्त कहां कोई तुम सा....

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हरियाणा की रुचिका गिरहोत्रा मामले का राज़ आज सबको पता नहीं होता अगर अराधना उसकी दोस्त न होती। उन्नीस साल तक अराधना अपनी दोस्त रुचिका के इंसा...
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वन-रूम सेट का रोमांस- दिल्ली मेरी जान (6)

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शहर बड़ा अजीब लगता था। आबादी को पचाने के लिए इसका पेट फैला जा रहा था। बेरसराय के सारे मकान ऊंचे होने लगे। गली-गली में वन रूम सेट के छोटे-छोट...
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कब कटेगी चौरासी- कब पढ़ेंगे आप

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जरनैल सिंह ने चिदंबरम पर जूता फेंक कर सही किया। जूता नही फेंकता तो चौरासी के दंगों की ऐसी भयानक दास्तान किताब की शक्ल में नहीं आ पाती। हर पन...
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पोपुलर प्रेस का आगमन

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यूरोप की १८४८ की क्रांति पर एक किताब पढ़ रहा था। Jonathan Sperber की। इस किताब के एक हिस्से में पत्रकारिता पर भी चर्चा है। कैसे १८४८ की क्रा...
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दिल्ली के आसमान में चांद

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गोल ही अच्छा लगता है चांद भोला सा जैसे निकल आया हो मेरे गांव से दिल्ली के आसमान में बिना बताये बाबूजी और मुखिया जी को आवारा लग रहा था दिल्ली...
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लाइब्रेरी

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वो किताबें आज भी वहीं रखी होंगी एक के ऊपर एक किसी कोने में दबीं होंगी जिनके पन्नों को पलट दिया था तुमने शब्दों में गड़े इतिहास को ज़िंदा करन...
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पा अमिताभ बच्चन की फ़िल्म नहीं है

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न औरो की है। असाधारण बीमारी को साधारण बनाकर यह फिल्म कुछ और हो जाती है। फ़िल्म के छोटे-छोटे किस्से अपनी मूल कहानी से छिटक कर अलग दुनिया रचते...
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बोलना तो है लेकिन कैसे- पुस्तक समीक्षा

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बोलना तो है। यह एक किताब का नाम है। बोलने के तौर-तरीकों को लेकर हिंदी में एक अच्छी किताब आई है। अपने मित्र दुर्गानाथ स्वर्णकार के हवाले से य...
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दैनिक सच कहूं

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दोनों ही तस्वीरें नोएडा के सेक्टर-१२ की हैं। कैविनेट मंत्री वाली तस्वीर डेयरी की दुकान से ली गई है और दैनिक सच कहूं एक अखबार के कार्यालय से।
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