कस्बा qasba
कहने का मन करता है...
बाबूजी का तेरह मार्च
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बाबूजी, क्यों लगता है कि आप जिस दिन गए उसी दिन लौट भी आयेंगे । छह साल से तेरह मार्च को यही लगता रहा है । कुछ दिन पहले आप जिस अस्पताल में आँख...
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धनेश टी स्टाल
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खचाक खचाक खचाक क्लिक क्लिक
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ये तस्वीर मनेसर के पास मंगलवार को ली । गाँव में बचपन में ठीक ऐसे ही खिलौने से खेला है । निरंतरता का कमाल देखिये कि कोई तीस साल बाद ये फिर दि...
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मोदी मतलब बीजेपी बीजेपी मतलब मोदी
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क्या सचमुच बीजेपी कम सीटें आने पर नरेंद्र मोदी को पीछे कर देगी । यह चर्चा मैं तब से सुन रहा हूँ जबसे मोदी ने अपनी दावेदारी की पेशकश की । मोद...
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एक कविता वाया व्हाट्स अप
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सुख का दुःख जिन्दगी में कोई बड़ा सुख नहीं है, इस बात का मुझे बड़ा दु:ख नहीं है, क्योंकि मैं छोटा आदमी हूँ, बड़े सुख आ जाएं घर में तो कोई...
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बारिश की एक रात
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मौसम किसी अजनबी की तरह दस्तक देता है तो डर लगता है । ऐसे लगता है जैसे हमारी सारी आशंकाएँ सच होने वाली हो । ऐसा लगता है जैसे हवाओं के बीच झगड...
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बिहारियत वाया अंग्रेज़ीयत- दास्ताने सिंगल मैन
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"The imposition of emergency had beckoned a new genre of books into the room, studies of Adolf hitler and nazism-William L Shirer's...
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चश्मेवाली और सैंडलवाली
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झटके से लौट आई । फोटो खिंचनी हैं तो खिंच लो । तब तक कैमरा तैयार हो चुका था । पल भर में वो एक ज़िंदादिल तस्वीर में बदल गई । हुआ यूँ कि दिल्ली...
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ठंड रख भाई
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अच्छा तो नहीं हुआ । तथ्यों की अपनी अपनी व्याख्या से सच बड़ा नहीं हो जाता । गुजरात में पुलिस ने औपचारिकता निभाई या अति सक्रियता । जब कोई किसी...
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अण्णा- गांधी से गन्ना तक
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आदरणीय अण्णा, मैं कल्पना करना चाहता हूँ पर कर नहीं पा रहा हूँ । यही कि मोहन दास करमचंद गांधी किसी पार्टी का विज्ञापन कर रहे हैं । कैमरे के स...
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