कस्बा qasba
कहने का मन करता है...
मंदिर या मैनेजमेंट स्कूल
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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर १३ के एक बुक स्टॉल पर यह किताब दिखी। भगवान राम कंपनी चलाने के काम आ सकते हैं सोचा नहीं था। मंदिर ब...
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उदास मनों में झांकता फेसबुक
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भारत में छह करोड़ लोग इंटरनेट के आभासी जगत की नागरिकता ले चुके हैं। आभासी और असली जगत के अंतर और अंतर्विरोध को जीने लगे हैं। आपसी रिश्तों के...
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NDTV का नया वेबपेज
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social.ndtv.com क्लिक कीजिए। आपको कई चेहरे और नाम मिलेंगे जिनके साथ आप उनके कार्यक्रमों के बारे में बात कर सकते हैं। बस आपको करना है-social....
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हिंदी-अंग्रेजी के अख़बारों का किसान अलग क्यों होता है
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अमर उजाला ने क्यों लिखा कि किसानों ने झुका दी सरकार और हिंदुस्तान टाइम्स का हेडर क्यों ऐसा था- BITTER HARVEST,THEY PROTESTED,DRANK,VANDALISE...
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जानलेवा सड़कें- बेदिल शहर
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सड़क दुर्घटनाओं को लेकर हम कब गंभीर होंगे। हर दिन सवा तीन सौ लोगों की मौत हो जाती है। एक मौत होती है तो बीस घायल होते हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ रो...
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क्या जेल फ्लाप हो सकती है?
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सड़े हुए सिस्टम से सारी उम्मीद हार जाएं और अंत में उसी सिस्टम से कोई उम्मीद निकल आए तो अच्छा लगता है। जेल देखते हुए भी यही लगा। धीमी परंतु अ...
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सुधीश पचौरी न रवीश कुमार
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बहुत दिनों से जो बात कहना चाह रहा था उसे किसी युवा पत्रकार ने कह दिया। साफ-साफ कह दिया कि हम किससे प्रेरणा लें। हिंदी में कोई नहीं है। न रवी...
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निर्देशों का शहर
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दिल्ली के सरायकाले खां से जब आप आश्रम की तरफ जा रहे होते हैं तो डीएनडी आने से पहले बाईं तरफ़ ये होर्डिंग मिलेगी। बहुत दिनों से दिख रही थी। इ...
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हम क्वालिटी बेचते हैं
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एक अर्से से दरियागंज जा रहा हूं। प्रिंस पान की दुकान देखता रहा हूं। लेकिन पंद्रह साल बाद आज सड़क पार कर गया। तस्वीरें ली और प्रिंस पान वाले ...
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गायत्री परिवार और हमारी सोसायटी
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लोग धर्मविमुख हो रहे हैं। ऐसा तो नहीं है लेकिन धर्म की शाखायें अपना स्टॉल लगा रही हैं। हमारी सोसायटी में आज हरिद्वार के गायत्री परिवार का स्...
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