देहात का देहान्त

दिल्ली के गांवों में भटक रहा था। बवाना, बुराड़ी, अलीपुर, सिरसपुर, कंझावला, कादीपुर,समालका,बापरौला इत्यादि ग्रामीण इलाकों में शहर को देख रहा था। आपको यह न लगे कि किसी एक इलाके में घूम कर आ गया इसलिए ज़्यादातर का नाम लिख दे रहा हूं। इन इलाकों में घूमते हुए नीतीश पूर्व बिहार के सड़कों की याद आ गई। दिल्ली में दो तरह के देहात हैं। एक ग्रामीण देहात और दूसरा शहरी देहात। कादीपुर बिल्कुल ग्रामीण देहात है। मुनीरका शहरी देहात है। कहते हैं दिल्ली में तीन सौ साठ गांव हैं। उनकी बड़ी ताक़त है। बीस से ज़्यादा विधायक इन इलाकों से चुन कर आते हैं। जब आप इन इलाकों का दौरा करेंगे तो पता चलेगा कि तीन सौ साठ गांवों की कोई औकात नहीं है। सरकार की कोई सुविधा ठीक से इन इलाकों में नहीं पहुंची है। बस समस्याएं अब शहरों वाली हो गईं हैं।

नज़फ़गढ़ से नांगलोई की सड़क सीवर डलने के नाम पर महीनों से बन रही है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि गाड़ियां चलते ही टूटने लगती हैं और हड्डियां चटकने लगती हैं। कहीं पर भी सड़क नहीं है। लोग अपने पैसे से सड़कें बनवा रहे हैं। भलस्वा-स्वरुपनगर की सड़क पर चलने वाले ऑटो वाले सौ-सौ रुपये चंदा कर मलबा डलवाते हैं ताकि सड़क चलने लायक हो सके। सिरसपुर गांव में एक गोदाम के मैनेजर मिले लक्ष्मीकांत शुक्ला। बताया कि तीस हज़ार रुपये खर्च कर सामने की नाली भरवा रहा हूं। सभी ने इसी तरह से पैसे खर्च कर मलबे डाले हैं ताकि कीचड़ रहित ऊबड़-खाबड़ सड़क का लाभ उठा सकें। अजीब दौर है। जो काम सरकार का है वो काम लोग कर रहे हैं। बात बात में खाप करने वाले गांव के इन लोगों को भी नहीं लगता कि दिल्ली के गांवों में सड़क मुद्दा है। कंझावाला गांव के लोग रोने लगे। कहा कि घर में धूल भर आती है। रोटी नहीं खा पाते। फेफड़े की बीमारी हो जाती है। कॉलेज के लड़कों ने कहा कि घर से नहा कर निकलते हैं लेकिन जब पहुंचते हैं तो लड़कियों को लगता है कि नहा कर नहीं आया। पूरा कपड़ा और सर धूल से भर जाता है। कांग्रेस के विधायक चुप रहते हैं क्योंकि वे शीला दीक्षित के ख़िलाफ नहीं बोल सकते। बीजेपी के विधायकों को संघ ने खत्म कर दिया। उन्हें हिन्दुवाद से अलग कुछ मुद्दा नज़र नहीं आता। कीर्तन करने वाली पार्टी बन कर रह गई है। कांग्रेस निरकुंश हो चुकी है। वामपंथी दलों का पता नहीं चलता। वो लेख लिखने में माहिर हो चुके हैं।

ख़ैर आप इस दिल्ली को देखियेगा। हम सबकी अपनी-अपनी दिल्ली होती है। मीडिया की बनाई दिल्ली शानदार शहर है। मेरी दिल्ली प्रवासियों और मूल बाशिंदों के तक़लीफ़ों वाली दिल्ली है। सत्ता और पैसे वाले लोगों की दिल्ली में कोई समस्या नहीं है। उन्हीं की दिल्ली का जश्न चारों तरह नज़र आता है। तीन सौ साठ गांवों की तस्वीर हुड़दंग के संदर्भ में ही दिखाई जाती है। रवीश की रिपोर्ट देखियेगा। आज रात साढ़े नौ बजे। शनिवार सुबह साढ़े दस बजे और रात साढ़े दस बजे। इन तीनों वक्त न देख पायें तो रविवार रात साढ़े ग्यारह बजे देख सकते हैं। अब यह मत कहियेगा कि मैं दिल्ली में ही क्यों फंसा हूं। डेढ़ दिन में ज्यादा दूर नहीं जा सकता। मैंने दो करोड़ लोगों की दिल्ली को ही अपना राज्य मान लिया है। मेरी नज़र से इसमें कोई बुराई नहीं है। हम जहां हैं वहीं अगर ठीक से देखें तो बात आगे बढ़ती रहेगी। बाकी आपकी आलोचनाओं को भी स्वीकार करता हूं। उसमें भी काफी दम है कि सिर्फ दिल्ली ही क्यों?

22 comments:

  1. aapki post ka sheershak itna appealing tha ki bina post padhe hee poore nichod ko samjha ja sakta hai. hamesha ki tarah hindustan ki ek aur samasya, ek aur drishya par prakash dala hai aapne!

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  2. sir mere paas shabd nahi hai is blog ke liye, sach kahu to maine apne mann ki jigyasa shant karne ke liye delhi ke gaon ka 2 days ka daura kiya.dehat mara nahi maara ja raha hai.govt policy builders iske zimmedar hai ye navdhanadhya varg zameen ke paiso se sir mehngi gadiya,ayyashiya or crime hi kar rahe hai.ab din door nahi jab ye dehat ke chaudhary kisi mall mai guard or watchman banege.tab hoga dehant.abhi delhi NCR hai kal kisi dusre city ka dehant ka dehant hoga.

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  3. Ravish sir, bahut dino se is problem ka solution kya ho sakta hai...wo mein soch rahi hu...or aj apne bhi sirf samasya ka hi jikr kiya hai...bahut dhyan se apka blog padh rahi thi ki shayad kuch samadhan ka jikr apne kiya ho...lekin phir nirasha hi hui hai...mein bhi aise hi ek dehat mein hu...jahan 15mnt ka rasta 2ghante ka ban jata hai...so this time can i expect any idea or solution from your side???

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  4. burari men pichle kai saalon se aana jan hai mera..munirka bhi aaa jata hun..burari ke paas wale sant nagar men rhta hun ...abhi tak wahaan kee galiyon men inte tak nahi bichi hain dhang se..bahut se gharon men paani nahi pahuncha.... munirka ke bheetar sadkon par humesha paani behta rahta hai..gandagi dikhti rahti hai

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  5. आपका एक और संवेदनशील सवाल। इस देश के लिए, समाज के लिए और हम सभी के लिए।

    बचपन से हम स्कूल में पढ़ते आये है की भारत गावों में बसता है , पर ये गावं अब हमारे दिल में नहीं बसता।
    हई टेक और मोडर्न होते हुए हम गावों को भूल गए है तू भला सरकार से क्या उम्मीद रखे।
    वह तो भारत उदय और भारत निर्माण के विज्ञापन बनाने में व्यस्त है।

    रविश जी , आप हमेशा अपने रिपोर्ट में गावों और मोहल्ला की दुर्दशा दिखा कर कहते है की येसी जगह पर आ कर PM को देखना चाहिए, पर उनका दोरा तो तभी होगा जब वहां कोई बड़ी दुर्घटना हो जाये या किसी महा पुरुष के नाम का कोई स्कीम चालू करना पड़े।

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  6. Namaskar Ravish Kumar Ji..........Intejaar ho raha hai ab to sirf aapki report ka.....wakai mein delhi ke dehat ka dehant ho chuka hai......acchi sadak nahi hai....nai hi wo gaon wala dehati jeevan....khane mein roti daal ki jagah chips aur kurkure aa gayein hain...!

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  7. आप हमारे इलाके में गए । आपका आभार ।
    साहब सिंह वर्मा जी ने दिल्ली देहात में बहुत काम करवाया था । हमारे गाँव में पहली बार समुदाय भवन बना ।

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  8. दिल वालों की दिल्ली, सब क् सब दिल पर लिये बैठे हैं।

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  9. रविश जी,
    अभी देखी आपकी रिपोर्ट , हालाकि ब्लॉग पढने के बाद ऐसी ही रिपोर्ट की उम्मीद थी , जो दिल्ली (सबका भारत भी) के गावों के विकास का सच देखाए.

    पर आपकी अंतिम लाइन से ऐसा लगा की किसी ने गाल में जोरदार तमाचा लगा दिया हो.

    सर जी, नाच गाने देखने वाले देखते होगे, पर हम कुछ लोग आपकी ही रिपोर्ट देखते है.
    हम तो सैनिक नहीं है जो बोर्डर में जा कर देश की सेवा करे. तो क्या आपके रिपोर्ट के मध्याम से देश के हालत के बारे में नहीं सोच सकते.

    मुझे खुशी हे की आप TRP के पीछे नहीं समस्या और आम जनता के पीछे भागते है.

    आपसे सदा ऐसे ही रिपोर्ट की हसरत रहेगी.

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  10. Sir, pata nahi log itne sahashnoo kyon hote ja rahe hain!.. aur bhool se koi agar kisi vyavastha par aawaz uthata hai toh use hi alien ki tarh dekha jata hai.. Need to wake up!! Request hai ki aap toh BJP ko styreotype na karein.. Agar BJP kuchh achha bhi karti hai, toh humare pro-govt media, gulami ki zanzeeron se bahar aakar kuchh nahi kahata..
    Kabhi-kabhi toh News dekhte waqt lagta hai ki BJP walon ki Hasti itni buland hai ki MEDIA even doesn't want people to see it's leaders' pictures.. Sure Congress will be scared but why Media is busy proving BJP to be religion biased Party? Does being SECULAR means disbelieving our own faith n religion?? Why everyday we listen to news calling RAHUL GANDHI "yuvraj" is this RAJTANTRA or democracy? point is even surname GANDHI is BURROWED one.. Pl.clear the air about GANDHI surname. Why media relate Congress party with our freedom movement-CONGRESS? Every Indian was attached to congress movement.. phir Cong I apne ko Gandhi ji aur freedom fight ka Waaris kyon samajhti hai? Why u don't talk about EMERGENCY often??
    Take Jaipur- in BJP rule it was flourishing as a Heritage city. Vasundharaji's work was overshadowed by Calling her MAHARANI..n by the way she earned revenue..WHY? Good if she had aesthetic sense & was improving roads n all.. Now see the condition of main roads -ALL PATCHED-LIKE CONGRESS-"Kahin ki eent kahin ka roda.." WHY didn't you talk about that condition created by Gahlot Govt.?
    Last tenure mein jab Rajasthan mein akaal tha tab Gahlot Govt fountains chalane mein aur apni Gardener skills ko dekhane mein lagi thi but Now jab there are beautiful fountains put by last Govt- He stopped the lights n water saying it's wastage of money.. Sahi baat yeh hai Congress is non willing to listen to the praise of others' work.. It believes in corruption & Monarchy that's it!

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  11. धन्यवाद रवीश जी, आपकी आज की शानदार रिपोर्ट के लिए। दिल्ली की सड़कों की बदहाल स्थिति से रोज साबका होता है। चूंकि बुराड़ी में ही रहता हूं, इसलिए इसे झेलता भी हूं। काफी सड़कें तो आपने देख ली, लेकिन बुराड़ी में ही कुछ छूट गया है, जो देखते तो शायद रो पड़ते। जो बात आपने कही मनमोहन सिंह को न्यौता देने की, ये ख्याल मेरे दिमाग में भी था, कि विदेश दौरे पर अक्सर रहने वाली महामहिम राष्ट्रपति को ही न्योता दिया जाए, भगवान भरोसे ही सही, अगर लॉटरी लगी और उन्होंने मान लिया तो इलाके के दिन तो बहुरेंगे, क्योंकि जिन सड़कों पर बड़े नेता नहीं चलते, वे सड़कें ही कहां चलती हैं?

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  12. मैं आपके फेसबुक अकांउट पर कमेंट क्यों नहीं कर पा रहा हूं, ये मुझे नहीं मालूम???

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  13. Saadar prannam sir ,
    kal aapka report dekha, is report ke bare me net se pata chala tha kal. Ies tarah ka hoga socha nhi tha..
    dekhane ke bad samajh me nhi aa raha hai nhi tha ki kya kahu.
    mai kal puri report news pe nhi dekh paya tha isliye baki aaj net pe dekha. aapne sahi ka ki sarkar ko koi farak nhi parta . hai ham logo ki aatma so gayi hai.ham aapni personal life me hi itne uljhe huye hai ki baki dunia ki fikar hi nhi hai. Sarke kharab hai, hame roj taklif hoti hai,hum roj galiyan dete hai sarkar ko lekin jab kuch karne ki bari aati hai, Hum sidhe kaht Hume kya matlab. pata nhi ham kab jagenge.
    Sayad Hume aur Hamri sarkaro ko jagane ke liye Mishrr aur tunesia jaise andolan ki jarurat hai,Likin fir wahi saval ki Akhir karega kaun.

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  14. Aap ye na Kahiye ki News Channel sirf Naachne gaane k liye Dekhte hain Hum...
    Aapki Report k Mureed Hain...
    Hume Nayi Disha Milti h aapke Hone Se...
    Aapki Report se kisi ki Aankh Khule ya na khule Meri Khulti h..Dhanyawaad Sahit
    'Chiranjeev' Vipin Kharkwal

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  15. गाँव जीवन और मन से दूर हो रहे हैं....

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  16. Tv na hone ke karan ap ki report to nhi dekh pate bs tubaah ke hi bharose rhte hain fir bhi lekh padker hi samajh me aa jata hai ki report me kya hoga. Bhut hi accha subject hai bs apse ek gujarish hai ki problems ke sath sath uske kuch solutions b batate chalte to govt nhi to kam se kam aam admi to kuch krta uske liye .aur is umda report ke sath sath kuch accha kaam bhi hota jata..... Na jane kinhi karno se apki facebook frnd list se remove ho gya hu jisse apke updates nhi mil pate hain yadi ap frnd rqst bhej de to accha rhta http://facebook.com/anoopdreams

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  17. http://adayinlife.timesofindia.com/photoDisplay.php?photoId=31953

    dehat ka ek haal idhar bhi dekhain

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  18. रविश जी आपकी रिपोर्ट आपके छंद आपके ब्रह्मा वाकया आपकी दूर दर्शिता और आपकी अनोठी सोच की मैं दाद देता हूँ. एक बिलकुल अलग और दिल से लिखी हुई रिपोर्ट बहुत प्रभाभित करती है. kuchh sulgaati है और फिर बुज सी जाती hai. मैं कुछ यूँ सोचता हूँ की कभी आपसे मुलाक़ात हो और हम भी आप से जाने के आप का प्रस्तुतीकरण न डी टी व् की दें है याह आपके ब्लॉग की तरह, दिल से निकली हुई आवाज़. जो भी है मन को भाति है और तभी आपकी प्रशंसा के पुल रात के १०.३० बजे कह रहा हूँ. ऐसा लगता है की पत्रकारिता के क्षेत्र में आपका योगदान स्वर्णिम अक्षरों में लिख दिया गया है.

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  19. रवीश भाई ! आपको भाई तो कह सकता हूँ ..उम्र मैं आपसे छोटा भी हूँ और आप ही कि तरह देल्ही मैं होकर भी यहाँ का नहीं हूँ...
    जब भी आपकी रिपोर्ट देखता हूँ या आपका ब्लॉग पड़ता हूँ तो लगता है कि जैसे आपके मन मैं भी एक अजीब सा विचार पल रहा है ....देल्ही को समझने का या फिर एक छोटे से कसबे से निकल कर महानगर मैं कहीं खो जाने का...ऐसे ही रिपोर्ट्स दिखाते रहिये ...ऐसे ही ब्लॉग अपडेट करते रहिये...एक जुड़ाव सा हो गया है आप से...
    पिताजी कहते ही कि मैं भगेडू हूँ यानी भागना चाहता हूँ उन्हें कैसे समझाऊँ कि माल संस्कृति को अपना तो लिया है मगर एक अजीब सी उलझन के साथ...

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  20. नेता गाव की तस्वीर नही बदल रहें ..कोई ये न कह दे की भाई गाव बदल गए ...
    गाव मैं कुछ नही बदला ..ज्यो का त्यों हैं .. वही टूटी सदके ... वही पानी टूटी नालिय ..बस बदला तो चोपाल का नाच गाना गया ...नुक्कड़ के ठाहाके गए ..हुक्का गडगडाना बदला ..बाकी सही हैं ..सदके बिजली गलिया बदली नही हैं ...'अनिल अत्री
    http://anilattrihindidelhi.blogspot.com

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  21. सही ही लिखा है आपने दिल्ली के देहातों के बारे में.ऐसी ही स्थिति सभी जगह गावों की है.

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  22. दिल्ली दिल वालों की है....इसलिए जनाब दिल्ली को कोसना उचित नहीं....वैसे एक बात तो सही है... इस शहर में अगर आप रुपए-पैसे से मजबूत हैं...नीचे आपके चमचमाती गाड़ी है...तो फिर दिल्ली नाम के जन्नत में ऐश कीजिए...और अगर आप किसी तरह बस अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं तो फिर इस शहर में आपका दिक्कतों से दो-चार होना लाजमी है.....

    SHIVAMM

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